चिलिका झील को मिलने वाली है नई सौगात,जल्द विकसीत होगा वाटर एयरोड्रम,उड़ेंगे सी प्लेन

चिलिका झील को मिलने वाली है नई सौगात,जल्द विकसीत होगा वाटर एयरोड्रम,उड़ेंगे सी प्लेन
Lake Chilika

Prateek Saini | Updated: 25 Jun 2018, 03:14:55 PM (IST) Bhubaneswar, Odisha, India

शीघ्र ही चिलिका झील में वाटर एयरोड्रम विकसित हो सकता है। केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस ओर कदम बढ़ा दिए है...

महेश शर्मा की रिपोर्ट...

(भुवनेश्वर): शीघ्र ही चिलिका झील में वाटर एयरोड्रम विकसित हो सकता है। केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इस ओर कदम बढ़ा दिए है। स्पाइस जेट कंपनी ने यह कार्य करने की इच्छा भी जताई है। स्पाइस जेट एयरलाइंस एएआई (एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया) ओडिशा के चिलिका झील में वाटर एयरोड्रम संचालित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसकी प्री-फिजिबिल्टी रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। बीती 14 और 15 जून को डीजीसीए, चिलिका विकास प्राधिकरण, स्पाइस जेट कंपनी, मौसम विभाग सहित संबंधित विभागों की टीम ने चिलिका का दौरा किया। फिजीबिल्टी रिपोर्ट बनाई। वाटर एयरपोर्ट बनने से यहां पर सी प्लेन उतारे जा सकेंगे।

विशिष्ठ पहचान रखती है चिलिका झील

एएआई के महानिदेशक डा.गुरुप्रसाद महापात्र ने इस आशय का चीफ सेक्रेटरी एपी पाढ़ी को 11 जून को पत्र लिखा था। राज्य सरकार के अपर सचिव बीके बिस्वाल ने बीजू पटनायक एयरपोर्ट अथारिटी के निदेशक को पत्र लिखकर समन्वय बैठाते हुए योजना को आगे बढ़ाने को कहा है। इस प्लान में सबसे बड़ी जरूरत पर्यावरण के दृष्टि से अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल करने की है। ओडिशा के समुद्री जल से बनी झील चिलिका पूर्व तट पर है। इसे यूनेस्को से वर्ल्ड हेरिटेज का स्टेटस प्राप्त है। यहां भारी हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं। नाशपाती के आकार की झील का बड़ा हिस्सा पुरी में है। खोरदा और गंजाम जिले को भी यह छूती है। करीब 70 किलोमीटर लंबी 30 किलोमीटर चौड़ी चिलिका झील समुद्र का ही भाग है, जो महानदी द्वारा लाई गई मिट्टी के जमा हो जाने से समुद्र से अलग होकर छिछली झील की शक्ल अख्तियार कर लेती है। दिसंबर से जून तक इसका पानी खारा रहता है पर वर्षा में मीठा हो जाता है। औसत गहराई तीन मीटर बताई जाती है। वाटर एयरोड्रम विकसित होने के बाद पर्यटन की संभावना और भी बढ़ जाएगी।

 

सी प्लेन लैंड कर सकेंगे

सी प्लेन खास किस्म का एयरक्राफ्ट है जो जमीन के साथ-साथ पानी से भी टेकआफ कर सकता है। दोफुट पानी में भी लैंड कर सकता है। रेस्क्यू आपरेशन में इसका उपयोग किया जा सकता है। तीन सौ मीटर के रनवे पर भी उड़ान भर सकता है। यानी तीन सौ मीटर लंबाई वाले जल मार्ग इसके उड़ान भरने और लैंड करने के लिए उपयुक्त होगा। स्पाइस जेट चिलिका में वाटर एयरोड्रम विकसित करने का मौका दिया जाएगा। देश में यही कंपनी है जो वाटर एयरोड्रम पर काम कर रही है। ये एंफीबियस कैटेगरी के प्लेन कहे जाते हैं।

 

जापान से खरीदे जाएंगे 100 सी प्लेन

उड्डयन नियामक डीजीसीए ने एक कमेटी बनाई है, जो ऐसी करीब 15 साइट्स की पहचान कर रही है, जहां से सी प्लेन उड़ाया जा सके। चिलिका भी उन्हीं में से एक है। एयरोड्रम की तर्ज पर इन्हें वाटर एयरोड्रम में बदला जाएगा। सूत्रों के अनुसार स्पाइस जेट की योजना देश में 100 विमान मंगाने की है। सरकार इस प्रोजेक्ट के प्रथम चरण में 32 स्थानों पर सी प्लेन शुरू करने पर सोच रही है। इस काम शुरू है। एक सी प्लेन की कीमत 25 करोड़ बताई जाती है। जापान को इसमें महारथ है। कहा जा रहा है कि स्पाइस जेट जापान से 100 प्लेन खरीदेगा।

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