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पशुपालकों के काम की जानकारी: गर्मियों के दौरान ऐसे करें पशुओं का प्रबंधन

गर्मी के मौसम में पशुओं की देखभाल के बारे में डॉ. निष्ठा यादव का परामर्श

बीकानेर

Published: July 26, 2022 11:40:44 pm

गेस्ट राइटर: डॉ. निष्ठा यादव
पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर

- गर्मी की लहर क्या है ?
एक गर्मी की लहर को कम से कम लगातार 3 दिनों की अवधि के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। जब दैनिक अधिकतम तापमान वितरण के 90वें प्रतिशत से अधिक हो जाता है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार आने वाले समय में पृथ्वी का तापमान बढ़ेगा, अत्यधिक गर्मी की लहरों और मौसम की आवृत्ति, अवधि, तीव्रता तथा लंबाई बढ़ेगी। जिससे पूरे भारत में भी अत्यधिक तापमान (गर्मी की लहरें / लू) के दिन नियमित रूप से जारी रहने का अनुमान है।
पशुपालकों के काम की जानकारी: गर्मियों के दौरान ऐसे  करें पशुओं का प्रबंधन
पशुपालकों के काम की जानकारी: गर्मियों के दौरान ऐसे करें पशुओं का प्रबंधन
- क्या अत्यधिक गर्मी दुधारू पशुओं को प्रभावित करती है ?

हां, यह पशुधन प्रजातियों की आजीविका के सभी पहलुओं यथा प्रजनन से लेकर उत्पादन तथा साथ-साथ पशु कल्याण, व्यवहार प्रदर्शन, स्वास्थ्य और अस्तित्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पशुधन के स्वास्थ्य पर मौसम का प्रभाव जलवायु परिवर्तन के परिदृश्यों में, बढ़ती चिंता का विषय है। सामान्यत: पशु, कंपकंपी से गर्मी पैदा करके या हांफने से गर्मी कम करके, अपने शरीर के तापमान को अलग-अलग मौसम में अपेक्षाकृत स्थिर स्तर पर बनाए रखते हैं। यह विनिमय एक तापमान सीमा (थर्मोन्यूट्रल ज़ोन) में ही अच्छा संतुलित होता है, जो विभिन्न जानवरों के लिये अलग-अलग होती है।
डेयरी मवेशियों के लिए औसतन 50C – 200C तापमान के बीच होता है। जब तापमान विदेशी और क्रॉसब्रेड मवेशियों के लिए 240C – 260C, ज़ेबू मवेशियों के लिए 330C और भैंसों के लिए 360C से अधिक हो जाता है, तब गर्मी के तनाव के लक्षण दिखाई देते हैं। डेयरी पशुओं को लगातार कम से कम 3 दिनों तक गर्म मौसम (320C) के संपर्क में आने से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। शुष्क और अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अपर्याप्त और निम्न गुणवत्ता वाला चारा पशुओं के कम उत्पादन का एक प्रमुख कारक है। अत्यधिक गर्म आर्द्र या शुष्क मौसम में उच्च तापमान मवेशियों में थर्मोरेगुलेटरी परिवर्तनों को प्रेरित करता है। वसंत के अंत और गर्मियों में थर्मोरेग्यूलेशन के लिए ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और ऊर्जा सेवन में कमी पशुधन पोषण में कमी का कारण होती है।
- गर्मी के तनाव के प्रतिकूल प्रभाव क्या हैं ?

गर्मी के महीनों में पशुधन की मौतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि, गर्मी के तनाव का संकेतक है। अत्यधिक तापमान के दौरान, जानवर वाष्पीकरण के माध्यम अतिरिक्त गर्मी को शरीर से बाहर निकालने के लिए संघर्ष करते हैं। आर्द्रता अधिक या हवा न चलने पर स्थिति और भी विकट हो जाती है।

गर्मी के तनाव के स्पष्ट संकेत इस प्रकार परिलक्षित होते हैं : शरीर के तापमान (>102.6ºF), श्वसन दर (>80 श्वास/मिनट), नाड़ी की दर, परिधीय रक्त प्रवाह और पसीने में, पानी पीने में वृद्धि, हांफना, सुस्ती, फ़ीड सेवन में 10-15% कमी, दुग्ध उत्पादन में 10-20% की कमी, नर और मादा जानवरों में प्रजनन दर में कमी और मृत्यु दर में वृद्धि।
कुछ जानवर गर्मी के तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिनमें युवा, बीमार पशु, गर्भवती मादा, गहरे रंग के और भारी जानवर शामिल हैं। गर्मी की लहरें वृद्धि, प्रजनन, दूध उत्पादन और रोगों के संदर्भ में डेयरी पशुओं के उत्पादन पर प्रभाव डालती हैं।
गर्मी के तनाव में पशु उत्पादन को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य कारण हैं, जैसे (ए) फ़ीड की उपलब्धता (बी) चारागाह और चारा फसल उत्पादन और गुणवत्ता (सी) स्वास्थ्य, विकास, प्रजनन: रोग और उनका प्रसार। गर्मी की लहरों के दौरान पशु स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य कारक हैं, जैसे (1) गर्मी से संबंधित रोग और उनका प्रसार (2) चरम मौसम की घटनाएं, नए वातावरण में पशु उत्पादन प्रणाली का अनुकूलन (3) संक्रामक रोगों का उभरना (4) विशेष रूप से वेक्टर जनित रोग जो गंभीर रूप से पर्यावरण और जलवायु कारकों पर निर्भर हैं।
- गर्मी के तनाव के दौरान पशु के कल्याण की रक्षा के सक्रिय उपाय :

• हीट वेव के दौरान पशु कल्याण सुनिश्चित करने और डेयरी फार्म में आर्थिक नुकसान को सीमित करने के लिए आवास संशोधन, आहार प्रबंधन, आनुवंशिक चयन, बीमा पॉलिसियां जैसे सक्रिय उपाय सफल कार्यात्मक उपकरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
• मवेशी थर्मोन्यूट्रल स्थितियों में सहज होते हैं और अधिक तापमान तनाव उत्पन्न करता है, अत: स्वास्थ्य और उत्पादकता सुधार हेतु छाया और शीतलन सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।

गर्मी के मौसम के आने से पहले अपनाए जाने वाले उपाय : पशुधन को सीधी धूप से बचाने के लिए, पंखे और स्प्रिंकल सिस्टम द्वारा शीतलन प्रदान करना, उच्च गुणवत्ता युक्त भोजन (पर्याप्त प्रोटीन, वसा, खनिज और विटामिन) प्रदान करना, दिन के ठंडे समय में कई बार छोटे-छोटे राशन देना और राशन को खराब होने से बचाने के लिए फीडरों की उचित सफाई करना ।

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