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15 में से 4 अस्पतालों में ही चिकित्सक, कैसे हो उपचार

पशुधन बाहुल्य वाले लूणकरनसर उपखण्ड क्षेत्र में बदहाल है पशु चिकित्सा व्यवस्था

बीकानेर

Published: July 01, 2022 12:59:01 am

लूणाराम वर्मा
महाजन. लूणकरनसर उपखण्ड क्षेत्र में पशु चिकित्सा व्यवस्था बदहाल होने से पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बीमार पशुधन का उपचार करवाने के लिए पशुपालकों को देशी नुस्खों व नीम-हकीमों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस विकट समस्या को लेकर जहां जनप्रतिनिधि मौन है। वहीं विभाग भी उच्च स्तर का मामला बताकर पल्ला झाड़ लेता है। इसका खामियाजा पशुपालकों व पशुधन को भुगतना पड़ रहा है।

15 में से 4 अस्पतालों में ही चिकित्सक, कैसे हो उपचार
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गौरतलब है कि उपखण्ड क्षेत्र में पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है। दूध उत्पादन से हजारों परिवार अपना पेट पालते है लेकिन राज्य सरकार व पशुपालन विभाग की उदासीनता के चलते यह व्यवसाय रसातल में जा रहा है। बीमार पशुधन के उपचार की क्षेत्र में माकूल व्यवस्था नहीं होने से हालात बदतर बने है। अकाल व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ पशुपालकों को बीमार पशुधन के उपचार के लिए भी भटकना पड़ रहा है।

यह है पशु चिकित्सा व्यवस्था

लूणकरनसर नोडल क्षेत्र में 2 प्रथम श्रेणी व 13 पशु चिकित्सालय है। लूणकरनसर व महाजन में प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय है। वहीं नाथवाणा, शुभलाई, बामनवाली, सुरनाणा, सहजरासर, कालू, ढाणी पाण्डूसर, शेखसर, मलकीसर, कांकड़वाला, शेरपुरा, जैतपुर व गारबदेसर में पशु चिकित्सालय है लेकिन 15 में से महज लूणकरनसर, महाजन, शेखसर व मलकीसर में ही चिकित्सक नियुक्त है। शेष 11 पशु चिकित्सालयों में चिकित्सक के पद लम्बे समय से रिक्त होने के कारण व्यवस्था बेहाल स्थिति में है। जहां चिकित्सक नियुक्त है। वहां भी कम्पाउडर आदि के पद रिक्त होने से पशुपालकों को समुचित राहत नहीं मिल पाती है।यह है

पशुधन की तादाद

पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक लूणकरनसर उपखण्ड क्षेत्र में 2 लाख गोवंश, 17 हजार भैंस, 12 हजार 500 ऊंट, 1 लाख 30 हजार भेड़ व 1 लाख 19 हजार बकरी है। इतने पशुधन के अनुपात में चिकित्सा व्यवस्था ऊंट के मूंह में जीरे के समान है। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत भी पशु चिकित्सालयों में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं होने से पशुपालकों को महंगी दर पर बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ती है।

अस्पताल भवन भी जर्जर

कहने को तो महाजन पशु चिकित्सालय प्रथम श्रेणी का है लेकिन क्रमोन्नति के बाद यहां सुविधाएं बढऩे के बजाय घटी है। अस्पताल भवन जहां जर्जर अवस्था में है। वहीं कर्मचारियों के आवासीय क्वार्टर भी खण्डहर में तब्दील हो चुके है। यही हालात जैतपुर अस्पताल के है। जैतपुर में तो वर्षों से सारी जिम्मेदारी एक कम्पाउडर के भरोसे ही है। शेरपुरा व अन्य कई जगह अस्पताल भवन भी अभी तक नहीं बन पाए हैं।

इनका कहना है

उपखण्ड क्षेत्र के पशु चिकित्सालयों में स्टाफ कम है। 15 में से सिर्फ चार जगह की चिकित्सक नियुक्त है। नई भर्ती होने पर ही क्षेत्र को पशु चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।

डॉ. कुलदीप चौधरी, नोडल पशु चिकित्सा अधिकारी, लूणकरणसर।

यह सरकार नए उपकेन्द्रों व अस्पतालों की घोषणा तो कर रही है लेकिन व्यवस्था कहीं नहीं है। जबकि पहले व्यवस्था सुदृढ़ करनी चाहिए। राजस्थान में सबसे अधिक पशुधन लूणकरनसर विधानसभा क्षेत्र में है। जबकि यहां पशु चिकित्सा के नाम पर कुछ भी नहीं है। गांवों में सरकारी सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वेटरनरी यूनिवर्सिटी बीकानेर में होने के बावजूद जिले में इसका लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा।

सुमित गोदारा, विधायक लूणकरनसर।

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