किसान जसवंत मौत मामले में महापंचायत विफल, जिले में 25 अगस्त तक धारा 144 लागू

किसान जसवंत की मौत मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर होने वाली महापंचायत शुक्रवार को प्रशासन की व्यवस्था के आगे विफल हो गई है

By: Rajkumar

Updated: 18 Aug 2017, 05:32 PM IST

बिजनौर। थाना कोतवाली शहर बिजनौर में पुलिस उत्पीड़न से किसान जसवंत की मौत मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर होने वाली महापंचायत शुक्रवार को प्रशासन की व्यवस्था के आगे विफल हो गई है। महापंचायत अन्याय विरोधी संघर्ष समिति द्वारा जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को किसान मौत मामले में जिला के कलेक्ट्रेट आॅफिस में महापंचायत का आयोजन किया गया था। आरएलडी पार्टी के वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी भी इस महापंचायत में शामिल होने बिजनौर आ रहे थे। लेकिन पुलिस ने इस महापंचायत को विफल बनाने के लिए जयंत को मेरठ में ही पुलिस वालों ने रोक लिया।

 

उधर समिति के लोगों ने प्रशासन से बातचीत कर इस महापंचायत को 25 अगस्त तक टाल दिया है। पूर्व सपा विधायक रुचिवीरा और बीजेपी नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान की गिरफ्तारी अगर 24 अगस्त नहीं होती तो 25 को महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। 25 अगस्त तक डीएम बिजनौर ने पूरे जनपद में धारा 144 लागू कर दिया है।

उधर पुलिस अधीक्षक अतुल कुमार शर्मा ने इस महापंचायत को विफल बनाने के लिए और जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पीएसी की चार कंपनियां सहित अन्य जिलों से पुलिस बल की व्यवस्था की गयी थी। शहर और जनपद की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला मुरादाबाद से एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 2 पुलिस उपाधीक्षक, 4 थाना प्रभारी, 45 दरोगा, 5 महिला दरोगा, 50 हेड कांस्टेबल और 100 कांस्टेबलों को बिजनौर में तैनाती के लिए बुलाया गया था।

इन शहरों से भी बुलाए गए पुलिस

इसके अलावा रामपुर से एक सीओ पुलिस, 3 थाना प्रभारी, 35 दरोगा, 3 महिला दरोगा, 30 हेड काॅस्टेबल और 100 कांस्टेबल तथा जिला अमरोहा से एक उपाधीक्षक पुलिस 2 थाना प्रभारी, 20 दरोगा, 02 महिला दरोगा, 20 हेड कांस्टेबल और 50 कांस्टेबल की व्यवस्था की गयी थी। साथ ही उक्त पुलिस बल के अतिरिक्त 4 पीएसी की कम्पनियां भी जिले में शांति एंव कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 25 अगस्त तक जनपद में डेरा डाली रहेंगी।

क्या था मामला

हम आपकों बता दें कि मृतक किसान जसवंत सिंह को बिजनौर पुलिस ने पिछले कुछ दिनों पहले तीन दिन तक हिरासत में ले रखा था। दिल की गंभीर बिमारी से जूझ रहे जसवंत सिंह के परिजनों ने कई बार पुलिस से जसवंत की बिमारी का हवाला देते हुए उन्हें छोड़ने की फरियाद भी की थी, लेकिन आरोप है कि एक स्थानीय भाजपा विधायक के दवाब की वजह से पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा और उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है की जसवंत सिंह को पुलिस ने हिरासत में इतना टॉर्चर किया कि वो यह सब बर्दाश्त नहीं कर सका और उसकी मौत हो गई। ये किसान की हत्या का मामला मंत्री की गाड़ी में हमला करने के बाद शुरू हुआ था। 6 जुलाई को सपा नेता सकेंद्र पंचायत सदस्य पर राज्यमंत्री अतुल गर्ग व भाजपा के नूरपुर सीट से विधायक लोकेन्द्र चौहान की गाड़ी पर हमला करने आरोप लगा था। जिसमें मृतक जसवंत सिंह के बेटे नृपेंद्र राठी का नाम भी इस मामले में आया था और उसकी गिरफ्तारी के लिये दवाब बनाने के लिये जसवंत सिंह को पुलिस ने 3 दिन से अपनी कस्टडी में ले रखा था। परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने जसवंत को इतना टॉर्चर किया कि उनकी मौत हो गई।

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