कागजों में ही कर दिया 651 करोड़ रुपए के सोने का लेन-देन

bikaner news - 651 crore rupees gold transaction done on paper itself

By: Jaibhagwan Upadhyay

Updated: 11 Mar 2021, 05:25 PM IST

19.53 करोड़ रुपए के जीएसटी क्रेडिट टैक्स के घोटाले का पर्दाफाश
राज्यकर विभाग की कार्रवाई
बीकानेर.
राज्य जीएसटी की प्रतिकरापवंचन शाखा ने बीकानेर में 651 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा कर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है।

फर्जीवाड़े के इस खेल की जांच में सामने आया कि फर्जी बिलों के माध्यम से कुल बिल राशि 651 करोड़ रुपए के 3 प्रतिशत कर दर के आधार पर 19.53 करोड़ रुपए के जीएसटी क्रेडिट टैक्स का घोटाला किया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद जयपुर से राज्य जीएसटी की टीम के अधिकारियों ने बीकानेर पहुंचकर जानकारी जुटाई तो उनके पांवों तले जमीन खिसक गई।


कर्नाटक की फर्म पर नजर
राज्यकर विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (प्रतिकरापवंचन) शक्ति सिंह राठौड़ के अनुसार मुख्य आयुक्त अभिषेक भगोलिया के निर्देश पर राज्य जीएसटी की प्रतिकरापवंचन वृत प्रथम की टीम ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम देकर इस ६५१ करोड़ के फर्जी जीएसटी बिलों के घोटाले को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि राज्य जीएसटी प्रतिकरापवंचन-राजस्थान वृत प्रथम के संयुक्त आयुक्त नरेन्द्र सिंह शेखावत को इस संबंध में जानकारी मिलने पर सहायक आयुक्त गजानंद मीना एवं राज्य कर अधिकारी अरविन्द राव, मुकेश कुमावत एवं अंकित अग्रवाल की टीम का गठन किया गया। राज्य जीएसटी टीम ने व्यवसायी के घोषित स्थल सुजानदेसर, गंगाशहर तथा बीकानेर में जब पहुंची तो वहां इस संबंध में कोई फर्म संचालित होना नहीं पाया गया।

टीम ने वहां उपस्थित घोषित व्यवसाय स्थल के मालिक से पूछताछ की तो उसने जानकारी दी कि यहां पर इस नाम की कोई भी फर्म कार्यरत नहीं रही है। इतना ही नहीं जिस नाम की फर्म को अधिकारियों ने बताया कि उस फर्म को संबंधित मालिक ने पहचानने से भी इंकार कर दिया। जांच में सामने आया कि 'रेनिशा एन्टरप्राइजेजÓ नाम की फर्म से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म का पंजीयन करवाकर कर्नाटक स्थित फर्मों से सोने की खरीद तथा वापसी उसी माल को कर्नाटक स्थित उन्हीं फर्मों को बेचान दर्शाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित फर्म ने कागजी आदान-प्रदान कर बड़े स्तर पर काम किया जा रहा था। विभाग को इस फर्जीवाड़े की भनक लगने के बाद संबंधित फर्म का पंजीयन रद्द कर विधि अनुसार कठोर कार्रवाई की जा रही है।

Jaibhagwan Upadhyay Reporting
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