बीकानेर का बर्फ का गोला चीन के मुंह चढ़ा... पढ़ें यह खास खबर...

Bikaner special item- किसी जमाने में गंगाशहर की गली-गली में बिकने वाला बर्फ का गोला यानी बर्फ का छत्ते का स्वाद अब विदेशों में अपनी धमक छोड़ रहा है।

By: Atul Acharya

Published: 04 Jul 2019, 08:47 PM IST

बीकानेर. गंगाशहर. किसी जमाने में गंगाशहर की गली-गली में बिकने वाला बर्फ का गोला यानी बर्फ का छत्ते (barf ka gola) का स्वाद अब विदेशों में अपनी धमक छोड़ रहा है। बीकानेर के इस उपनगर में छत्ता को नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाले बाबा टालदास की तीसरी पीढ़ी ने अब अपने पारंपरिक धंधे को देश की सीमाओं के पार पहुंचा दिया है।

उपनगर गंगाशहर के सुंदरलाल छत्तेवाले का नाम बीकानेर में ही नहीं वरन् पूरे देश के साथ विदेशों में अपनी पहचान बना रहा है। गंगाशहर के बाजार में छत्ता खाने के शौकीनों की भीड़ का आलम यह रहता है कि देर रात तक वहां लोगों की भीड़ रहती है। छत्ते की दुकान के पास वाहनों की कतारें सड़क के दोनों तरफ लग जाती है।

 

गली-गली घूमकर बेचते थे छत्ता

बाबा टालदास के पौत्र और सुंदरलाल के पुत्र राजू रांकावत बताते हैं कि करीब 50 साल पहले दादाजी गंगाशहर, भीनासर व किसमीदेसर की गलियों में हाथ गाड़े पर बर्फ और शरबत ले जाकर छत्ते (barf ka gola) बेचते थे । उस जमाने में छत्ते की कीमत उसके साइज के हिसाब से होती थी। इसमें एक पैसे लेकर दस पैसे तक होती थी। शरबत के फ्लेवर भी चार-पां प्रकार के ही होते थे। उस जमाने में ऑरेंज, गुलाब, केसर, चॉकलेट जैसे शरबत के कुछ ही फ्लेवर थे। रांकावत कहते हैं मेरे दादा के बाद पिता सुंदरलाल ने छत्ते बेचने का काम संभाला। उनके समय में एक छत्ते की कीमत एक से दो रुपए तक हो गई थी । लेकिन अब जमाना बदल गया है। अब मेरे पिता के नाम से सुंदरलाल छत्तेवाला हमारा ब्रांड पूरे देश में पहचाना जाने लगा है।

 

विदेशों में दे रहे सेवाएं

इसके साथ ही हमारी फर्म की टीम चीन, नेपाल, भूटान जैसे देशों में भी प्रवासी राजस्थानियों के शादी समारोह और उत्सवों में छत्ता बनाने का काम संभाल चुकी है। वही पूरे देश लगभग सभी बड़े शहरों में हमारी टीम ने प्रवासी राजस्थानियों के मांगलिक कार्यक्रमों में स्वादिष्ट छत्ते की सेवा देती है। वर्तमान समय में गंगाशहर के मुख्य बाजार में हमारी दुकान है। जहां शाम को पांच बजे से लेकर रात 12 बजे तक छत्ता खाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। फर्म की एक शाखा बीकानेर के जूनागढ़ किले के सामने भी है।

 

आज छत्ते (barf ka gola) में डालने वाले शरबत के फ्लेवर की संख्या भी 64 तक पहुंच गई है। जहां पहले कुछ सीमित फ्लेवर के शरबत थे वहीं अब इसमें कुछ नयापन लाए हैं। आजकल रजनीगंधा, कीवी, केवड़ा, बटर स्कॉच, किमाम, अमरूद जैसे फ्लेवर भी खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। वर्तमान में छत्ते की कीमत 20 से ६० रुपए तक है। चाहे गंगाशहर में हो या विदेश में छत्ते के लिए शरबत स्वयं बनाकर वहां ले जाते हैं ताकि जो ओरिजिनल फ्लेवर का टेस्ट बना रहे।

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Atul Acharya Reporting
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