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शहर करे गुहार... जागो जिम्मेदार, इलाज ढूंढों सरकार

बदहाली का दंश - बारिश के दिनों में बंधक बना रहता है बीकाणा

सफाई के करोड़ों रुपए के संसाधन फर्मों के हवाले, नतीजा फिर भी सिफर
जरा सी बारिश में तालाब बन जाता है बीकानेर का अधिकतर हिस्सा

हर साल करोड़ों खर्च, हालात जस के तस

हर माह लाखों का भुगतान फिर भी नाले कचरे व गंदगी से अटे

 

बीकानेर

Updated: July 06, 2022 07:00:28 pm

विमल छंगाणी

नगर निगम हर माह शहर की सफाई व्यवस्था पर लाखों रुपए खर्च कर रहा है। सैकड़ों सफाई कर्मचारी इस कार्य मे जुटे हुए है। करोड़ों के संसाधन झोंक रखे है, लेकिन नतीजा न शहर में सफाई दिख रही है और ना ही आमजन संतुष्ट नजर आ रहे है। घर-घर कचरा संग्रहण सहित ट्रैक्टर ट्रॉलियों से कचरे के परिवहन और नालों की सफाई के नाम पर लाखों रुपए खर्च हो रहे है, लेकिन शहर के हालात जस के तस नजर आ रहे है। हर माह करीब एक करोड रुपए घर-घर कचरा संग्रहण के लिए खर्च करने के बाद सड़कों पर कचरें की ढेरियां नजर आती है। हर माह 45 ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी जहां नजर जाए वहां कचरा ही कचरा नजर आता है। मानसून को लेकर नालों की सफाई के लिए निगम ने पॉकलेन मशीन भी किराये पर ली। जिस पर हर माह लाखों रुपए खर्च हो रहे है। सामान्य बारिश के दौरान ही उफान पर रहे नालों ने सफाई कार्यों की पोल खोल दी। बारिश के चौबीस घंटे बाद भी सड़कों पर फैला पानी, कीचड़ व गंदगी

शहर करे गुहार... जागो जिम्मेदार, इलाज ढूंढों सरकार
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निगम की उदासीनता को बयां कर रहे है।कमजोर सुपरविजन

निगम की ओर से करवाए जा रहे कार्यों में कमजोर सुपर विजन सबसे बड़ी कमी बनी हुई है। आयुक्त, उपायुक्तों के भरोसे है, जबकि उपायुक्त स्वास्थ्य अधिकारी के। स्वास्थ्य अधिकारी स्वच्छता निरीक्षकों के जिम्मे कार्य सौंपकर इतिश्री कर रहे है। स्वच्छता निरीक्षक जमादारों के भरोसे है। वार्डो में जमादारों के भी अपने कर्मचारी है, जो मॉनिटरिंग सहित सफाई कार्यों पर नजर रखते है। नाला सफाई कार्य में एक्सईएन, एईएन व जेईएन संबंधित अनुबंधित फर्मों के भरोसे ही चल रहे है। धरातल पर सफाई कार्यो की मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है, जिसके कारण शहर में सफाई के हालात बदहाल है।

हर साल नाला सफाई पर लाखों खर्च

मानसून से पहले हर साल नगर निगम शहर के नालों की सफाई पर लाखों रुपए खर्च करता है। साल भर निगम के संसाधन नाला सफाई के नाम पर भंडार से निकलते रहते है व डीजल खर्च होता रहता है। इसके बाद भी निगम मानसून से पहले नालों की विशेष सफाई करवाता है। लाखों रुपए खर्च होते है। लेकिन बारिश के दौरान हालात जस के तस नजर आते है। जगह-जगह नाला जाम के कारण सड़कों और मौहल्लों में पानी एकत्र रहता है।

करोड़ों के संसाधन, नहीं मिल रहा लाभ

नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए करोड़ो रुपए के सफाई संसाधन खरीदे। इनमें घर-घर कचरा संग्रहण के लिए साठ ऑटो टिपर सहित सड़कों की सफाई के लिए दो रोड स्विपर, सीवरेज की सफाई के लिए जेटिंग मशीने, टॉयलेट वॉशिंग मशीन आदि प्रमुख है। करोड़ो रुपए खर्च होने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नजर नहीं आ रहा है। निगम इन संसाधनों को फर्मों को सौंप चुका है।

कमजोरी निगम की, थोंप रहे दूसरे पर

शहर में नालों की बदहाल िस्थति के लिए नगर निगम स्वयं जिम्मेदार है, लेकिन निगम अधिकारी नालों के ऊपर हो रखे अतिक्रमणों, नालों के सड़कों के नीचे होने सहित कई बहाने बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे है। हर साल नालों की सिल्ट सहित पूरी सफाई की कमी बनी रहती है, जिसके कारण नाले बारिश के दौरान उफान पर रहते है।

सफाई कर्मचारी, गैर सफाई कार्यो मे

शहर की सफाई व्यवस्था के लिए निगम में लगभग 1475 सफाई कर्मचारी बताए जा रहे है। इनमें से लगभग सौ से अधिक कर्मचारी सफाई को छोड़कर अन्य निगम कार्य कर रहे है। वहीं वार्डो में कार्यरत सफाई कर्मचारियों में से भी कई कर्मचारियों की सफाई कार्यो से दूरी बनी रहती है। कई सफाई कर्मचारियों को जमादार सहित अन्य मॉनिटरिंग के कार्य भी सौंप रखे है। इससे पूरे कर्मचारी रोज सफाई कार्यो में नहीं जुट पाते है।

वर्षो पुरानी सीवरेज लाइने

शहर में लगभग तीन दशक से अधिक समय पहले सीवर लाइने कई क्षेत्रों में डाली गई थी। यह सीवर लाइने अब अपनी समयावधि पूरी कर चुकी है। सीवर लाइने ही टूट कर अब अवरोधक बन रही है। आवश्यकता है इस लगभग 78 किमी लाइन को बदले जाने की। वहीं कई क्षेत्रों में सीवर लाइने डलने के बाद भी उनका पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। सीवर सफाई के अनुभवी व आधुनिक मशीनों का ऑपरेट करने वाले ऑपरेटरों की कमी भी निगम में बनी हुई है। जिसके चलते सीवर जाम की समस्या रोज बनी रहती है।

शताब्दियों पुरानी इंजीनियरिंग आज भी कारगर

बीकानेर नगर की स्थापना के बाद परकोटा क्षेत्र में बसे मौहल्ले पहले बसे। रियासतकाल में बसे इन मौहल्लों की बसावट भले ही अब घनी आबादी वाली हो, संकरी गलियां हो, छोटे मार्ग हो, लेकिन बारिश के दौरान होने वाली पानी की सुचारु निकासी व ड्रेनेज सिस्टम आज भी कारगर है। बारिश के महज कुछ समय बाद ही परकोटा क्षेत्र की गलियों से पानी बाहर निकल जाता है। जानकार लोग बताते है कि पुराने शहर की बसावट ऊंचाई वाले स्थान पर की गई थी व बसावट शानदार थी। वहीं दूसरी ओर हाल के वर्षों में बस रही कॉलोनियां, व आवासीय क्षेत्र बारिश के पानी व सीवरेज जाम की समस्या से जूझ रहे है।

हर महीने लाखों का भुगतान

नगर निगम शहर की सफाई के लिए हर माह अनुबंधित संसाधनों और सफाई श्रमिकों पर लाखों रुपए खर्च कर रहा है। निगम ने कचरा परिवहन के लिए अनुबंध पर 45 ट्रैक्टर ट्रॉलिया ले रखी है। इनसे रोज सड़कों से कचरे का परिवहन कार्य करवाया जा रहा है। वहीं मुख्य मार्गो की सफाई के लिए निगम ने 100 सफाई श्रमिक भी अनुबंध पर ले रखे है। इन पर भी हर माह लाखों रुपए खर्च कर रहा है। वहीं अनुबंध पर लगा रखी जेसीबी मशीने पर निगम हर माह लगभग नौ लाख रुपए खर्च कर रहा है। नालों की सफाई के लिए एक पॉकलेन मशीन भी अनुबंध पर लगा रखी है। जिस पर निगम हर माह ढाई लाख रुपए खर्च कर रहा है।

करोड़ो के संसाधन फर्मो को सौंपे

नगर निगम के पास सफाई कार्यो को लेकर करोड़ों रुपए के दर्जनों संसाधन है। निगम इनका अपने स्तर परसंचालन नहीं कर फर्मों के माध्यम से करवा रहा है। इसके लिए निगम फर्मों को हर माह लाखों रुपए का भुगतान भी कर रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार दो रोड स्वीपर मशीन, पांच जेसीबी मशीन, 64 ऑटो टिपर, तीन रिफ्यूज कॉम्पेक्टर, एक-एक हाई पावर संक्शन मशीन, संक्शन कम जेटिंग मशीन को निगम ने फर्मों को सौंप रखे है। फर्मे इनका संचालन कर रही है।

एक्सर्ट व्यू

ड़्रेनेज सिस्टम के लिए हो सर्वे, कसावट भरा हो सुपरविजनऐसी कोई भी समस्या नहीं है, जिसका स्थायी समाधान न हो। बस आवश्यकता है पूरी ईमानदारी के साथ धरातल पर लागू करने की। शहर के ड्रेनेज सिस्टम में सुधार की अधिक आवश्यकता है। इसके लिए आवश्यक है कि पूरे शहर का ड्रेनेज सिस्टम का एक प्लान तैयार होकर उसी के अनुरुप कार्य हो। यह कार्य कुछ चरणों में भले हो, लेकिन प्लान के मुताबिक ही होने से ड्रेनेज सिस्टम समस्या से निजात मिल सकती है। शहर के वर्तमान क्षेत्रफल, आबादी, बरसात के औसत को मध्यनजर रखते हुए पूरे शहर का सर्वे होना चाहिए।

शहर में वर्षों पुराने नाले बड़े व पानी की निकासी के लिए पर्याप्त है। इन नालों की साफ-सफाई और देखभाल नहीं होने के कारण ये आमजन के लिए समस्या बनते है। कमी नालों में नहीं, सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने वालों की है। धरातल पर सुपरविजन नहीं हो रहा है। सभी एक दूसरे पर कार्य थोंप रहे है। इसका नतीजा आए दिन शहर में देखने को मिलता है। अगर एक बार सभी नालों की तल तक पूरी सफाई हो जाए तो काफी समय तक ये सुचारु रुप से चल सकते है। नालों के जाम रहने का एक ही कारण है उनकी सफाई नहीं होना।

नालों की डिजाइन, लेवल सहित अन्य कारण बताकर जिम्म्मेदार अपना पल्ला झाड़ते नजर आते है। कमी नालों में नहीं है। अगर नाला सड़क से ऊपर बना है तो नुकसान दायक है। सड़क से नीचे बना है तो इसका कोई नुकसान नहीं है। शहर की सुचारु सफाई व्यवस्था के लिए आवश्यक है कि निगम में कार्यरत सभी सफाई कर्मचारियों से पूरी ईमानदारी से सफाई कार्य ही करवाया जाए। उनको अन्य कार्यो में न लगाया जाए। एसआई, जमादार भी अपना दायित्व समझे।पुराने शहर का ड्रेनेज सिस्टम व बारिश के दौरान पानी की निकासी व्यवस्था नैचुरल है। शहर ऊंचाई पर बसा है। पानी ढलान की ओर स्वत: उतरता जाता है। शहर के जो एरिया तालाबों के कैचमेंट एरिया में है, निचाई वाले स्थानों पर बसे है, वहां बारिश के दौरान पानी एकत्र होने की समस्या बनी रहेगी। हमारा शहर साफ-सुथरा हो, ड्रेनेज सिस्टम सुचारु रहे, बारिश के दौरान तुरंत पानी की निकासी हो, इसके लिए आवश्यक है कि योजनाबद्ध तरीके से सर्व करवाकर शहर की आबादी, फैलाव, बारिश के पानी का औसत सहित विभिन्न बिंदुओं को सामने रखकर प्लान तैयार किया जाए व उस पर अमल हो। वहीं आमजन भी नाले-नालियों की सफाई के लिए सतर्क रहे। कचरा न डाले।

मौलाबख्श

पूर्व आयुक्त नगर निगम, बीकानेर

सफाई कार्यो के लिए नियुक्त कर्मचारीसफाई कर्मचारी - 1475

जमादार - 80स्वच्छता निरीक्षक - 07

स्वास्थ्य अधिकारी - 01

नगर निगम क्षेत्र में िस्थत नालेबड़े नाले - 17

छोटे नाले - 148

सफाई कार्यो के लिए उपलब्ध संसाधनजेसीबी - 12

डम्पर - 13

ट्रेक्टर ट्रॉलिया - 02 निगम की

अनुबंधित - 45

ऑटो टिप्पर -150 - अनुबंधित फर्म का कार्य

डम्प टैंक - 02

मीवर जैटिंग मशीन -02

टॉयलेट वॉशिंग मशीन -01

मुख्य मार्गो के लिए 100 लेबर अनुबंधित

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