बहनों ने की भाईयों के दीर्घायु होने की कामना

दीपोत्सव : भाई दूज पर्व मनाया

By: dinesh swami

Published: 17 Nov 2020, 08:16 AM IST

बीकानेर. पांच दिवसीय दीपोत्सव के अंतिम पर्व के रूप में सोमवार को भाई दूज पर्व मनाया गया। बहनों ने अपने भाइयों के ललाट पर कुमकुम-अक्षत से तिलक कर मुंह मीठा करवाया और उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु होने की कामना की। पारंपरिक वस्त्र-आभूषणों से सज धज कर बहनों ने शुभ मुहूर्त में कुमकुम-अक्षत तिलक कर भाईयों के लिए मंगल कामनाएं की। भाइयों ने भी अपनी बहनों को नकद राशि, उपहार, साडिय़ा आदि प्रदान की। पूरे दिन शहर में विशेष रौनक रही। घर-घर में हंसी खुशी का माहौल रहा। घरों में विविध व्यंजन बनाए गए और भाईदूज की खुशियां मनाई गई। भाईदूज पर यमुना नदी में स्नान के विशेष महत्व के चलते कई परिवार मथुरा गए और भाई बहनों ने परंपरानुसार यमुना नदी में स्नान किया। भाईयों ने बहनों को वस्त्र, नकदी और उपहार प्रदान किए।

घर-घर हुआ लक्ष्मी का पूजन

धन की देवी मां लक्ष्मी का महापर्व दीपावली शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी का पूजन कर आरती की गई। दीपावली पर विभिन्न शुभ मुहूर्त में मध्य रात्रि बाद तक मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। इस दौरान विभिन्न पूजन सामग्रियों से मां लक्ष्मी का पूजन कर विविध व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। दीपावली पर घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों को रंगीन रोशनियों और दीपमालिका से सजाए गए। पूरा शहर रंगीन रोशनियों, दुधिया प्रकाश और हजारों दीपकों की झिलमिलाहट से रोशन रहा।

गोवर्धन पूजा कर की सुख समृद्धि की कामना

पंच दिवसीय दीपोत्सव महापर्व के चतुर्थ पर्व के रूप में रविवार को घर परिवार की समृद्धि की कामना को लेकर घरों और मंदिरों में गोवर्धन पर्वत का पूजन विविध पूजन सामग्रियों के साथ किया गया। घर परिवार की महिलाओं ने घरों के मुख्य द्वार के बाहर राती मिट्टी से बनाए गए गोवर्धन पर गोबर, कुमकुम, अक्षत, रोली, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, प्रसाद, खीर, बताशा आदि पूजन सामग्रियों से गोवर्धन पूजन किया। कई लोगों ने गाय और बछड़े भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय होने के कारण इनका भी पूजन किया और गुड, घास खिलाए।

रामा श्यामा कर लिया आशीर्वाद

दीपोत्सव महापर्व में रविवार को रामा-श्यामा पर परा का निर्वन हुआ। बच्चों से बड़ों तक ने बड़े बुजुर्गों के पांव छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से शुरू हुआ रामा-श्यामा का सिलसिला रात तक चलता रहा। महिलाओं ने भी अपने से बड़ी घर, परिवार और मोहल्ले की महिलाओं के पांव धोक लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

हिंडोळ परंपरा का हुआ निर्वहन

दीपावली पर शहर में हिंडोळ परंपरा का निर्वहन हुआ। घर परिवार के पुरुष सदस्य जलते हुए हिंडोळ घरों के नजदीकी मंदिरों तक लेकर गए और देव प्रतिमाओं के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पित्तर भू लोक पर आते हैं। यमलोक की ओर प्रस्थान के दौरान घर परिवार के सदस्य उल्का अर्थात हिंडोळ प्रज्जवलित कर उनको मार्ग दिखलाते हैं।

dinesh swami Reporting
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