आंखों में धुंधलाते सपने, अटक रहे ऑपरेशन

सरकार के निर्देश के बाद शुरू होगी इलेक्टिव सर्जरी

By: Jaiprakash

Updated: 22 Jun 2020, 07:59 AM IST

जयप्रकाश गहलोत


केस एक :- नाम कन्हैयालाल। उम्र ५३ साल। आंख में मोतियाबिंद है। पानी गिरता है। कई बार आंख लाल हो जाती है। आंख का ऑपरेशन कराना था लेकिन कोरोना के कारण नहीं करवा पा रहे हैं। बताते हैं आंखों में हाथ लगने से कोरोना वायरस संक्रमित कर देता है। इसलिए डर लग रहा है। आंख का ऑपरेशन नहीं होने से पहले से कम दिखाई देने लगा है।


केस दो :- नाम लक्ष्मी देवी। मधुमेह से पीडि़त, उम्र ४८ साल। आंख में मोतियाबिंद। चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी। कोरोना के कारण ऑपरेशन करवा नहीं पा रही हूं। आंखों से पहले से ज्यादा धुंधलापन दिख रहा है। इतना ही नहीं आंख में सूजन रहती है। आंख में खुजली भी बहुत आती है।


बीकानेर। कोरोना से बिगड़े हालात और लॉकडाउन ने सारी व्यवस्था को चौपट कर दिया है। कोरोना काल में जिन लोगों ने जल्द ही आंखों से चमचमाती दुनिया को फिर से देखने के सपने संजो रखे थे, उनके सपने अब तक केवल सपने ही बने हुए हैं। पिछले तीन महीने से संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के नेत्र चिकित्सालय में इलेक्टिव (रुटीन) सर्जरी शुरू नहीं की गई है, जिससे सैकड़ों लोग अपनी आंखों का ऑपरेशन कराने का इंतजार कर रहे हैं। मोतियांबिंद, कालापानी और कई तरह की आंखों की बीमारियों के मरीजों को ऑपरेशन कराने की कतार में हैं।

अभी केवल यह ऑपरेशन
हाई हॉस्पीटल में अभी केवल इमरजेंसी और चोटग्रस्त वाले लोगों के ही ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अस्पताल के एक कार्मिक ने बताया कि कोरोना रिपोर्ट होने के बाद से ऐसे ऑपरेशन किए जा रहे जो बेहद जरूरी है। ऐसे ऑपरेशन नहीं होने से मरीज की आंखे की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। इनमें पूरी तरह से पक चुका मोतियाबिंद, कोला मोतिया, आंखों में चोट आदि के ऑपरेशन किए जा रहे हैं।

पहले हर दिन 20 से 25, अब केवल एक या दो
जनवरी से पहले हर दिन २५ से ३० मरीजों के आंखों के ऑपरेशन किए जा रहे थे। जनवरी से फरवरी तक १२ से १५ ऑपरेशन किए जा रहे थे। मार्च के बाद ऑपरेशन कर गति बिल्कुल धीमी पड़ गई। वर्तमान हालात यह है कि हर दिन एक या दो ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं।

कोरोना के डर से नहीं आ रहे अस्पताल
कोरोना काल शुरू होने से मरीज भी अस्पताल आने से कतराने लगे हैं। सरकारी अस्पताल में मरीज की कोविड जांच अनिवार्य है। ऐसे में ऑपरेशन करने से कोविड जांच नहीं होने पर ऑपरेशन नहीं किया जाता। इस कारण डर से भी मरीज अस्पताल नहीं आ रहे हैं।

सैकड़ों हैं वेटिंग में
आंखों का ऑपरेशन कराने वालों की हर दिन वेटिंग लिस्ट बढ़ रही है। अस्पताल में केवल इमरजेंसी ऑपरेशन किया जा रहे हैं। शेष मरीजों को कोविड सामान्य होने पर ऑपरेशन की सलाह दी जा रही है। नतीजन पिछले तीन महीने करीब ३०० से ४०० लोग ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट में है।


अक्टूबर 907
नवंबर 897
दिसंबर 783
जनवरी 342
फरवरी 487
मार्च 267
अप्रेल 37
मई 47
जून 32

इनका कहना है...
केवल चोटग्रस्त और इमरजेंसी ऑपरेशन किए जा रह हैं। इलेक्टिव सर्जरी बंद है। ऑपरेशन भी कोविड जांच कराने के बाद कर रहे हैं। अभी इमरजेंसी ऑपरेशन ही करने के आदेश है।
डॉ. जयश्री मुरली मनोहर, वरिष्ठ चिकित्सक नेत्र रोग विभाग पीबीएम अस्पताल

पीबीएम में इलेक्टिव सर्जरी (रुटीन) शुरू करने के संबंध में सरकार से कोई दिशा-निर्देश मिले नहीं है। इस संंबंध में निर्देश मिलने पर इलेक्टिव सर्जरी भी शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल इमजरेंसी के सभी ऑपरेशन हो रहे हैं।
डॉ. शैतानसिंह राठौड़, प्राचार्य एसपी मेडिकल कॉलेज

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