छह दशक पहले भी बच्चों को स्कूलों में पिलाया जाता था दूध

छह दशक पहले भी बच्चों को स्कूलों में पिलाया जाता था दूध
छह दशक पहले भी बच्चों को स्कूलों में पिलाया जाता था दूध

Vimal Changani | Updated: 11 Oct 2019, 11:02:23 AM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

bikaner nagar nigam- बच्चे घर से लेकर आते थे गिलास और चीनी-मिश्री

 

बीकानेर. अन्नपूर्णा दूध योजना की तरह साठ साल पहले भी नगर पालिका के स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए दूध की योजना थी। स्कूलों में हर रोज विद्यार्थियों को दूध पिलाया जाता था। इसके लिए विद्यार्थी अपने घरों से गिलास और चीनी-मिश्री लेकर जाते थे। स्कूलों में पाउडर दूध को गर्म किया जाता और बच्चों को पिलाया जाता था। यह योजना कई साल तक चली।

नगर पालिका के 13 नम्बर स्कूल के विद्यार्थी रहे नटवरलाल व्यास ने बताया कि उस समय शिक्षक दूध को गर्म करते और विद्यार्थियों को पिलाते थे। पैकेट में आने वाले दूध पाउडर को विलायती दूध भी कहते थे। स्कूलों में लोहे की कढ़ाही में दूध गर्म किया जाता था। पालिका अध्यक्ष व जनप्रतिनिधि दूध पिलाने की योजना का निरीक्षण करने भी जाते थे।

स्कूल में गर्म करते थे दूध
नगर पालिका के स्कूल के विद्यार्थी रहे चोरू लाल चौधरी ने बताया कि करीब साठ साल पहले स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए दूध की व्यवस्था थी। स्कूल प्रांगण में दूध गर्म किया जाता था। विद्यार्थी दूध पीने के लिए घर से गिलास और चीनी-मिश्री लेकर आते थे। दूध का स्वाद और गुणवत्ता अच्छी थी। विद्यार्थी उस दूध का हर रोज बेसब्री से इंतजार करते थे। दूध को पीने के साथ दूध पाउडर को भी चखते रहते थे।

पंचायत समिति की गाड़ी लाती थी पैकेट
बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए साठ के दशक में दूध योजना अधिक प्रभावी रही। उस दौर में पालिका की अनिवार्य शिक्षा के स्कूल थे। वर्ष १९६४-६५ में बादनू प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक रहे गोपालराम चौधरी बताते हैं कि उस दौर में विद्यार्थियों को दूध पिलाने की योजना थी। पैकेट में पाउडर दूध आता था। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत समिति से गाड़ी आती थी, जिससे स्कूलों में दूध पाउडर के पैकेट वितरित किए जाते थे। दूध का वजन पैकेट पर पाउण्ड में लिखा होता था। सप्ताह में छह दिन दूध की व्यवस्था होती थी।

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