करोड़ों की वैक्सीन अमानक होने से बेकार

पशुओं का खुरपका मुंहपका रोग के लिए लगने थे टीके,
केन्द्र सरकार ने भेजी थी वैक्सीन, संभाग में बीस लाख से ऊपर पशु रह गए वंचित

By: dinesh swami

Published: 05 Feb 2021, 07:43 PM IST

-जितेन्द्र गोस्वामी
बीकानेर. पूरे देश सहित प्रदेश के जिलों में पशुओं में खुरपका-मुंहपका टीकाकरण काम रुका हुआ है। बीच अभियान में वैक्सीन के अमानक होने की केन्द्र की ओर से जानकारी मिलने पर इसे रोक लिया गया था। इस कारण
प्रदेश के हर जिले में लाखों पशु वैक्सीन से वंचित हो गए तो बड़ी मात्रा में करोड़ों रुपए की कीमत की वैक्सीन बेकार हो गई। अब यह कब तक शुरू होगा इसका अभी तक पता नहीं है।

अक्टूबर में शुरू हुआ था अभियान
यह अभियान राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत पशुओं में एफएमडी टीकाकरण अभियान 12 अक्टूबर से शुरू किया गया था। यह 25 नवंबर तक चलना था। प्रदेश के सभी जिलों में वैक्सीन लगनी थी। जिले में 10 लाख गोवंश व 1 लाख 83 हजार भैंस वंश में टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था। इस अभियान में विभागीय कर्मियों द्वारा पशुपालकों के घर-घर जाकर टीकाकरण करना था। अभियान समाप्त होने से दो दिन पूर्व २३ नवंबर २०२० को केन्द्र सरकार के मत्स्य पालन, एवं डेयरी मंत्रालय, पशु पालन एवं डेयरी विभाग के संयुक्त सचिव उपमन्यु बसु की ओर से सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजकर इस वैक्सीन के अमानक होने की जानकारी भेजकर अभियान को रोकने को कहा था। तब से देश व प्रदेश में सभी जगह टीकाकरण बंद कर दिया गया था। इससे पूरे देश में करोड़ों की वैक्सीन पशुपालन विभाग के गोदाम में वैसे ही पड़ी रह गई। इसका कुछ हिस्सा ही लग पाया।
संभाग में आधे से ज्यादा पशु वंचित
बीकानेर जिले में लगभग साढ़े ग्यारह लाख गाय-भैसों के टीके लगने थे। यह आदेश आने से पूर्व लगभग १.५० लाख का टीकाकरण हो चुका था। १० लाख करीब वैक्सीन को अब गोदाम में रखवा दिया गया है। वहीं श्रीगंगानगर जिले में ८ लाख से ऊपर पशुओं को टीके लगने थे। इसके मुकाबले २ लाख का ही वैक्सीनेशन हो पाया। वहीं हनुमानगढ़ में ८ लाख ८६ हजार पशुओं के मुकाबले ३लाख १२ हजार पशुओं को टीके लगाए जा सके। चूरू जिले में लगभग ५.५० लाख के आसपास पशुओं में से १.५० लाख करीब के टीके लग पाए। बीकानेर संभाग में लगभग २२ लाख के करीब पशुओं का टीकाकरण नहीं हो पाया। वहीं प्रदेश के अन्य संभागों के साथ देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में कितनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन बेकार हो गई ।
किसकी लापरवाही ?
ये टीके हैदराबाद की एक लैब से केन्द्र द्वारा सीधे देश के सभी राज्यों को भेजे गए थे।
इतनी बड़ी तादाद में वैक्सीन के अमानक होने की देर से जानकारी मिलना संबंधित लैब की लापरवाही या क्षमताओं पर सवाल खड़े करता है। प्रश्र यह उठता है कि इसकी गुणवत्ता की पहले ठीक प्रकार से जांच क्यों नहीं की गई। बाद में कैसे जांच कराई जिससे इसके अमानक होने का पता चला। कौनसे बैच की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई। यह किसकी लापरवाही से हुआ। इसकी जि मेदारी किस पर तय की गई। इससे सरकार को बड़ी धनराशि का नुकसान हुआ है। पशुओं को भी कोई फायदा नहीं हुआ।

इनका कहना
विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ.ए.आर.भाटी ने बताया कि वैक्सीन सीधे केन्द्र सरकार की ओर से मिली थी। टीकाकरण के साथ एक-दो कार्य और साथ चल रहे थे। इनमें पशुओं की टैगिंग कार्य भी था। इससे पशुओं के कम टीके लगाए जा सके।
संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉ.ओम प्रकाश किलानिया ने बताया कि जैसे ही वैक्सीनेशन के काम रोकने के आदेश आए। उसकी तुरंत पालना की गई। अब बची वैक्सीन ऐसे ही रखी है। दुधारु पशुओं को सर्दियां शुरू होने से पहले ये टीके लगाए जाते हैं। क्योंकि सर्दियों में पशुओं के यह बीमारी होती है।

dinesh swami Reporting
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