थम गई हौसलों की उड़ान, नहीं रहे पर्वतारोही मगन बिस्सा

थम गई हौसलों की उड़ान, नहीं रहे पर्वतारोही मगन बिस्सा

आज दोपहर बीकानेर पहुंचेगा शव

बीकानेर. राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिनाम पर्वतारोही मगन बिस्सा का शुक्रवार को महाराष्ट्र के ठाणे क्षेत्र में एक हादसे के दौरान निधन हो गया। मुम्बई के एमजीएम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी पार्थिव देह शनिवार सुबह मुम्बई से हवाई मार्ग से जयपुर लाई जाएगी। वहां से सड़क मार्ग से शनिवार दोपहर को बीकानेर लाई जाएगी।
एडवेंचर में बीकानेर का नाम रोशन करने वाले बिस्सा ठाणे के समीप करजत इलाके में एक पहाड़ी पर शुक्रवार को कृत्रिम बाधाएं लगा रहे थे, इस दौरान रस्सा स्थापित करते समय सुबह करीब १० बजे अचानक रस्सा टूट गया और वे करीब ४० से ५० फीट की ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। उनको गंंभीर हालत में करजत से मुम्बई ले जाया गया, जहां पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके साथ उनकी पत्नी पर्वातारोही सुषमा बिस्सा, पुत्र ओजस्वी भी थे।


पर्वतारोहण से बढ़कर कुछ भी नहीं
पर्वातारोहण से बढ़कर मगन बिस्सा के लिए जीवन में कुछ भी नहीं था। तभी तो कई बार अपना जीवन जोखिम में डाल चुके थे। इसके बाद भी हौंसले बुलंद थे और जीवन में कभी हार नहीं मानी। एडवेंचर के साथी आरके शर्मा के अनुसार वर्ष १९८५ में नेपाल में जब एवरेस्ट पर एडवेंचर कर रहे थे, तब करीब ७०० फीट की ऊंचाई से नीचे गिर गए थे। उस दौरान उन्हें काफी चोटें आई, पैर में फ्रैक्चर हो गया, लेकिन पूरे जोश के साथ फिर खड़े हो गए।

यही नहीं वर्ष २००९ में भी काठमांडू में फिर से एवरेस्ट कैम्प कर रहे थे, तब उनकी आंत में इंफेक्शन हो गया। उसके बाद लंबे समय तक उनका इलाज चला। तीन-चार ऑपरेशन हुए, आंतें काटनी पड़ी, उसके बाद चिकित्सकों ने साफ कह दिया था कि अब बस दुआएं ही बचा सकती हैं। यह सच भी हुआ, एडवेंचर के जीवन में कई लोगों की जान बचा चुके मगन बिस्सा को उस समय दुआओं ने बचा लिया।

मिल चुका है सेना पदक
मगन बिस्सा प्रादेशिक सेना में रहे। उस दौरान अदम्य साहस के दम पर १९८६ में सेना पदक मिला। इंडियन माउंटेनरिंग फाउण्डेशन नई दिल्ली ने स्वर्ण पदक दिया। महाराणा प्रताप पुरस्कार से सम्मानित बिस्सा एक लाख रुपए का लाइफ टाइम एेचीवमेंट अवार्ड भी अपने नाम कर चुके थे। बीकानेर में प्रदेश की पहली कृत्रिम दीवार एडवेंचर के लिए डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में उनके सान्निध्य में बनी है। वे नेशनल एडवेंचर फाउण्डेशन के राजस्थान व गुजरात के निदेशक थे। भारतीय पर्वतारोहण संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य भी रहे।


१९७८ में चुना था एडवेंचर को
छोटे भाई शिवरतन के अनुसार उनके भाई ने १९७८ में कॉलेज के समय ही एडवेंचर को चुन लिया। इसके प्रति लगातार रुझान बढ़ता गया। जुनून एेसा था कि कभी भी एडवेंचर से अलग नहीं हुए। यही नहीं, अपनी पत्नी ओर दोनों बेटों को भी इसमें शामिल कर लिया। देश के छोटे-बड़े शहरों मंे जाकर युवाओं को इसके लिए प्रेरित करना ही जैसे उनका लक्ष्य था। आठ भाई हैं। इनमें मगन बिस्सा पांचवें नम्बर पर थे। घर-परिवार के साथ आस-पड़ोस के भी चेहते थे। हर किसी से गर्मजोशी से मिलना उनके स्वभाव में था।

Ramesh Bissa Reporting
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