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करोड़ो के ठेके फिर भी सफाई व्यवस्था से पार्षद असंतुष्ट और आमजन परेशान

नगर निगम- ऑटो टिपर व ट्रैक्टर ट्रॉलियो से कचरे का परिवहन फिर भी सडक़ों पर गंदगी

 

बीकानेर

Published: August 14, 2021 03:32:17 pm

बीकानेर. शहर में ऑटो टिपर व ट्रैक्टर ट्रॉलियों से कचरे का परिवहन होने के बाद भी सडक़ों पर जगह-जगह कचरे की ढेरियां नजर आ रही है। कचरे पर बेसहारा पशु और कुत्ते मंडरा रहे है। गंदगी और बदबू से लोग परेशान है। निगम सफाई व्यवस्था पर करोड़ो रुपए खर्च कर रहा है। ऑटो टिपर और ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ निगम के संसाधन भी सफाई कार्य में झोंक रखे है, फिर भी सफाई व्यवस्था से न पार्षद संतुष्ट नजर आ रहे है और ना ही आमजन। स्वच्छ बीकाणा की सोच केवल दीवारों पर श्लोगन के रूप में नजर आ रही है। 33 करोड़ रुपए की राशि से जहां ऑटो टिपर से घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू की गई है, वहीं प्रतिदिन एक ट्रैक्टर ट्रॉली पर 2500 से 2800 रुपए तक खर्च हो रहे है।

करोड़ो के ठेके फिर भी सफाई व्यवस्था से पार्षद असंतुष्ट और आमजन परेशान
करोड़ो के ठेके फिर भी सफाई व्यवस्था से पार्षद असंतुष्ट और आमजन परेशान

न ऑटो टिपर की जानकारी, ना नियमित पहुंच रहे ट्रैक्टर

शहर में निगम की नई कचरा संग्रहण की व्यवस्था से पार्षद भी असंमजस की स्थिति में है। कई पार्षद ऑटो टिपर की व्यवस्था पर सवाल उठा चुके है। वहीं ट्रैक्टर ट्रॉलियों की संख्या कम करने से भी खुश नहीं है। पार्षद जावेद पडि़हार के अनुसार पार्षदों को भी जानकारी नहीं है, उनके वार्ड में कितनी ऑटो टिपर पहुंच रही है। कंपनी के सुपरवाईजर की जानकारी भी पार्षदों को नहीं है। टै्रक्टर ट्रॉलिया ट्रॉलियों की संख्या कम होने से नियमित रूप से हर वार्ड में नहीं पहुंच रहे है। शहर के बाहरी क्षेत्रों के वार्डो का क्षेत्रफल अधिक है, संसाधन कम है। ऑटो टिपर संचालन से संबंधित नियम भी पार्षदों को अब तक उपलब्ध नहीं करवाए गए है। बिना निगम नियंत्रण के ऑटो टिपर संचालित हो रहे है।

हर गली तक नहीं पहुंच रही ऑटो टिपर

ऑटो टिपर की नई व्यवस्था से आमजन भी कम परेशान नहीं है। लोगों का कहना है कि वर्तमान में हर गली तक ऑटो टिपर की पहुंच नहीं है। समय भी फिक्स नहीं है। पहले ऑटो टिपर धीमी गति में चलती थी, लोग आसानी से कचरा डाल देते थे अब तेज गति से गाडिया चल रही है। पहले पुरुष हैल्पर होने से कचरा ऑटो टिपर में डालने में सुविधा थी अब नहीं। लोगों के अनुसार निगम ऑटो टिपर व्यवस्था के दौरान लेबर स्थानीय होने से वे हर गली-मोहल्ले से वाकिफ थे, वर्तमान व्यवस्था में लेबर बाहर से है व शहर की गली-मोहल्लों की जानकारी नहीं है।

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