बीकानेर स्थापना दिवस : अनूठा है मां नागणेचीजी का यह प्राचीन मंदिर, जहां आरती के बाद लग जाते है ताले

बीकानेर स्थापना दिवस : अनूठा है मां नागणेचीजी का यह प्राचीन मंदिर, जहां आरती के बाद लग जाते है ताले

Anushree Joshi | Publish: Apr, 18 2018 10:41:31 AM (IST) Bikaner, Rajasthan, India

लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर के ठीक सामने मां चामुण्डा और नागणेचीजी का प्राचीन मंदिर है।

जोधपुर के पूर्व महाराजा राव जोधा के पुत्र राव बीका ने संवत 1545 में बीकानेर नगर की स्थापना की। वर्तमान में जहां नगर सेठ लक्ष्मीनाथ का मंदिर है, उस क्षेत्र में राव बीका ने बीकानेर के पहले गढ़ की नींव रखी।

 

लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर के ठीक सामने मां चामुण्डा और नागणेचीजी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में संगमरमर की बंगली में मां नागणेचीजी की चांदी से निर्मित मूर्ति विराजमान है। यह स्थान जूनाकोट के नाम से भी प्रसिद्ध है।

 

इस मंदिर की विशेषता है कि यहां रोजाना आरती और पूजन के बाद निज मंदिर के मुख्य गेट को बंद कर दिया जाता है। जाली वाले इस गेट में श्रद्धालु गेट के बाहर से ही इस मूर्ति का दर्शन करते है। मंदिर के अंदर श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। मंदिर पुजारी भी आरती-पूजन के बाद निज मंदिर से बाहर आ जाते है।

 

पुजारी ने बताया कि रियासतकाल से यही व्यवस्था चली आ रही है। उस दौर में संभवतया मूर्ति की सुरक्षा को लेकर यह व्यवस्था की गई थी, जो आज भी चल रही है। पुजारी के अनुसार प्रतिवर्ष नवरात्रा के अवसर पर मंदिर परिसर में हवन, पूजन, पाठ आदि धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।

 

श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा
मंदिर पुजारी श्याम सुन्दर देरासरी ने बताया कि रियासतकाल से मां नागणेचीजी का यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। रोजाना यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन-पूजन को आते है। मंदिर के गेट पर ताला ही लगा रहता है। निज मंदिर में हर किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं है। पुजारी भी आरती और पूजन के बाद मंदिर से बाहर रहता है।

 

बच्चों को पतंग वितरित
नगर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर सोमवार को ब्रह्म बगीचे में पुष्करणा महिला मंडल द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के स्लोगन के साथ बच्चों को पतंग वितरण किया गया। महिला मंडल की अध्यक्ष अर्चना थानवी ने सभी बच्चों को चाइनीज मांझा काम में ना लेने की बात कही।

 

बच्चों को चाइनीज मांझे के दुष्परिणामों के बारे में बताया। कार्यक्रम में विजयलक्ष्मी व्यास, सेनुका हर्ष, सुमन ओझा, वंदना पुरोहित, शारदा, कृष्णा व्यास, पूजा जोशी सहित पुष्करणा महिला समाज से जुड़ी विभिन्न महिलाएं उपस्थित थीं।

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