रोजगार का साधन बनी सांगरी व कैर

रोजगार का साधन बनी सांगरी व कैर

 

By: Atul Acharya

Published: 05 May 2021, 09:22 PM IST

60 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे

महाजन. ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों संागरी रोजगार का साधन बनी है। क्षेत्र की रोही में खेजड़ी के पेड़ बहुतायत में है। इस सीजन में खेजड़ी पर सांगरी लगती है। फिलहाल सूने बारानी खेतों में गांवों के युवा व बुजुर्ग दिन उगते ही सांगरी तोडऩे निकल पड़ते है। कस्बे के चन्द्रभान वर्मा ने बताया कि कोरोना के चलते दुकान बन्द है। ऐसे में सुबह होते ही रोही में चले जाते है और दो-तीन घंटों में ५-६ किलो ताजा सांगरी तोड़कर ले आते है। कई बेरोजगार युवा व विद्यार्थी भी इन दिनों में सांगरी तोड़कर बेचने के कार्य में लगे है और ५० से ७० रुपये प्रति किलो तक सांगरी बेच दी जाती है। समीपवर्ती गुसाईणां, रामबाग, मोखमपुरा, बडेरण आदि गांवों में युवा सांगरी के साथ-साथ केरिये भी तोड़ कर लाते है। सांगरी व केरियों का अचार भी जहां लाजवाब बनता है वहीं सब्जी भी पौष्टिकता से भरपूर मानी जाती है।

Atul Acharya Reporting
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