वो जीना नहीं चाहता... लेकिन भगवान उसे मरने नहीं दे रहा

dinesh swami

Publish: Apr, 17 2019 01:16:09 PM (IST)

Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

जयप्रकाश गहलोत

बीकानेर. वो जीना नहीं चाहता...। एचआइवी का दंश झेल रहा यह ४० वर्षीय व्यक्ति जिंदगी से तंग आ गया है। वह ट्रेन के आगे कूद गया, दोनों पैर कट गए, लेकिन जान बच गई। पैर कटने के बाद हाथों की नसें काटकर जान देने की कोशिश की। ईश्वर की मर्जी। फिर बच गया। अपना जीवन खत्म करने पर आमदा यह व्यक्ति पिछले पांच दिन से पीबीएम अस्पताल में भर्ती है। कुछ भी नहीं बोलता, ना अपने बारे में बताता है कि कौन है और कहां से आया है। अस्पताल में उपचार चल रहा है।
४० वर्षीय इस अज्ञात दुबले-पतले व्यक्ति ने एक सप्ताह पहले हनुमानगढ़ में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की कोशिश की। हादसे में घुटनों के नीचे से उसके दोनों पैर कट गए। कुछ लोगों ने उसे पीबीएम के ट्रोमा सेंटर में भर्ती करा दिया। वह कौन है, कहां से आया है, क्यों मरना चाहता है, यह कोई नहीं जानता। हालांकि उसने एचआइवी पॉजिटिव होने के चलते जान देने की कोशिश करना बताया। चिकित्सकों को यकीन नहीं हुआ। उन्होंने जांच कराई तो एचआइवी पॉजीटिव पाया गया। पीबीएम अस्पताल में भर्ती के दौरान तीन दिन बाद उसे होश आया। उस पैर कटे होने का पता चला तो एक बार फिर जान देने के लिए हाथों की नसें काटकर आत्महत्या की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ।

 

काउंसलिंग करना जरूरी
एचआइवी की जांच कराने से पहले और रिपोर्ट आने के बाद काउंसलिंग करना जरूरी होता है। काउंसलिंग के दौरान उसे बताया जाता है कि इस बीमारी का उपचार लेने पर वह सामान्य जीवन जी लेगा। यह जांच एचआइवी जांच सेंटर पर की जाती है। ज्यादातर निजी लैब से जांच कराने पर भी संचालक मरीज को जांच के संबंध में कुछ जानकारी नहीं देते हैं।

 

डेढ़ साल से पीडि़त
पीबीएम अस्पताल के चिकित्सक के मुताबिक यह व्यक्ति करीब डेढ़ साल से एचआइवी से पीडि़त है। जोधपुर संभाग के किसी एचआइवी सेंटर से उपचार चल रहा है। उसने स्वयं ही चिकित्सकों को इस बीमारी से तंग होकर जान देने की कोशिश करने की बात बताई। चिकित्सकों के मुताबिक वह मानसिक रोग से भी पीडि़त है। यह कई बार जान देने की कोशिश कर चुका है।

 

इनका कहना है...
पांच दिन पहले ट्रेन से दोनों पैर कटने के बाद एक व्यक्ति ट्रोमा सेंटर में भर्ती हुआ। जिसका इलाज चल रहा है। वह एचआइवी पीडि़त है। उसकी देखरेख के लिए अपना-घर का एक कर्मचारी नियुक्त है। अस्पताल स्टाफ व कर्मचारी उसके इलाज में पूरा ध्यान दे रहे हैं।
डॉ. बीएल खजोटिया, विभागाध्यक्ष अस्थि रोग विभाग

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