घेवर-फीणी की खुशबु से महक रहे मोहल्ले

बीकानेर के घेवर और फीणी ( Bikaner's Ghevar and Feni) - मळमास और मकर संक्रांति को लेकर जगह-जगह खुली दुकानें





By: Vimal

Published: 16 Dec 2020, 12:13 AM IST

बीकानेर. सर्दी के मौसम में घेवर और फीणी ( Ghevar and Feni) को लोग बड़े चाव से खाते है। मळमास शुरू होते ही शहर में बड़ी संख्या में इनको तैयार करने का सिलसिला शुरू हो गया है। स्थायी दुकानों के साथ -साथ घेवर और फीणी की दर्जनों अस्थाई दुकानें सज गई है। सुबह से देर शाम तक इनको बनाने के साथ बिक्री भी शुरू हो गई है। मळमास और विशेषकर मकर संक्रांति ( Makar Sankranti ) पर घेवर और फीणी के दान-पुण्य ( Charity ) का विशेष महत्व होने के कारण घर-घर में इनकी मांग बढ़ जाती है। लोग अपनी बहन-बेटियों के ससुरा शगुन रूप में भी घेवर -फीणी भेजते है। वहीं सर्दी के मौसम में घेवर और फीणी शहरवासियों का पसंदीदा व्यंजन बना रहता है। लोग गर्मागर्म घेवर का स्वाद चखते रहते है। जबकि दूध के साथ फीणी का उपयोग बढ़ जाता है।

 

विभिन्न आकार और स्वाद में
दान-पुण्य के साथ घेवर ( Ghevar) का उपयोग सर्दी के मौसम में मुख्य खाद्य सामग्री के रूप में भी होता है। घेवर विभिन्न आकार में बनाए जाते है। 4 इंच से लेकर 18 इंच आकार तक के घेवर सामान्य रूप से बनते है। कुछ हलवाई 22 इंच तक आकार के भी घेवर तैयार करते है। मकर संक्रांति पर 12 से 18 इंच तक के घेवर की अधिक डिमांड बनी रहती है। बिना चीनी की चासनी और चीनी की चासनी लगे स्वाद में उपलब्ध होते है।

 

इनसे बनते है घेवर -फीणी
घेवर-फीणी में मुख्य रूप से मैदा, घी,दूध ( Milk ) और चीनी की चासनी से तैयार होते है। स्वाद के अनुसार केशर, बादाम, पिस्ता, रबड़ी का भी उपयोग होता है। तैयार होने पर घेवर-फीणी को मिठास के लिए चीनी की चासनी लगाई जाती है।

 

नमकीन घेवर भी होते है तैयार
नमकीन-कचोली के शौकिनों के शहर में नमकीन घेवर की भी डिमांड बनी रहती है। हलवाई कार्य से जुड़े आनन्द ओझा के अनुसार नमकीन घेवर भी मैदा से बनते है, लेकिन इनको तैयार करने में काली मिर्च, साबुत धनिया, काला नमक, जावत्री, जायफल, दाल चीनी, पीपल का उपयोग होता है। नमकीन घेवर को तेल से तैयार किया जाता है।

 

खीर और दूध के साथ उपयोग
शहर में सामान्य रूप से मीठे घेवर का उपयोग होता है। खाने-पीने के शौकीन लोग बिना चासनी लगे घेवर फीणी को दूध चावल से बनी खीर तथा केशर युक्त दूध ( Saffron milk) के साथ भी करते है। डूंगरशाही भुजिया के साथ बिना चासनी लगी फीणी को लोग बड़े चाव से खाते है। वहीं घर घर में रबड़ी से तैयार छोटे घेवर की अधिक मांग बनी रहती है।

 

120 से 600 रुपए तक भाव
शहर में देशी घी और छैने से तैयार घी दोनो से घेवर फीणी बनते है। छैने के घी से तैयार घेवर चासनी लगे 120 से 140 रुपए प्रति किलो, बिना चासनी लगे 230 से 260 रुपए प्रति किलो के अनुसार बिक रहे है। वहीं देशी घी से तैयार घेवर 300 रुपए प्रति किलो से 380 रुपए प्रति किलो तक और बिना चासनी लगे 420 से 480 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रहे है। चासनी लगी देशी घी से तैयार फीणी ( Feni) 380 से 460 रुपए तक और बिना चासनी लगी फीणी 500 से 600 रुपए तक प्रति किलो के भाव तक बिक रही है। दुकानों में अलग-अलग भाव से घेवर फीणी बिक रहे है।

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