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बीकानेर

पाइपलाइन से घरों तक गैस: ढाई साल में दो कदम भी नहीं बढ़े

पहले राजनीतिक बाधा…केन्द्र सरकार ने 2022 में प्रोजेक्ट स्वीकृत किया, प्रदेश में दूसरे दल की सरकार होने से अटका। अब सरकारी निष्क्रियता… छह महीने से जिला प्रशासन, नगर निगम, रीको में एनओसी की फाइल अटकी। भविष्य की उम्मीद… उद्योगों को पाइप से गैस मिलने से सेरेमिक इंडस्ट्री खड़ी होगी, घरों में रसोई तक पहुंचेगी एलपीजी।

बीकानेरJun 27, 2024 / 05:35 pm

dinesh kumar swami

ढाई साल पहले केन्द्र सरकार ने बीकानेर में गैस पाइप लाइन का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया। तब गृहणियों को लगा कि वह दिन दूर नहीं, जब रसोई में सिलेंडर का झंझट समाप्त होगा। उद्योग जगत में पाइप से ईंधन के रूप में गैस मिलने से सिरेमिक इंडस्ट्री खड़ी होने की आस जगी। परन्तु आज तक इस प्रोजेक्ट में प्रगति को देखें, तो नौ दिन में चले अढ़ाई कोस की कहावत भी फीकी पड़ जाए।
साल 2022 में केन्द्र सरकार से प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद शुरुआती दो साल तो कम्पनी ने खुद ही दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसकी एक वजह केन्द्र में भाजपा की सरकार और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार का होना भी रहा। राज्य सरकार से जुड़े विभाग आवश्यक कार्रवाई में सहयोग नहीं कर रहे थे।
अब दिसम्बर 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद हलचल शुरू हुई। कम्पनी ने प्लांट के लिए भूखण्ड खरीदा और इस पर प्लांट लगाने के लिए एक फर्म से अनुबंध भी कर लिया। परन्तु इसके बाद जिला प्रशासन, नगर निगम और रीको ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइल अटका दी।

जानिए प्रोजेक्ट के बारे में…

बीकानेर को गैसपाइप लाइन से रसोई गैस और उद्योगों को ईंधन गैस उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड ने हिंदुस्तान नेचुरल गैस कम्पनी के साथ 25 साल का अनुबंध किया है। कम्पनी को लिक्विड रूप में पेट्रोलियम गैस को यहां प्लांट में भंडारित कर उसे गैस में परिवर्तित कर पाइप लाइन से गैस की आपूर्ति घरों, उद्योगों और पेट्रोल पम्पों को करनी है।

अब तक यह प्रगति

कम्पनी ने करणी इंडस्ट्रियल एरिया में प्लांट लगाने के लिए भूखण्ड खरीद लिया है। इसमें एलएनजी टर्मिनल स्थापित किया जाएगा। यहां पर लिक्विड प्रोफाइल में आने वाली पेट्रोलियम गैस को एलएनपी, पीएनजी और सीएनजी में बदलकर पाइप से आपूर्ति की जाएगी।

एनओसी पर अफसरों का अड़ंगा…

एलएनजी टर्मिनल और पाइप लाइन के लिए एनओसी की फाइल जिला प्रशासन के पास लम्बे समय से पड़ी है। पत्रिका ने पड़ताल की, तो पता चला कि एडीएम सिटी के यहां से छह विभागों से रिपोर्ट मांगी गई। अभी तक चार विभागों ने सकारात्मक रिपोर्ट दी है। परन्तु नगर निगम से फायर एनओसी के लिए दो महीने से ज्यादा समय से फाइल अटका रखी है। इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा नकारात्मक रुख रीको का है। तीन महीने से अनुमति के लिए कम्पनी के प्रतिनिधि रीको के अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं।

छह सीएनजी पम्प शुरू

कम्पनी प्रतिनिधि के अनुसार घरों और उद्योगों को पाइप लाइन से गैस की आपूर्ति के लिए प्रशासन से कुछ स्वीकृतियां मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कमर्शियल पार्ट में छह गैस पम्प चालू कर दिए हैं। इन्हें जयपुर से टेंकर के माध्यम से गैस की आपूर्ति कर रहे हैं। यह पम्प जयपुर मार्ग, खारा के पास, बदरासर के पास, जोधपुर मार्ग, जैसलमेर रोड और श्रीडूंगरगढ़ में हैं। बीकानेर में प्लांट शुरू होने पर यहां से गैस की आपूर्ति करेंगे।

प्रोजेक्ट से यह होगा फायदा

1. रसोई तक गैस: फिलहाल बीकानेर के लोग रसोई गैस सिलेण्डर से ले रहे हैं। इसमें करीब 70 रुपए प्रति किलो के हिसाब से घर तक सिलेंडर पहुंच रहा है। पाइप लाइन से गैस की आपूर्ति करीब 40 रुपए प्रति किलो के हिसाब से होगी। यानी करीब 400 रुपए का फायदा प्रति सिलेंडर होगा।
2. उद्योगों को ईंधन: बायलर वाले उद्योगों में ईंधन के रूप में लकड़ी, डीजल और व्यावसायिक गैस सिलेण्डर का उपयोग कर रहे हैं। सिरेमिक इंडस्ट्री तो सीधे तौर पर गैस के बायलर से ही चलती है। गैस पाइप लाइन से पहुंचेगी, तो उन्हें सस्ता और फैक्ट्री के पास ईंधन उपलब्ध होगा। इससे ईंधन पर लागत करीब पचास प्रतिशत तक घट जाएगी।
3. पर्यावरण अनुकूल: सीएनजी से चलने वाले वाहनों की संख्या बढ़ेगी। खासकर टैक्सी में इसका उपयोग ज्यादा होगा। इससे पर्यावरण को फायदा होगा। नेचुरल गैस हल्की और पर्यावरण के अनुकूल होने से प्रदूषण में कमी आएगी।

सभी से समन्वय कर प्रयासरत

गैस पाइप लाइन का प्रोजेक्ट काफी समय से लम्बित है। उद्योगों को इससे बड़ा फायदा होगा। इसके लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर एनओसी आदि के लिए प्रयास कर रहे हैं। कम्पनी को भी जल्दी से जल्दी काम आगे बढ़ाने के लिए कहा है।- मंजू नैण गोदारा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र बीकानेर

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