अधिकारों की लड़ाई की भेंट चढ़ रहे निगम के काम

bikaner nagar nigam - शहर की सरकार के सौ दिन : निगम में न जनप्रतिनिधियों की हो रही सुनवाई, ना आमजन को मिल रही राहत

By: Vimal

Updated: 19 Mar 2020, 11:59 AM IST

बीकानेर. नगर निगम में महापौर और आयुक्त के बीच आपसी विवाद से विकास कार्य रुक से गए हैं। आमजन के छोटे-छोटे कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। न तो सफाई व्यवस्था पटरी पर आ रही है और ना ही कार्यालयी कार्य हो रहे हैं। हालत यह है कि महापौर, उप महापौर और पार्षदों के बताए काम भी नहीं हो पा रहे हैं। महापौर के आदेशों को आयुक्त और आयुक्त के आदेशों को महापौर नहीं मान रही हैं। महापौर-आयुक्त के विवाद के बीच वार्ड पार्षदों की ओर से वार्डों में करवाए जाने वाले आवश्यक विकास कार्य, सफाई व्यवस्था, कचरा निस्तारण सहित अन्य कार्य नहीं हो पा रहे हैं।

नगर निगम में महापौर और आयुक्त के बीच अनबन का यह पहला मामला नहीं है। पिछले बोर्ड में भी महापौर और निगम आयुक्त-उपायुक्तों के बीच मनमुटाव की स्थिति रही। महापौर और आयुक्त के बीच विवाद से आमजन हित के काम और निगम की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

पार्षदों का टूट रहा सब्र
नगर निगम के वर्तमान बोर्ड के गठन को साढे़ तीन माह होने के बाद भी वार्डों में विकास कार्य, उचित सफाई व प्रकाश व्यवस्थाएं सुचारू नहीं होने से अब पार्षदों का सब्र टूटने लगा है। मांग के बाद भी विकास कार्य शुरू नहीं होने पर मंगलवार को एक पार्षद ने एक्सईएन कक्ष में कागज फाडकर विरोध दर्ज करवाया। वहीं पक्ष-विपक्ष सहित निर्दलीय पार्षद आए दिन रोष जता रहे हैं। बुधवार को निर्दलीय पार्षद ने कलक्टर से आमजन के काम अटकने की शिकायत की।

उप महापौर की भी सुनवाई नहीं

निगम में उप महापौर के बताए काम को भी निगम अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उप महापौर राजेन्द्र पंवार ने जनवरी में शहर के कुछ वार्डों में चल रहे सीवरेज निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने, समय पर काम पूरा नहीं होने पर आमजन को हो रही परेशानियों को लेकर आयुक्त को पत्र सौंपा था। दो माह बाद भी काम नहीं होने पर पंवार ने फिर १६ मार्च को दूसरा पत्र दिया, लेकिन निगम अधिकारी उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

महापौर के पत्रों को नहीं ले रहे गंभीरता से
शहर का प्रथम नागरिक महापौर होता है। नगर निगम में वर्तमान में हालत यह है कि निगम अधिकारी महापौर के पत्रों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि महापौर बोर्ड बैठक कार्यवाही विवरण जारी करने, विकास कार्य, सीवरेज व्यवस्था, ऑटो टिप्पर एवरेज, मेयर हाउस व्यवस्था, गोशाला, निगम परिसर स्थित बैंक भवन का किराया, बीस नए ट्रैक्टर बढ़ाने, करमीसर व शिवबाड़ी ग्राम पंचायत भवनों की नीलामी आदि से संबंधित पत्र आयुक्त को लिख चुकी हैं। फरवरी से अब तक महापौर ने आयुक्त को १२ पत्र लिखे हैं। महापौर ने बताया कि आयुक्त स्तर पर  10  पत्र लंबित पडे़ है। कोई जवाब अथवा कार्यवाही सामने नहीं आई है।

 उद्देश्य सेवा तो मनमुटाव अनुचित

नगर निगम सार्वजनिक गतिविधियों का केन्द्र है। आमजन से जुडे़ अधिकतर कार्य निगम के माध्यम से ही होने है। निगम में आमजन से जुडे़ कार्यों का अटकना और महापौर-आयुक्त में मनमुटाव ठीक नहीं है। जब महापौर, पार्षद, आयुक्त सहित निगम अधिकारियों-कर्मचारियों का उद्देश्य सेवा है तो आपसी मनमुटाव उचित नहीं माना जा सकता है। महापौर-आयुक्त को जहां दिक्कत आ रही है, उनको दूर करना चाहिए।
अखिलेश प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, शहर भाजपा

जनता के हो काम, दूर करे मनमुटाव

महापौर और आयुक्त में आपसी मनमुटाव निगम और शहर हित में नहीं माना जा सकता। दोनों आपसी मनमुटाव को जल्द दूर करें और आमजन के कार्य जल्द हों, एेसी व्यवस्था बनाएं। नियमों से ऊपर कोई नहीं हो सकता। जो नियमानुसार हो उन्हीं कार्यों को किया जाए। शहर के विकास की जिम्मेदारी महापौर की है। महापौर शहर के विकास और आमजन के कार्यों को अधिक तव्वजो दें।
यशपाल गहलोत, जिलाध्यक्ष, शहर कांग्रेस कमेटी

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