भारत माला में बिछ रही अवैध खनन की ग्रिट, फर्जी ई-रवाना व ट्रांजिस्ट पास से चल रहा खेल

- अधिकारियों ने आंखों पर बांध रखी पट्टी, सरकार को रॉयल्टी पेटे करोड़ों रुपए का चूना

- नागौर जिले से खनन दिखाकर बीकानेर जिले में स्टॉरेज बताकर चला रहे अवैध क्रेशर

By: dinesh swami

Published: 17 Sep 2021, 07:02 PM IST

- पत्रिका खुलासा -

बीकानेर. श्रीगंगानगर, बीकानेर तथा जोधपुर जिले में बन रही भारत माला सड़क परियोजना के एक्सप्रेस वे में अवैध खनन की हुई ग्रिट (मेसेनरी स्टोन) को बिछाया जा रहा है। खनन माफिया ने नागौर जिले में लिए मेसेनरी स्टोन के पट्टों की खानों से इस पत्थर का खनन कर क्रेसर से पीसकर हाइवे ठेकेदारों को बेचना दिखा रहे हैं। परन्तु वास्तव में यह ग्रिट बीकानेर जिले के सारूंडा, मांडेलिया (नोखा) में लाइम स्टोन की खानों और आस-पास की भूमि से अवैध रूप से खनन कर तैयार हो रही है।

सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने के लिए बकायदा ऑनलाइन ई-रवाना व ट्रांजिस्ट पास जनरेट किए जा रहे हैं। चोरी के इस खेल का खुलासा भी यह पास ही कर रहे है। जिसे खनन अधिकारी ऑनलाइन देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। इससे सरकार को जहां एक तरफ करोड़ों रुपए की रॉयल्टी की चपत लग रही है। वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले अवैध क्रेसर तक चल रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो अवैध खनन के इस बड़े खेल का खुलासा हुआ है। अवैध खनन का यह खेल साल २०१९ से आज दिन तक अनवरत चल रहा है।

खुलासा-१. ग्रिट से भरा ट्रक ३० सेकेण्ड में ३० किमी दूर

उदाहरण के लिए ऑनलाइन उपलब्ध ई रवाना आरयूएसएन १०३०८४४३२३ को गौर से देखें। इसमें करनू (नागौर) की माइंस से मेसेनरी स्टोन निकालकर ट्रक में लोड कर ई-रवाना १२ बजकर ५६ मिनट और १६ सैकेण्ड पर जनरेट किया। यह ट्रक ३०-३५ किलोमीटर दूर सारूंडा में खनन पट्टा १८/२०१४ खनिज लाइन स्टोन पर स्टॉक नोखा मिनरल एंड कंस्ट्रक्शन पर ग्रिट लेकर आया। भोजास धर्मकांटा पर ई-रवाना में १२ बजकर ५६ मिनट और ४६ सेकेण्ड बजे पहुंचा दर्शा रहा है। यानि महज ३० सेकेण्ड में ग्रिट से भरा ट्रक ३० किलोमीटर दूर पहुंच गया।

असलियत: असल में ट्रक ग्रिट लेकर करनू से भोजास और फिर सारूंडा तक आया ही नहीं। सारूंडा में लाइम स्टोन की खान व पास के क्षेत्र से अवैध रूप से पत्थर को निकाला गया। अवैध रूप से क्रेसर चलाकर उसकी ग्रिट बनाई गई। बाद में यह ग्रिट यहां से भारत माला के ठेकेदारों समेत अन्य ग्रिट कारोबारी फर्मों को बेच दी गई।

खुलासा-२. ट्रांजिस्ट पास पर एक जैसे फोटो

ट्रांजिस्ट पासों पर ट्रक के रवानगी स्थल व धर्मकांटा तुलाई की फोटो लगती है। ट्रक की नम्बर प्लेट पर कागज चिपकाकर एक ही फोटो को अलग-अलग नम्बर के ट्रकों के पास में लगाई गई है। ट्रक नम्बर आरजे ०७, जीसी ४८६७, आरजे ०७ जीसी २१४७, आरजे ०७ जेसी १९४७, आरजे २१ जीबी ५५७७, आरजे २१ जीबी ५४३७, आरजे २१ जीबी ५४२७ के फोटो देखेंगे तो सभी में एक ही फोटो रिपीट किया हुआ है।

असलियत: यह फर्जी पास जेनरेट किए जाते है। असल में ग्रिट को चिनाई पत्थर (मेसेनरी स्टोन) को लाना दिखाने पर रॉयल्टी ३५ रुपए प्रति एमटी देनी पड़ती है। जबकि वास्तव में स्टॉक वाली दिखाई जगह के पास की लाइन स्टोन से पत्थर निकाला जाता है। उसकी रॉयल्टी १२० रुपए प्रति एमटी है। यानि प्रति एमटी ८५ रुपए का सरकार को चूना लगाया जाता है।

खुलासा-३. सभी गाडि़यों का वजन एक जैसा

ऑनलाइन उपलब्ध ई-रवाना को गौर से देखने पर चोरी के इस खेल का साफ पता चलता है। उदाहरण के लिए ऑनलाइन उपलब्ध ई-रवाना आरयूएसएन १०३०८४४१५७, १०३०८४४१९९, १०३०८४४२५८, १०३०८४४२९४, १०३०८४४३२३, १०३०८४४३४८, १०३०८४४३८१ में सभी ट्रकों का वजन १८.६१ मीट्रिक टन है। सभी में एक ही ट्रक की फोटो लगी हुई है। इसी प्रकार ई-रवाना आसीकेडब्ल्यू १०२३९१७०७६, १०२३९१७५१७, १०२३९१७५८४ इनमें भी २२.८६ एमटी वजन दिखाया हुआ है। समय भी एक-दो मिनट के अंतराल पर दर्ज है।

असलियत: असल में यह फर्जी रवाना पर्ची बनाई गई है। रवाना पर्ची में ट्रक की फोटो और वजन एक जैसा है। जबकि ट्रकों के नम्बर अलग-अलग है। यह संभव नहीं हो सकता कि एक भी किलो कम ज्यादा नहीं हो और ट्रक की नम्बर प्लेट पर कागज चिपकाया हुआ है।

खुलासा-४. तुलाई में हेराफेरी

उदाहरण के लिए ऑनलाइन उपलब्ध ट्रांजिस्ट पास नम्बर सीआरडीएस१००८६६३४१९ को गौर से देखें। इसमें २३.८३ एमटी ग्रिट का वजन दर्ज है। ट्रक की फोटो में ऊपर तक ग्रिट भरी नजर आ रही है। इसी ट्रक को ग्रिट से भरा हुआ एक और ट्रांजिस्ट पास सीआरडीएस१००८९४०३२६ को देखेंगे तो वजन ५७.६४ एमटी बताया गया है। यानि ग्रिट से भरे ट्रक का वजन दो गुणा हो गया।

असलियत: असल में रॉयल्टी चोरी करने के लिए ट्रकों के वजन में हेराफेरी की जाती है। रॉयल्टी प्रति टन वसूली जाती है। आधा वजन दिखाने पर आधे वजन की रॉयल्टी नहीं देनी पड़ती।

यह रवाना भी संदेह में

भारत माला प्रोजेक्ट को भेजे गए २७ अगस्त के ट्रांजिस्ट पास भी संदेह के घेरे में है। ई-रवाना वीएचजेएफ १०१४४६६३३२, १०१४४६५३३०, १०१४४६५५४७, १०१४४५९६७८, १०१४४६५४३४, १०१४४६५८३९ के उदाहरण भी है। इनमें सारूंडा से लाइम स्टोन भरा है और ट्रांजिस्ट पास भोजास से दिखाया गया है।

देखकर बता पाऊंगा

इस तरह की गड़बड़ी चल रही है तो देखकर ही बता सकता हूं। अभी चीफ सेक्रेटरी की आगवानी में व्यस्त हूं।

- राजीव चौधरी, अधीक्षण खनि. अभियंता बीकानेर

dinesh swami Reporting
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