गोरखपुर से भी बदहाल पीबीएम : पांच की जगह पन्द्रह लाख में आपूर्ति, फिर भी काम नहीं आ रहे वेंटीलेटर

पीबीएम में साढ़े चार से पांच लाख रुपए की कीमत के वेंटीलेटर को 15 लाख रुपए में खरीदा, फिर भी वह पूरी तरह गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे और खराब पड़े हैं।

By: अनुश्री जोशी

Updated: 18 Aug 2017, 08:03 AM IST

यूपी के गोरखपुर में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं करने से मरीजों की मौत के मामले ने देशभर को झकझोर रखा है। हमारे यहां पीबीएम में भी हालात गोरखपुर से कम बदहाल नहीं है। यहां वेंटीलेटर की खरीद में गड़बडिय़ों से लेकर जीवन रक्षक उपकरणों की समुचित व्यवस्था नहीं कर मरीजों का जीवन दावं पर लगाने के खेल चलते रहे है। पेश है पत्रिका संवाददाता हेम शर्मा और जयप्रकाश गहलोत की पड़ताल।

 

पीबीएम में साढ़े चार से पांच लाख रुपए की कीमत के वेंटीलेटर को 15 लाख रुपए में खरीदा गया। फिर भी वह पूरी तरह गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे और खराब पड़े हैं। इस तरह के एक दो नहीं साढ़े तीन करोड़ रुपए के 15 वेंटीलेटर की आपूर्ति मापदंडों के अनुरूप नहीं हुई। इससे ये वेन्टीलेटर नकारा पड़े हैं। इन पर ह्यूमिडीफायर ही नहीं लगाया गया। जिससे वेन्टीलेटर काम नहीं कर रहे हैं।

 

राज्य सरकार को भेजी प्रशासनिक रिपोर्ट में वेंटीलेटर खरीद में गड़बड़ी का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक पीबीएम में 2015 में वेन्टीलेटर खरीद के लिए फिर निविदाएं निकाली गई। इन वेन्टीलेटर की वास्तविक कीमत 4.5 लाख से 5 लाख है। जबकि 15 लाख रुपए की दर से खरीदे गए। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पीबीएम में मोलीक्यूलर रेजोनेन्स जनरेटर जिसका बाजार मूल्य 7 से 13 लाख है।

 

इसे 45 लाख में खरीदा गया। 2013-14  में ट्रोमा सेन्टर में इसे लगाने के बाद से कोई उपयोग नहीं हुआ है। इस मामले में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग को लिखित में शिकायत की गई थी कि मोलीक्यूलर रिजोर्नेस जनरेटर की खरीद में षडय़ंत्रपूर्वक 30 लाख से अधिक के घपले को रोका जाए।

 


शिकायत में कहा गया था कि स्थानीय सप्लायर को फायदा पहुंचाने के लिए मोलीक्यूलर रिर्जोनेस जनरेटर खरीद की निविदाएं आमंत्रित की गई। निविदा में अन्तरराष्ट्रीय कंपनी के नाम के फर्जी दस्तावेज बनाए गए। इसी तरह इसी दौरान अस्पताल प्रशासन ने 12 लाख में फायर अलार्म सिस्टम खरीदा जबकि अग्नि शमन यंत्र व फायर ब्रिगेड ही उपलब्ध नहीं थे। इन सभी मामलों में कार्रवाई लम्बित चल रही है।

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