MP में आएंगे होमोसेक्सुअल्स, लेस्बियन और ट्रांसजेंडर्स, पहली बार होगी प्राइड परेड

मध्यप्रदेश में पहली बार गे परेड भोपाल में होने जा रही है। इसमें लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर शामिल होंगे। इससे पहले मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चैन्नई और कोलकाता में इसका आयोजन हो चुका है।

भोपाल। अब तक आपने गे-परेड, प्राइड परेड के बारे में यही सुना होगा कि यह विदेशों में होती है। लेकिन, समलैंगिकों की यह परेड अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में होने वाली है। इसकी तैयारी जोरशोर से शुरू हो गई है। भोपाल में होने वाली यह परेड अपने आप में अलग होगी। MP में यह आयोजन पहली बार होने जा रहा है। इसमें लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर शामिल होंगे। इससे पहले मुंबई,बैंगलुरू, दिल्ली और कोलकाता में इसका आयोजन हो चुका है।

देशभर से आएंगे सपोटर्स
इंडिया में पहली बार इसका आयोजन कोलकाता में हुआ था। इसके बाद मुंबई, बेंगलुरु और दिल्ली में भी प्राइड परेड ने काफी सुर्खियां बटौरी थी। इस गे परेड में भोपाल समेत देशभर से ट्रांसजेंडर, होमोसेक्सुअल्स, बाईसेक्सुअल और लिस्बिन शामिल होंगे। इनके अलावा इन्हें सपोर्ट करने वाली संस्थाएं और वालिटिंयर्स समेत इंटरनेशनल मीडिया भी इन्हें कवर करने आएगा। यह परेड मई 2017 में भोपाल में होगी।

क्या है प्राइड परेड?
यह समलैंगिकों की प्राइड वॉक है। खुद की आइडेंटिटी पर गर्व करने के लिए इसका आयोजन किया जाता है। समान अधिकारों की मांग की जाती है। इन्हें भी समाज में बराबर का दर्जा मिले इसकी मांग की जाती है। हालांकि प्राइड परेड एक प्रदर्शन न होकर एक उत्सव होता है। इसमें हिस्सा लेने वाले मानते हैं कि परेड में शामिल होने वाले गे लोगों को मुंह न छिपाना पड़े और वे सिर उठाकर समाज का हिस्सा बन सके।



कई नाम है इसके
प्राइड परेड को अनेक नामों से पुकारा जाता है। कहीं गे प्राइड, प्राइड वॉक, प्राइड मार्च, गे परेड, गे वाक, समलैंगिक और ट्रांसजेंडरों का जुलूस भी कहा जाता है।


इसका आयोजन भोपाल में ही क्यों
प्राइड परेड का आयोजन कई संस्थाएं मिलकर भोपाल में कर रही हैं। इस संस्था की एक अधिकारी ने बताया कि इंडिया का दिल होने के कारण यह महत्वपूर्ण शहर है। प्रदेश के समलैंगिकों को कोई राइट्स नहीं मिल रहे हैं। यहां भी जो लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर हैं उन्हें समाज में अलग निगाह से देखा जाता है। इसलिए वे घर में ही दबे रह जाते हैं। इनके बारे में कोई बात नहीं की जाती है। ऐसे लोगों की शादी नहीं हो पाती है। भोपाल समेत मध्यप्रदेश के कई जिलों में इस प्रकार के लोग हैं, जो खुलकर समाज के सामने नहीं आ पाते। बल्कि तिरस्कार झेलते हैं।




प्राइड परेड का यह है उद्देश्य
प्राइड परेड का उद्देश्य यह है कि हमें समाज में समान नजरों से देखा जाए। वे घर-परिवार में भी दबे रह जाते हैं। उन्हें भी खुलकर बाहर आकर जीने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्हें सहानुभूति नहीं करुणा की नजरों देखना महत्वपूर्ण बात है। समलैंगिकों के इस समुदाय का आदर एक मनुष्य की भांति किया जाना चाहिए। आयोजकों को उम्मीद है कि यह परेड ऐसे लोगों को खुलकर जीने की प्रेरणा देगी।


परेड में शामिल होंगे LGBT
L स्त्री-समलैंगिक (लेस्बियन)
G पुरुष-समलैंगिक (गे)
B उभयलिंगी (बाईसेक्सुअल)
T ट्रांसजेंडर






WORLD में हो रहा है इसका प्रचार
प्राइड परेड का प्रचार पूरे विश्व में हो रहा है। इसमें न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, वैंकुवर, एमस्टरडम, बैंकाक, बर्लिन, बार्सिलोना, मेंड्रिड, टोकियो, कुराकाओ, साओ पावलो, कोपेनहेगन, लॉस एंजेलिस, ब्रूसेल्स, ऑस्लो, पेरिस, तेल अबीव, ज्यूरिच, एथेन्स, विएना, टोरंटो, लंदन, स्ट्टगार्ट, बेलफास्ट, हैम्बर्ग, प्राग, रेकजेविक , रियो डी जेनेरो आदि देशों में अब तक पिछले तीन सालों में 200 से भी अधिक प्राइड परेड हो चुकी है।


GAY PARADE के बाद ये
विश्व में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे समलैंगिंक गे परेड के बाद गे होटल्स, गे बीचेस, गे पर्यटन, गे जलयात्रा, गे स्कीइंग, गे फ्रेंडली द्वीप को भी बढ़ाना चाहते हैं।







भारत में होमोसेक्सुअल गैरकानूनी
समलैंगिगता को भारत में अपराध माना जाता था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2009 में ही IPC की धारा 377 को हटाकर समलैंगिकता को अपराधमुक्त कर दिया था। इसके बावजूद धार्मिक समूह इस समुदाय का विरोध करते रहे। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को गैर कानूनी करार दे दिया।

Pride Walk 2017

ऐसे शुरू हुई प्राइड परेड
अमेरिका में भी समलैंगिकता गुनाह था। 1950 में इसे मान्यता देने की लड़ाई शुरू हो चुकी थी। 1960 में आते-आते एक्टिविस्ट सड़कों पर उतरे और पिकेटिंग के जरिए सरकार तक समान अधिकार की मांग करने लगे। अमेरिका में कुछ गे बसेरे और गे बार भी चल रहे थे। इनमें ट्रांसजेडर, लिस्बियन और गे लोग जाते थे। यहां पुलिस ने छापा मारा और उन्हें गिरफ्तार किया तो यह मुद्दा बड़ा हो गया। अमेरिका में जितने भी समलैंगिक और ट्रांसजेंडर थे वे सड़कों पर उतर आए और यह दुनिया की पहली प्राइड परेड बन गई थी।


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