सुसाइड नोट में लिखा पापा को जेल नहीं जाने दूंगा... और जहर खाकर दे दी जान

सुसाइड नोट में लिखा पापा को जेल नहीं जाने दूंगा... और जहर खाकर दे दी जान

Atul Acharya | Publish: May, 15 2019 09:47:44 AM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

परिजन पहुंचे सीओ ऑफिस, रिपोर्ट दर्ज करने की मांग

 

बीकानेर.नोखा. कस्बे के वार्ड एक में रहने वाले एक युवक ने अपनी पत्नी से परेशान होकर तीन दिन पहले विषाक्त पदार्थ खा लिया। मंगलवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक ने एक सूसाइड नोट भी लिखा है जो परिजनों ने पुलिस को सौंपा है। मृतक ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह अपने पापा को जेल नहीं जाने देगा, चाहे उसे जान देनी पड़े। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सौंप दिया।

 

 

पुलिस के अनुसार ललित शेखावत पुत्र देवीसिंह ने १० मई को विषाक्त पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। मंगलवार सुबह पीबीएम अस्पताल में इलाज के दौरान ललित की मौत हो गई। मृतक की बहन सुनीता ने अपनी भाभी मूमल के खिलाफ नोखा थाने में दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि उसके भाई ललित को भाभी मूमल परेशान करती थी। उसके पिता व भाई दोनों को जेल भेजने की धमकी देती थी और भाई को उसके बच्चों से मिलने नहीं देती थी। मृतक के पिता देवी सिंह ने भी अपने बेटे ललित सिंह को पुत्रवधू मूमल द्वारा परेशान करने का आरोप लगाया है। वहीं मृतक ललित की ओर से लिखे गए सुसाइड नोट में भी उसने अपनी पत्नी मूमल पर परेशान करने का आरोप लगाकर आत्महत्या करने की बात भी कही है। बाद में मृतक के परिजन नोखा सीओ से मिले और मामला दर्ज कराने की गुहार लगाई। इसके बाद नोखा थाने में मामला दर्ज हुआ।

 

 

 

यह लिखा सुसाइड नोट में...

परिजनों के मुताबिक मृतक ललित सिंह शेखावत ने १० मई को लिखे सुसाइड नोट पर दूसरी कोशिश लिखा हुआ है। नीचे लिखा है, मैं ललित सिंह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने की बहुत कोशिश कर चुका हूं लेकिन मेरी पत्नी मूमल मुझे सुख से नहीं जीने दे रही है, वो मुझे अपने बच्चों से दूर कर रही है। आज महिला थाने गया था, उसे लेने, मना कर दिया, वो चाहती है, मैं अपने परिवार वालों से रिश्ता तोड़ लूं, लेकिन मैं अपने पापा को छोड़कर नहीं जा सकता। अब वो अपने देश के कानून का गलत उपयोग करेगी लेकिन मैं अपने पापा को जेल नहीं जाने दूंगा, चाहे मुझे अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े। लेकिन अपने बच्चों के बारे में सोचता हूं, तो हिम्मत नहीं होती, परंतु और कोई रास्ता ही नहीं है। महिला कानून का सदुपयोग करे। ...ललित सिंह

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