मुख्यमंत्री के गृह जिले से होगा कर्मचारी आन्दोलन का आगाज

एकीकृत महासंघ का 21 मार्च से जन जागरण आन्दोलन
प्रदेशाध्यक्ष केसरी सिंह चांपावत ने की आर-पार की लड़ाई की घोषणा

By: Vimal

Published: 05 Mar 2021, 05:26 PM IST

बीकानेर. अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने प्रदेशभर के कर्मचारियों से जुड़ी 27 सूत्री मांगों को लेकर आन्दोलन की घोषणा कर दी है। गुरुवार को बीकानेर दौरे के दौरान प्रदेशाध्यक्ष केसरी सिंह चांपावत ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले जोधपुर से 21 मार्च से जन जागरण आन्दोलन की शुरूआत की जाएगी। इसके बाद संभाग स्तर पर जनजागरण आन्दोलन चलाया जाएगा। इसके बाद भी राज्य सरकार कर्मचारियों की मांगों पर गौर नहीं करती है तो जयपुर कूच कर आन्दोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की मांगों पर अनसुनी कर संवेदनहीन रवैया बनाए हुए है। अगस्त में एक माह में बात करने की बात कही, लेकिन छह माह बाद भी सरकार कर्मचारियों की मांगों पर बात करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हित में अगर आर-पार की लड़ाई की स्थिति बनती है तो एकीकृत महासंघ इसके लिए तैयार है। इस अवसर पर प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष भंवर पुरोहित, प्रदेश सचिव बजरंग कुमार सोनी, जिला सभा अध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा, आदराम चौधरी, महिपाल चौधरी सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

 

साढे तीन लाख संविदा-निविदा कार्मिक हो स्थाई
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेशभर के विभिन्न विभागों में करीब 3 . 5 लाख संविदा-निविदा कार्मिक वर्षो से कार्य कर रहे है। इनके नियमितिकरण को लेकर भी सरकार ढुलमुल रवैया बना हुए है। उन्होंने कहा कि संविदा-निविदा कार्मिकों का शोषण हो रहा है, नियमित नहीं होने से उनका भविष्य खराब हो रहा है। नीति नहीं बन रही है। प्रदेशाध्यक्ष ने प्रदेश में संविदा-निविदा भर्ती को बंद कर स्थाई भर्ती करने की बात कही।

 

पैसा और बुढापा दोनो सुरक्षित नहीं
नवीन पेंशन स्कीम के तहत नियुक्त हुए अथवा नियुक्त हो रहे कर्मचारियों का पैसा और बुढ़ापा दोनो सुरक्षित नहीं है। प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि एनपीएस में कटौती हो रहा पैसा प्राइवेट कम्पनियों में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में करीब साढे चार लाख एनपीएस कर्मचारी कार्यरत है, सरकार इनको लेकर कोई निर्णय नहीं ले रही है। उन्होंने पुरानी पेंशन स्कीम को पुन: लागू करने की बात कही।

 

ये रखी मांगे
एकीकृत महासंघ प्रदेशाध्यक्ष ने सभी मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए सचिवालय पैटर्न लागू करने, नर्सेज कार्मिकों को केन्द्र के समान पदनाम और वेतन भत्ते देने, राज्य कर्मचारियों को 9, 18, 27 के स्थान पर 8 , 16, 24, 32 के अंतराल पर चार एसीपी का लाभ देने, सभी पदोन्नति टाइम स्क्रीन के आधार पर करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग रखी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले कार्मिकों को विशेष ग्रामीण भत्ता एवं मनान किराए के भत्तों में वृद्धि करने, सभी विभागों के वर्कचार्ज कर्मचारियों का नवीनीकरण करते हुए उन्हें नियमित करते हुए सभी संवर्ग में पदोन्नति करने की मांग रखी। गैर वित्तीय मांगों में लैब टैक्निशियन, नर्सेज, रेडियोग्राफर, शीघ्र लिपिक आदि अन्य संवर्ग के पद नाम परिवर्तन कर जल्द निर्णय लेने सहित विभिन्न संवर्गो के कर्मचारियों से जुड़ी २७ सूत्री मांगे रखी।

 

कार्मिकों से किया संवाद
एकीकृत महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष ने गुरुवार को सर्किट हाउस में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और पदाधिकारियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने २७ सूची मांगे रखने के साथ 21 मार्च से शुरू होने वाले जन जागरण अभियान और आन्दोलन की रणनीति की जानकारी दी। इस दौरान कर्मचारी नेता कैलाश आचार्य, मनीष विधानी, राजकुमार व्यास, पवन भाटी, आरिफ, इदरीश अहमद, सुधीर, रमेश चन्द्र उपाध्याय, मुरलीदान चारण, कैलाश मेघवाल, गौरी शंकर देवड़ा, अजय पाल सिंह, कमल अनुरागी, हितेश अजमानी, मोहन पुरोहित, जसवीर बरनाला, सुरेन्द्र सिंह फौजी, धनराज आदि उपस्थित रहे।

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