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अभियान में फिसड्डी, जनसमस्याओं पर बेपरवाह

नगर निगम - जिले से प्रदेश तक नगर निगम पट्टे जारी करने में कमजोर
25 महीनों में न हुई साधारण सभा न जनसमस्याओं का समाधान

बीकानेर

Published: January 05, 2022 12:49:15 pm

बीकानेर. प्रशासन शहरों के संग अभियान में नगर निगम पट्टे जारी करने में अब तक फिसड्डी साबित हुआ है। जिले में स्थित नगर पालिकाएं भी पट्टे जारी करने में निगम से आगे है। संभाग के 31 स्थानीय निकायों में बीकानेर का नगर निगम कमजोर है। प्रदेश की दस नगर निगमों में बीकानेर नगर निगम अंतिम पायदान पर है। निगम में एक आइएएस और दो आरएएस अधिकारियों की मौजूदगी के बाद भी आमजन पट्टों को तरस रहे है। कच्ची बस्तियों में जरुरतमंद लोगों को आवंटन अधिकार पत्र भी जारी नहीं हो रहे हैं। स्टेट ग्रांट का पट्टा अब तक एक भी जारी नहीं हो पाया है। अहस्तांतरणी आंवटन अधिकार पत्रों को हस्तांतरणीय करने में भी निगम असफल साबित हुआ है। 69 -ए के तहत भी पट्टे जारी नहीं हो पा रहे है।

अभियान में फिसड्डी, जनसमस्याओं पर बेपरवाह
अभियान में फिसड्डी, जनसमस्याओं पर बेपरवाह


निगम में सैकड़ों संसाधनों के होने व हर साल करोड़ों रुपए के भुगतान के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था से आमजन परेशान है। जगह-जगह खुले पड़े सीवर और नालों जानलेवा बने हुए है। कचरे व गंदगी से अटे नाले, आए दिन जाम रहने वाली सीवरेज जाम से लोग परेशान है। निगम की स्वयं की गोशाला होने के बाद भी सडक़ों पर खुले घूम रहे बेसहारा पशुओं की चपेट में लोग रोज आ रहे है। नालियों से पतरे गायब है व गड्ढों वाली सडक़ों से गुजरने में लोग अभ्यस्त हो गए है। एलइडी लाइटों पर करोड़ो रुपए खर्च होने के बाद कई सडक़ों और गली-मोहल्लों में अंधेरा है।

करोड़ों खर्च फिर भी सडक़ों पर बेसहारा पशु

नगर निगम नंदीशाला पर करोड़ो रुपए खर्च कर चुका है। पिछले डेढ साल से भी अधिक समय से निगम अपनी गोशाला में एक भी पशु नहीं डाल रहा है। गोशाला समिति और निगम के बीच भुगतान का विवाद चरम पर है। निगम व समिति में बेसहारा पशु उलझे हुए है।

मुख्य सडक़ों से मोहल्लों तक कचरे की ढेरियां

घर -घर कचरा संग्रहण अनुबंधित ट्रैक्टर ट्रॉलियों से कचरा परिवहन पर निगम हर महीने लाखों रुपए खर्च कर रहा है फिर भी मुख्य बाजारों, सडक़ों, हाइवे से गली-मोहल्लों तक कचरे की ढेरियां पड़ी रहती है। कचरे व गंदगी से लोग परेशान हो रहे है। न प्रभावी मॉनिटरिंग है और ना ही संसाधनों का उचित उपयोग।

खुले नाले, जगह-जगह सीवरेज जाम
नाला सफाई पर हर साल लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी शहर के दर्जनों नाले कचरे और गंदगी से अटे पड़े है। खुले नाले खतरनाक बने हुए है। कई दुर्घटनाएं नालों के कारण हो चुकी है। खुले सीवर चैंबर भी जानलेवा बने हुए है। करोड़ो के संसाधनों के बाद भी सीवरेज जाम से लोग रोज परेशान हो रहे है।

एलइडी लाइटों पर करोड़ो खर्च फिर भी सडक़ों पर अंधेरा

नगर निगम शहर में करीब पचास हजार एलइडी लाइटें लगा चुका है। हर साल लाइटों पर करोड़ो रुपए खर्च हो रहे है। आज भी हजारो लाइटें मैन्यूअली ऑन ऑफ हो रही है। देखरेख व मेंटीनेंस के अभाव में मुख्य मार्गो से गली-मोहल्लों और कॉलोनियों तक अंधेरा पसरा रहता है।

सडकों पर गड्ढ़े, नालियों से पतरे गायब

नगर निगम वार्ड अनुसार सडकों ं, नाले, नालियों आदि पर करोड़ो रुपए की राशि खर्च करने की बात कह रहा है। निगम अधिकर क्षेत्र की दर्जनों सडकों पर गड्ढ़े बने हुए है। रोज आमजन परेशान हो रहे है। कई मुख्य मार्गो पर गड्ढे बने हुए है। नालियों से पतरे गायब है। नालों के मेन हॉल पर लगी लोहे की जालियां बदहाल है व खतरनाक बनी हुई है।

न हो रही साधारण सभा, न कमेटियों पर निर्णय

नगर निगम के वर्तमान बोर्ड के गठन को 25 महीने हो गए है। एक बार भी सभी पार्षदों ने सदन में बैठकर शहर की जनसमस्याओं पर चर्चा नहीं की है। जनसमस्याओं पर चर्चा को लेकर साधारण सभा की बैठक नहीं बुलाई जा रही है। निगम पार्षदों की कमेटियां अधरझूल में है। निर्णय नहीं होने से कमेटियों का लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है।

प्रशासन शहरों के संग अभियान - न नीति ना नियत

प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत निगम प्रशासन बिना नीति और नियत के अभियान का संचालन कर रहा है। अभियान के पहले 93 दिनों में निगम महज 130 पट्टे ही जारी कर पाया है। जबकि नगर पालिका देशनोक 140, नोखा 469 और श्रीडूंगरगढ़ 356 पट्टे जारी कर चुके है। नगर विकास न्यास भी 1905 पट्टे जारी कर चुका है। निगम प्रशासन सरकार की मंशा अनुसार अधिकाधिक पट्टे जारी करने की बजाय पत्रावलियों को घुमाने और अटकाने में जुटा है। 69 -ए के तहत पट्टे के बदले पट्टे जारी करने में भी लोगों को चक्कर कटवा रहा है। रियासतकालीन पट्टों में एक भाई को पट्टा दे रहा है, जबकि दूसरे भाई की पत्रावलि पर आपत्ति दर्ज कर रहा है। अभियान की दिशा निर्देशिका में स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी आदेशों को तोड़ -मरोडक़ कर पढ़ रहा है व पत्रावलियां अटकाई जा रही है।
न आवंटन पत्र दे रहे न स्टेट ग्रांट पट्टे
अभियान के दौरान निगम ने अब तक शहर की एक भी कच्ची बस्ती में एक भी परिवार को न आवंटन अधिकार पत्र दिया है और ना ही स्टेट ग्रांट का पट्टा। यहीं नहीं एेसे आंवटन अधिकार पत्र जो दस वर्ष या इससे अधिक पुराने है उनमें अहस्तांतरणीय को हस्तांतरणीय भी नहीं किया जा रहा है। 69 -ए के महज 55 पट्टे जारी
दशकों से घूम रही सैकड़ों पत्रावलियां
निगम में दशकों से सैकड़ों पत्रावलियां पट्टों के लिए घूम रही है। अभियान अवधि में भी उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। दर्जनों फाइलें 30 से 40 साल पुरानी है। कई आवेदकों की मृत्यु हो गई है। तीसरी और चौथी पीढ़ी के परिवार के सदस्य पट्टों के लिए निगम के चक्कर निकाल रहे है। नगर पालिका भीनासर और नगर पालिका गंगाशहर में शुरू हुई पत्रावलियां अब तक चल रही है।कच्ची बस्ती में नहीं दिए जा रहे पट्टे के बदले पट्टे

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