...तो लंबे समय तक नहीं पड़ेगी इंसुलिन की जरूरत

asif siddiqui

Publish: Nov, 14 2017 06:21:33 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
...तो लंबे समय तक नहीं पड़ेगी इंसुलिन की जरूरत

भोपाल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कैसे होगा डायबिटीज का खतरा कम, हनीमुन फेस में इंसुलिन की बजाए लें डॉक्टर की सलाह।

भोपाल। दस साल पहले तक 20 साल से कम उम्र के लोगों में रेयर केस में ही डायबिटीज के लक्षण देखने को मिलते थे, लेकिन अब छोटी उम्र में ये समस्या देखने को मिल रही है। हनीमुन फेस इन टाइप-1 डायबिटीज को शुरुआत दौर में ही डिटेक्ट कर लिया जाए तो काफी लंबे समय तक इंसुलिन की जरूरत नहीं होती। टाइप-2 में भी यदि मरीज इंसुलिन लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले लें तो महज एक महीने के डोज में उसका इंसुलिन लेना बंद हो जाएगा। यह बात वल्र्ड डायबिटीज-डे पर हमीदिया अस्पताल में विशेषज्ञ प्रोफेसर्स ने कही।

उम्र नहीं देखता डायबिटीज
गांधी मेडीकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सचिन चित्तावर, पीडियाट्रिशियन डॉ. जयश्री नाडकर्णी, मेडीसिन विभाग के प्रमुख डॉ. केके कावरे तथा डीन प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने डायबिटीज से रोकथाम के उपाए बताए। डॉ. चित्तावर ने बताया कि डायबिटीज के 100 मरीजों में से लगभग 10 मरीज टाइप वन डायबिटीज के मरीज होते हैं तथा इसमें से अधिकांश मरीज बच्चे होते हैं। शरीर में जब इंसुलिन बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है तब इस अवस्था को टाइप वन डायबिटीज माना जाता है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। भारत में तीन में से दो टाइप वन डायबिटीज के मामले कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा अवस्था में सामने आते हैं।

खानपान से खतरा
डॉ. ज्योत्सना ने बताया कि कमजोर सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि के मरीजों पर इलाज का खर्च परेशान करने वाला होता है। डॉ. कावरे ने कहा कि मोटापे व खानपान की बदलती आदतों से बच्चों में टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है। डायबिटीज के प्रति अवेयरनेस लाने के लिए स्कूल-कॉलेज में वर्कशॉप भी आयोजित की जाएगी।

क्या है टाइप-1 डायबिटीज
डायबिटीज मेटाबोलिज्म में विकार से होता है। जो भोजन हम लेते हैं वह ग्लूकोस में परिवर्तित होता है। ग्लूकोस के साथ इन्सुलिन की प्रक्रिया से ग्लूकोस शरीर की कोशिकाओं में जाकर ऊर्जा प्रदान करने में समर्थ होता है। इन्सुलिन एक हार्मोन है जो पैंक्रियास, पेट के पीछे स्थित एक बड़ी ग्रंथि के कारण होता है।

टाइप-2 डायबिटीज
टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन तो बनता है लेकिन वो असरदायक नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में टाइप2 डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है। टाइप1 डायबिटीज में दवाओं की भूमिका बिलकुल नहीं होती है, मरीज को रोज इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती ही है।

योग हो सकता है कारगार
योग के माध्यम से डायबिटीज दूर होने के दावों पर डॉ. चित्तावर का कहना है कि मधुमेह की कोई चिकित्सा नहीं है। नियंत्रित वजन, उचित व्यायाम और आहार इसे नियंत्रित करने में आपकी सहायता कर सकते हैं। ये आम धारण है कि डायबिटीज मरीज सामान्य जीवन नहीं जी सकता, लेकिन यदि सही परामर्श मिले तो वे सभी प्रकार के फूड आइटम्स खाते हुए सामान्य जीवन जी सकता है।

महिलाएं ज्यादा प्रभावित
डॉ. चित्तावर के अनुसार सामाजिक कारणों से महिलाएं इसकी ज्यादा शिकार होती है। गर्भवती महिलाओं को 24 से 28वें महीने में डायबिटीज चैकअप कराना चाहिए, यदि गर्भवती महिला को ये समस्या है तो उसके बच्चे को ये समस्या स्थायी तौर पर हो सकती है।

डॉक्टर ही नहीं जानते इलाज
टाइप-१ से पीडि़त मरीज तो महज कुछ ही दिनों में डिटेक्ट हो जाते हैं, लेकिन टाइप-२ डायबिटीज से पीडि़त को सालों तक इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चल पाता। इसका एक कारण डॉक्टरों का इस बीमारी के प्रति जागरूक नहीं होना है, खासकर ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टर।

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