एमपी में सक्रिय रहेंगे सिंधिया या फिर होंगे बाहर! ज्योतिरादित्य की जगह इस नाम पर बन सकती है सहमति?

ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश की सियासत में सक्रिय हैं।

भोपाल. झाबुआ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद जहां कांग्रेस की सरकार मजबूत हुई है वहीं, माना जा रहा है कि अब जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। कहा जा रहा था कि दिवाली के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की घोषणा दिवाली बाद हो सकती है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में कई दावेदार हैं। इन दावेदारों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उपचुनाव में जीत के बाद प्रदेश अध्यक्ष के समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि अभी तक यह तक नहीं है कि प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा।


जीत से बनी नई रणनीति
झाबुआ उपचुनाव में जीत के साथ कई नई समीकरण भी बने हैं। मध्यप्रदेश के सीएम कमल नाथ प्रदेश में आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष की मांग कर रहे हैं। प्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार का नाम प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में शामिल था लेकिन दिग्विजय सिंह और सिंघार विवाद के बाद ये माना जा रहा है कि उमंग सिंघार प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ से बाहर हो सकते हैं। कांतिलाल भूरिया को जब झाबुआ उपचुनाव के लिए टिकट मिला तो सोशल मीडिया में कई तरह के पोस्ट वायरल हुए थे। कांतिलाल को मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम या फिर कैबिनेट मंत्री बनेंगे ऐसे पोस्ट झाबुआ में लगाए गए थे। ऐसे में कमल नाथ प्रदेश अध्यक्ष के लिए कांतिलाल भूरिया का नाम आगे बढ़ा सकते हैं। कांतिलाल भूरिया के नाम पर दिग्विजय सिंह भी मान जाएंगे क्योंकि कांतिलाल भूरिया की दिग्विजय और कमलनाथ दोनों से ही संबंध हैं। कांतिलाल भूरिया मध्यप्रदेश के बड़े आदिवासी नेता हैं। ऐसे में कमलनाथ झाबुआ में जीत के बाद कांतिलाल भूरिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की सिफारिश कांग्रेस अलाकमान से कर सकते हैं।


आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष क्यों चाहते हैं कमल नाथ
मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष के लिए आदिवासी चेहरा चाहते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा आदिवासी इलाके में जीत दर्ज की थी। जबकि लोकसभा में पार्टी आदिवासी इलाकों में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। ऐसे में कमलनाथ आदिवासियों की नाराजगी दूर करने के लिए आदिवासी चेहरे पर दांव लगाना चाहते हैं।

छठवीं हार बने विधायक
कांतिलाल भूरिया छठवीं बार विधायक बने हैं। हालंकि वो झाबुआ विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीते हैं। इससे पहले वो झाबुआ जिले की थांदला विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं।

प्रदेश और केन्द्र में रहे मंत्री
कांतिलाल भूरिया, अर्जुन सिंह की कैबिनेट में संसदीय सचिव रहे तो वहीं, दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में प्रदेश के आजाक मंत्री थे। 1998 में पहली बार सांसद बने। इसके बाद 1999, 2004, और 2009 में भी सांसद रहे। 2003 में यूपीए सरकार में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री बनाया गया। वहीं, यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में ट्राइबल मंत्री बने। 2001 में उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

Pawan Tiwari
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