साढे़ तीन सौ साल पहले भी अफगानिस्तान क्षेत्र था अशांत, उपद्रव से तब के बादशाह थे परेशान

- राजस्थान राज्य अभिलेखागार के दस्तावेजों से - काबुल, जलालाबाद व खैबर में गिलजयी उपद्रव व लूट खसोट किया करते थे

- औरंगजेब के फरमानों में उपद्रवियों पर अंकुश लगाने के आदेश

- उस समय काबुल के मनसबदार व जयपुर के राजा रामसिंह को दिए थे आदेश

By: Vimal

Updated: 10 Sep 2021, 09:10 PM IST

विमल छंगाणी - बीकानेर. आज भारत ही नहीं पूरी दुनिया आतंकवाद व उपद्रवी घटनाओं से परेशान है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे ने एक बार पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कई उपद्रवी गुट एक होकर देश के शीर्ष पदों पर बैठ गए हैं और हुकुमत चलाने की बात कह रहे हैं। पूरा अफगानिस्तान आज भय और अशांत क्षेत्र बना हुआ है। यह पहली बार नहीं हुआ है।

काबुल, जलालाबाद, खैबर सहित क्षेत्र के कई स्थानों पर साढ़े तीन सौ साल पहले भी उपद्रवी घटनाएं होने, माहौल के अशांत रहने और बादशाह की ओर से उपद्रवी प्रवृत्ति के लोगों को दण्डित किए जाने की जानकारी मिलती है। राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर में मुगल बादशाह औरंगजेब की ओर से राजा रामसिंह को लिखे गए कई फरमानों में तत्कालीन काबुल व आस-पास के क्षेत्रों में गिलजयी व अन्य उपद्रवी लोगों की ओर से की गई घटनाओं, दिए गए दण्ड और बादशााह के आदेशों की जानकारी मिलती है।

 

 

उपद्रव व लूट -खसोट
राज्य अभिलेखागार में संरक्षित कई फरमानों के अनुसार करीब साढ़े तीन सौ साल पहले भी काबुल व इसके आस-पास के क्षेत्रों में माहौल अशांत था। उपद्रवी प्रवृत्ति के लोग लूट-खसोट की घटनाएं करते रहते थे। फरमानों के अनुसार गिलजयी अक्सर लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देते थे। ऐसी घटनाओं से मुगल बादशाह चिंतित भी रहते थे। अफगानिस्तान के इन कबीलों को नियंत्रित करने के लिए बादशाह ने अपना पूरा बल लगा दिया था।

 

 

औरंगजेब के फरमान राजा रामसिंह के नाम

राजस्थान राज्य अभिलेखागार के निदेशक डॉ. महेन्द्र खडग़ावत के अनुसार अभिलेखागार में मुगल बादशाह औरंगजेब की ओर से राजा रामसिंह के नाम लिखे गए कई फरमान है। जिनमें अफगानिस्तान के काबुल, जलालाबाद और खैबर आदि स्थानों पर अनियंत्रित स्थितियों, गिलजियों की ओर से की जाने वाली लूट पाट और उपद्रव से संबंधित है। जिनमें इन उपद्रवियों को कठोर दण्ड देने और मौत के घाट के उतारे जाने से संबंधित आदेश भी है। यह फरमान अभिलेखागार में मूलरूप में संरक्षित है।

 

 

फरमान- एक
औरंगजेब ने 6 जून 1677 ईस्वी को जयपुर के राजा रामसिंह को फरमान लिखते हुए आदेश दिए कि आपने अनिष्ट गिलजियों के प्रति अपनी योजना एवं उन पर शक्ति एवं दण्डित किए जाने एवं काबुल तथा जलालाबाद मार्ग खोलने के बारे में किए गए उपाय से तुरन्त शाही दरबार को सूचित करने के लिए कहा।

 

 

फरमान - दो

30 सितम्बर 1678 ईस्वी को औरंगजेब ने रामसिंह को एक और फरमान लिखा कि गिलजयी उपद्रवी नेता तातार खां आदि विद्रोही गतिविधियों के कारण कैद करके मार दिया गया है। इस कारण उस जाति के लोगों ने मार्गो के थानेदारों एवं यात्रियों को लूट खसोट करना प्रारम्भ कर दिया है। एक मजबूत सैनिक टुकड़ी के साथ उपद्रवियों को दण्डित करने व यात्रियों तथा मार्ग को सुरक्षित करने का आदेश दिया गया।

 

फरमान -तीन
29 मई 1679 ईस्वी को औरंगजेब ने रामसिंह को पुन: फरमान लिखा कि वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद एक बड़ी सेना शहजादे मुहम्मद अकबर की देखरेख में आपकी सहायता के लिए काबुल में नियुक्त होगी ताकि गिलजियों व अन्य उपद्रवियों को जड़ो से नष्ट कर सके। साथ ही उन्होंने काबुल व आस पास के थानों को मजबूत करने के आदेश दिए ताकि गिलजयी पूरी तरह से नष्ट हो जाए।

 

 

फरमान -चार

21 जुलाई 1679 ईस्वी को औरंगजेब ने काबुल के मनसबदार रामसिंह को फरमान लिखते हुए कहा कि गिलजयी व अन्य उपद्रवी जो हमारे गुजरने के मार्ग में एकत्रित हो गए थे व संकरे दर्रे को बंद करके आवागमन में विघ्न डाल रहे थे उनको आपने कठोर दण्ड दिया और बहुत लोगों को खत्म कर दिया। गिलजयी व अन्य उपद्रवी जो सीमाओं पर एकत्रित है उनको भी कठोर दण्ड देते हुए मौत के घाट उतार दिए जाए।

 

 

पुस्तक में फरमानों की जानकारी
राजस्थान राज्य अभिलेखागार की पुस्तक ‘फारसी फरमानों के प्रकाश में मुगलकालीन भारत एवं राजपूत शासक’ भाग दो में औरंगजेब की ओर से राजा रामसिंह को लिखे गए फरमानों की जानकारी दी गई है। इस पुस्तक का संपादन अभिलेखागार निदेशक डॉ. महेन्द्र खडग़ावत ने किया है। अभिलेखागार की ओर से चार वॉल्यूम प्रकाशित किए हुए हैं, जिनमें इस प्रकार की कई नवीन जानकारिया फरमानों के माध्यम से मिलती है।

 

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