बिजली प्लांटों का स्पेशल ऑडिट क्यों कराएगी सरकार, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

- थर्मल एनर्जी के घाटे को कम करने की कवायद

- घाटे वाले प्लांट का आकलन कर बनेगी नई रणनीति

भोपाल. प्रदेश के बिजली प्लांटों का सरकार अब स्पेशल ऑडिट कराएगी। दरअसल, लगातार थर्मल एनजी प्लांटों के घाटे के कारण सरकार ने इनका आकलन करना तय किया है। इसमें ज्यादा प्लांट लोड फैक्टर वाली इकाईयों पर विशेष तौर पर शिकंजा कसा जाएगा, ताकि बिजली के घाटे को काबू में किया जा सके।
राज्य सरकार ने फ्रांस की कंपनी के जरिए अब प्रदेश में बिजली व्यवस्था को सुधारने की कवायद शुरू की है। इसके तहत बिजली कंपनियों की मानीटरिंग के लिए भी एक अलग कमेटी गठित करने की तैयारी है, जिसके बाद अब थर्मल पॉवर प्लांट के घाटे का आकलन करना तय किया गया है। इसमें यह देखा जाएगा कि कौन से बिजली प्लांट पर किन कारणों से घाटा हो रहा है, ताकि उस पर काबू पाने के कदम नए सिरे से उठाए जा सके। इसमें उन प्लांट्स को विशेष तौर पर देखा जाना है, जहां पर पिछले तीन सालों में प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) निर्धारित मापदंड से ज्यादा आ रहा है।

ज्यादा घाटे के कारण फार्मूला बदला
निर्धारित मानक से ज्यादा पीएलएफ होने के कारण सरकार ने बिजली की उपलब्धता को लेकर अपना फार्मूला ही बदल दिया है। पहले पीएलएफ यानी प्लांट लोड फैक्टर के आधार पर आकलन होता था, लेकिन सरकार ने अब इसकी बजाए पीएलए यानी प्लांट लोड अवेलेबिल्टिी को काउंट करना शुरू कर दिया है। इसके तहत प्लांट की क्षमता को बताया जाता है, जबकि लोड फैक्टर से होने वाले घाटे को छिपा लिया जाता है।

 

बंद हुई कई इकाइयां
पुरानी व अधिक पीएलएफ वाली इकाइयों को पिछली सरकार ने लगातार बंद किया है। पिछले पांच साल में चार इकाइयां बंद की गई है। इनमें सतपुड़ा प्लांट की इकाइयां शामिल हैं। दरअसल, लगातार निजी सेक्टर से बिजली खरीदी करने के कारण जर्जर हो चुकी घाटे वाली इकाइयों को बंद किया गया है।

नई इकाइयों की बजाए निजीकरण
सरकार ने नई थर्मल इकाइयां लगाने की बजाए अब निजी सेक्टर से खरीदी का फार्मूला अपना लिया है। इसके तहत थर्मल इकाई की स्थापना की बजाए निजी सेक्टर से सीधी खरीदी की जाती है। इसके तहत आगे भी नए प्लांट नहीं लगाए जाएंगे। सरकार अब वैकल्पिक बिजली की ओर अधिक ध्यान दे रही है। इसके तहत सौर ऊर्जा पर सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

बिजली के घाटे पर लगातार काबू किया जा रहा है, इसके कई स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। फ्रांस की कंपनी से भी एमओयू हुआ है। हम बिजली प्लांटों का अध्ययन भी कर रहे हैं। अभी बिजली बिलों को कम कर दिया गया है, अब बिजली के घाटे को भी काबू में लाएंगे।
- प्रियव्रत सिंह, मंत्री, ऊर्जा विभाग

anil chaudhary
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