करीब तीन लाख विद्यार्थी बिना विषय व्याख्याताओं के पढ़ाई करने को विवश

करीब तीन लाख विद्यार्थी बिना विषय व्याख्याताओं के पढ़ाई करने को विवश

By: Atul Acharya

Published: 12 Jul 2021, 06:47 PM IST

-चंद्रप्रकाश ओझा

बीकानेर. शिक्षा विभाग की 3 हजार 500 उच्च माध्यमिक स्कूलों के करीब 2 लाख 80 हजार विद्यार्थी सरकारी उदासीनता के कारण अनिवार्य हिंदी व अंग्रेजी विषय को बिना व्याख्याताओं के पढऩे को मजबूर है। हालांकि वैसे तो राज्य की 12 हजार 500 से भी अधिक उच्च माध्यमिक स्कूलों मेंअनिवार्य विषय हिंदी और अंग्रेजी के व्याख्याता नहीं है लेकिन सरकार ने जो नियम बना रखे है वो खुद उसकी पालना नहीं कर रही है जिसके कारण करीब तीन लाख विद्यार्थी इन विषयों को या तो अपने स्तर पर पढ़कर बोर्ड परीक्षाओं का सामना कर रहे है या फिर योग्य व्याख्याता नही होने से दूसरे शिक्षकों से इन विषयों को पढऩे को मजबूर हो रहे है। सरकार पहले तो सभी उच्च माध्यमिक स्कूलों में तीन विषय व्याख्याताओं तथा दो हिंदी तथा अंग्रेजी अनिवार्य विषयों को मिलाकर कुल 5 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत करती थी जिससे उच्च माध्यमिक स्कूलों में सभी 5 विषयों के व्याख्याता विद्यार्थियों को अपने अपने विषय का अध्ययन कराते थे। लेकिन बाद में बचत के नाम पर सरकार ने अनिवार्य विषय अंग्रेजी तथा हिंदी के व्याख्याताओं के पद देने बंद कर दिए तथा केवल एच्छिक तीन विषयों के पद ही स्कूलों में स्वीकृत करने शुरू कर दिए तथा इन अनिवार्य विषयों को संबंधित स्कूल के द्वितीय श्रेणी अध्यापकों से पढ़ाने के आदेश जारी कर दिए। तब से लेकर अब तक राज्य की सभी उच्च माध्यमिक स्कूलों में अनिवार्य विषयों के व्याख्याताओं के पद नही दिए जा रहे है।2015 में सरकार ने शिक्षा विभाग में स्टाफिंग पैटर्न लागू किया जिसमें प्रावधान किया गया कि जिन उच्च माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 11 व 12 में 80 से ज्यादा विद्यार्थी होंगे वहां अनिवार्य विषय हिंदी तथा अंग्रेजी के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत किए जाएंगे।
पद स्वीकृत नहीं
कहने को तो सरकार ने ये प्रावधान कर दिया लेकिन आज तक इस प्रावधान के अनुसार ऐसी स्कूलों में अनिवार्य विषय हिंदी तथा अंग्रेजी व्याख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं किए। पिछले 6 वर्षों में सरकारी स्कूलों में 5 लाख विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है लेकिन हर दो वर्ष में स्टाफिं ग पैटर्न की समीक्षा करने का प्रावधान करने वाले शिक्षा विभाग में पिछले 6 साल से स्टाफिं ग पैटर्न के अनुसार पद स्वीकृत नही किए गए है।सरकार खुद अपने बनाए नियमों के अनुसार अब ऐसी स्कूलों में अनिवार्य हिंदी तथा अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत करने से पीछे हट रही है जिन स्कूलों में 80 से ज्यादा विद्यार्थी है।
पद स्वीकृत करने
की मांग
राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा तथा राजस्थान एलिमेंट्री सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन पिछले 6 साल से सरकार तथा विभाग से अपने ही प्रावधानानुसार ऐसी उच्च माध्यमिक स्कूलों में अनिवार्य हिंदी तथा अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत करने की मांग कर रहे है जिनमें उच्च माध्यमिक कक्षाओं में 80 से ज्यादा विद्यार्थी है। इन संगठनों की तो पहले की तरह सभी उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अनिवार्य हिंदी तथा अंग्रेजी विषय के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत करने की मांग की जा रही है लेकिन सरकार अपने किए प्रावधानों के अनुसार भी उन 3500 स्कूलों में अनिवार्य विषयों के व्याख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं कर रही जिनमें इन कक्षाओं में 80 से ज्यादा विद्यार्थी पहले से ही है। हालांकि उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अनिवार्य विषयों के व्याख्याता नहीं होने से इन विषयों में विद्यार्थी पिछड़ते जा रहे है तथा परीक्षा परिणाम भी निरंतर कम हो रहे है। जबकि अंग्रेजी जैसे कठिन विषय में तो विद्यार्थियों को व्याख्याता नहीं होने से इस विषय को पढऩे में काफ ी परेशानी उठानी पड़ रही है।

इनका कहना है
&अनिवार्य विषय के व्याख्याता पद के लिए स्टाफिंग पैटर्न के बिंदु 6.2 के अनुसार कक्षा 11 व 12 में 80 से अधिक नामांकन वाली 3500 स्कूलों में तो अनिवार्य विषय के व्याख्याता पद मिले। सरकार एक तरफ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है वहीं दूसरी तरफ गरीब व ग्रामीण तबके के विद्यार्थियों को भाषा विषय पढ़ाने के लिए व्याख्याता पद ही स्वीकृत नहीं है।
- बसन्त कुमार जाणी,
प्रदेश प्रवक्ता राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा
&स्टाफिं ग पैटर्न को 2015 में लागू किया गयाए उसके बाद 6 वर्षों में सरकारी स्कूलों में 5 लाख विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। प्रति 2 वर्ष बाद समीक्षा की बात करने वाला विभाग 6 वर्षो में एक बार भी समीक्षा नहीं हुई।
मोहर सिंह सलावद प्रदेशाध्यक्ष,
राजस्थान एलिमेंट्री सेकेंडरी टीचर्स एसोसिएशन

Atul Acharya Reporting
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