बीकानेर

पहले मकानों पर लिखते थे नम्बर व वार्ड संख्या, फिर बनती थी मतदाता सूची

bikaner news- स्थानीय निकाय चुनाव से पहले शहर में हर मकान तक निकाय कर्मचारी पहुंचते थे और मकानों पर नम्बर व वार्ड संख्या लिखने की व्यवस्था थी।

बीकानेरSep 27, 2019 / 12:06 pm

Vimal

पहले मकानों पर लिखते थे नम्बर व वार्ड संख्या, फिर बनती थी मतदाता सूची

बीकानेर. स्थानीय निकाय चुनाव से पहले शहर में हर मकान तक निकाय कर्मचारी पहुंचते थे और मकानों पर नम्बर व वार्ड संख्या लिखने की व्यवस्था थी। इसके बाद वार्डों की मतदाता सूची तैयार होती थी। रजिस्टर में मतदाताओं का नाम लिखा जाता था।तीन दशक पहले सेवानिवृत्त हो चुके नगर परिषद कर्मचारी नरसिंह दास आचार्य ने करीब ६६ वर्ष पहले की यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस दौर में वार्डों और मतदाताओं की संख्या बहुत कम थी। मतदाता सूची पालिका कर्मचारी तैयार करते थे। इसके लिए कर्मचारी घर-घर पहुंचकर यह काम करते थे। लोगों में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने को लेकर उत्सुकता रहती थी।
समयबद्ध होता था काम
निकाय चुनावों में वर्ष १९५४ से सरकारी कार्य से जुडे़ रहे नरसिंह दास आचार्य ने बताया कि उस
दौर में मकानों पर नम्बर व वार्ड संख्या लिखने, घर-घर जाकर मतदाता सूची व रजिस्टर तैयार करने, वार्ड सीमांकन का नक्शा तैयार करने आदि से जुडे़ कार्य समयबद्ध होते थे। प्रशासक के नेतृत्व में सभी अधिकारी व कर्मचारी इस कार्य में जुटे रहते थे।
रजिस्टर से लेते जानकारी
वार्डों में सभी मतदाताओं का रेकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाता था। आचार्य के अनुसार उस दौर में निकाय चुनाव के दौरान मतदाता सूची के लिए रजिस्टर से नकल की जाती थी। उम्मीदवार व राजनीति में सक्रिय लोग इसी रजिस्टर से मतदाताओं की जानकारी लेते थे। मतदाता सूची को हाथ से बनाया जाता था।
गलती की थी कम गुंजाइश
मतदाता सूची तैयार करने के लिए कर्मचारी हर घर तक पहुंचते थे। मकान नम्बर के अनुसार मतदाता सूची तैयार होती थी। इससे किसी मकान अथवा गली-मोहल्ले के मतदाता सूची में शामिल होने से छूटने की गुंजाइश नहीं के बराबर रहती थी। आचार्य के अनुसार मतदाता सूची बनाने के लिए मकानों के बाईं से दाईं दिशा में सूची बनाई जाती थी। मकान के ऊपर लिखी गई मकान व वार्ड संख्या के आधार पर ही मतदाता सूची तैयार की जाती थी।
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