अनुवाद साहित्य की सशक्त विधा - व्यास

कवि-कथाकार कमल रंगा की पुस्तक ‘अक्षर की काया’ का विमोचन

By: Vimal

Published: 14 Sep 2021, 05:31 PM IST

बीकानेर. अनुवाद साहित्य की सशक्त विधा है। यह विधा मौलिक सृजन से कहीं भी कम नहीं है। अनुवाद विधा भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विश्व की भाषाओं के बीच एक सेतु का काम करती है। यह बात सोमवार को राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष गोपाल कृष्ण व्यास ने सर्किट हाउस में कवि-कथाकार कमल रंगा की राजस्थानी प्रतिनिधि कविताओं के अनुवाद की पुस्तक ‘अक्षर की काया’ का विमोचन करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि रंगा की कविताओं का संस्कृत एवं हिन्दी में एक साथ अनुवाद एक नव प्रयोग तो है ही साथ ही भाषायी समन्वयक का एक महत्वपूर्ण सृजनात्मक उपक्रम है। पुस्तक के रचनाकार कमल रंगा ने कहा कि ऐसे अनुवाद के माध्यम से राजस्थानी मान्यता को बल मिलेगा। पुस्तक के अनुवादक कवि-आलोचक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि अनुवाद कर्म एक सृजनात्मक चुनौती और परकाया प्रवेश है। अनुवादिका ईला पारीक ने भी विचार रखे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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