विहिप पुरी मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश के सुझाव के विरोध में, राज्यपाल को दिया ज्ञापन

विहिप पुरी मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश के सुझाव के विरोध में, राज्यपाल को दिया ज्ञापन
jannath mandir file photo

| Publish: Jul, 17 2018 08:00:02 PM (IST) Bhubaneswar, Odisha, India

विश्व हिंदू परिषद ने राज्यपाल प्रो.गणेशी लाल को सौंपे ज्ञापन में पुरी मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का विरोध किया

(महेश शर्मा की रिपोर्ट)

भुवनेश्वर। विश्व हिंदू परिषद ने राज्यपाल प्रो.गणेशी लाल को सौंपे ज्ञापन में पुरी मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का विरोध किया। विहिप की ओडिशा इकाई के कार्यवाहक अध्यक्ष बद्रीनाथ पटनायक ने बताया कि ज्ञापन राज्यपाल के माध्यम से चीफ जस्टिस और केंद्र सरकार को भेजने का अनुरोध किया गया है। राज्यपाल ने ज्ञापन अग्रसारित करने का आश्वासन दिया। उनका कहना है कि मंदिर को लेकर कोई भी कदम उठाने से पहले पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देब और पुरी गोवर्द्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती से बातचीत की जानी चाहिए।

 

पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे

 

श्रीमंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर चर्चा तब शुरू हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने श्रीमंदिर प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी धर्मों के दर्शनार्थियों को भगवान की पूजा करने दें। मालूम हो कि विहिप ने भी विरोध जताते हुए कहा कि वह इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी ताकि न्यायालय अपने प्रस्ताव पर फिर से विचार करे। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती पहले ही कह चुके हैं कि सनातन धर्म की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लंघन कर श्री मंदिर में सभी को
प्रवेश की अनुमति देना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

 

भगवान दर्शन देने खुद बाहर आते हैं

 

गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य श्री जगन्नाथ मंदिर में पंडितों की शीर्ष संस्था मुक्ति मंडप के प्रमुख होते हैं। गजपति राजा दिब्यसिंह देव ने कहा कि वार्षिक रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को मंदिर से बाहर ले जाया जाता है ताकि वे विभिन्न धर्मों के भक्तों को आशीर्वाद दे सकें और 'स्नान उत्सव' के दौरान भी लाखों लोग उन्हें देखते हैं। गजपति महाराज ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का प्रस्ताव एक अंतरिम आदेश की तरह है। गैर हिंदुओं का प्रवेश उचित न होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंध समिति रथ यात्रा के बाद इस मुद्दे पर चर्चा करेगी और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन उसी अनुरूप कदम उठाएगा।

 

वंशानुगत सेवा प्रथा खत्म न करें

 

विहिप की ओड़िशा इकाई के कार्यवाहक अध्यक्ष बद्रीनाथ पटनायक ने बताया कि विहिप इस सुझाव का विरोध करती है। मंदिर को लेकर कोई भी कदम उठाने से पहले पुरी के गजपति राजा दिव्यसिंह देब और पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से विचार - विमर्श किया जाना चाहिए। 12 वीं सदी में निर्मित इस मंदिर में अभी सिर्फ हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति है। विहिप नेता ने श्री जगन्नाथ मंदिर में वंशानुगत सेवादार प्रथा को खत्म करने के शीर्ष न्यायालय के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि कैसे कोई एक सेवक का मूल अधिकार छीन सकता है? श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम पीढ़ियों से मंदिर में सेवा कर रहे सेवकों के अधिकार की रक्षा करता है।

 

जरूरत पड़ी तो एक्ट बदलेंगे

 

राज्य सरकार के कानून मंत्री प्रताप जेना ने कहा कि राज्य सरकार जगन्नाश मंदिर की व्यवस्था में सुधारों को लेकर उत्सुक है। ऐसा कहते हुए जेना ने कहा कि अगर जरूरी होता है तो सरकार जगन्नाथ मंदिर अधिनियम 1954 में भी संशोधन करेगी। वरिष्ठ भाजपा नेता बिजय महापात्र ने बताया कि सेवकों के वंशानुगत अभ्यास को रोकना मुश्किल है। मालूम हो कि इससे पहले भी पुरी जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट को जगन्नाश मंदिर के सेवकों के वंशानुगत सेवाओं को रोकने का सुझाव दिया था। उनका कहना है कि श्री जगन्नाथ मंदिर की किसी अन्य मंदिर से तुलना नहीं की जानी चाहिए। पुरी का मंदिर एक अद्वितीय तीर्थस्थान है क्योंकि यहां सेवक देवी- देवताओं के कम से कम 120 अनुष्ठान करते हैं।

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