‘दांतणिया दराऊ म्हारी गवरल...’

गणगौर पूजन : बालिकाओं ने चित्रित किए पारम्परिक मांडणे

By: Vimal

Published: 06 Apr 2021, 11:18 AM IST

बीकानेर. छारंडी के दिन से शुरू हुए बाला गणगौर पूजन में दांतणिया देने की रस्म शुरू हुई। सुबह गणगौर पूजन के बाद शाम को गवर पूजने वाली बालिकाओं ने घरों के नजदीक कुआ, बावड़ी, मंदिर, हवेली, बगेची आदि की दीवारों और चौकियों पर अबीर और विभिन्न रंगों की गुलाल से पारम्परिक मांडणे गणगौरी गीतों के गायन के बीच चित्रित किए।

गणगौर पूजने वाली बालिकाओं ने सामुहिक रूप से पारम्परिक मांडणों के साथ समसामयिक विषयों, घटनाओं आदि पर भी चित्र बनाए और गुलाल से रंग भरे। गणगौर पूजन उत्सव में शीतला अष्टमी से दांतणिया देने का आगाज होता है। वहीं घुड़ला घुमाने की रस्म भी रविवार से शुरू हुई।

मिट्टी से बने घुड़ले में मिट्टी भरकर उस पर जलता हुआ दीपक रखकर बालिकाएं घर-परिवार और मोहल्लों में स्थित घरों पर पहुंचती है और पारम्परिक गीत ‘म्हारो तेल बळै घी घाल, घुड़लो घुमेला जी घूमेला’ और ‘चांद चढ्यो गिगनार, किरत्यां ढळ रही है जी ढळ रही है’ का गायन करती है। घर, परिवार और मोहल्ले के सदस्य घुड़ले में नकद राशि डालते है।

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