विवि-कॉलेजों में चार साल हो सकती है ग्रेजुएशन कोर्स की अवधि

विवि-कॉलेजों में चार साल हो सकती है ग्रेजुएशन कोर्स की अवधि

Nikhil Swami | Updated: 08 Aug 2019, 12:11:33 PM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

graduation course duration four years in college विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में छात्रों के ग्रेजुएशन कोर्स की अवधि चार साल होने की संभावना है। इससे छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश मिल सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सभी विषयों में चार साल के ग्रेजुएट कोर्स से जुड़ी एक सिफ ारिश पर विचार कर रहा है।

बीकानेर. विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में छात्रों के ग्रेजुएशन कोर्स की अवधि चार साल होने की संभावना है। इससे छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश मिल सकेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सभी विषयों में चार साल के ग्रेजुएट कोर्स से जुड़ी एक सिफ ारिश पर विचार कर रहा है।

 


इस सिफ ारिश में यह भी कहा गया है कि पीएचडी की डिग्री पाने के लिए शोधार्थी को किसी जर्नल में शोध पत्र प्रकाशित करवाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। अभी भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के दूसरे संस्थानों में अमूमन तीन साल की ग्रेजुएशन और दो साल की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री होती है।

 

इसके बाद ही किसी छात्र या छात्रा को पीएचडी में प्रवेश मिल सकता है। यूजीसी से यह सिफ ारिश भारतीय विज्ञान संस्थान (आइएससी) बेंगलूरु के पूर्व निदेशक पी. बलराम की अगुवाई वाली विशेषज्ञ समिति ने की है। समिति ने शोधकार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ये सिफ ारिशें की हैं।

 


यूजीसी के 2016 में जारी निर्देशों के मुताबिक हर पीएचडी विद्यार्थी को एक शोध पत्र किसी जर्नल में प्रकाशित करवाना अनिवार्य था। सूत्रों के अनुसार ताजा सिफ ारिशों के मुताबिक इस निर्देश की समीक्षा की जा रही है। इन सिफ ारिशों के हिसाब से अब पीएचडी के परीक्षकों को ज्यादा जवाबदेह बनाया जा सकता है और उनका नाम शोध पत्र पर दर्ज किया जा सकता है, अब तक ऐसा कोई नियम नही था।

 


विकसित देशों में है व्यवस्था
समिति के विशेषज्ञ बलराम ने बताया कि विकसित देशों में अमूमन चार साल के ही ग्रेजुएट कोर्स होते हैं और इस तरह पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों का एक साल बच जाता है। वैसे भारत में इस समय बीटेक, बैचलर ऑफ टेक्लोलॉजी या बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग जैसे चार साल के कोर्स उनके बाद छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकते हैं।

 

बलराम ने यह भी कहा कि चौथे साल के पाठ्यक्रम में शोध को केन्द्र में रखा जा सकता है। इस दौरान विश्वविद्यालयों को तीन वर्षीय परंपरागत ग्रेजुएट कोर्स चलाने की छूट भी मिलेगी। हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय में 2013 में चार वर्षीय ग्रेजुएट कोर्स शुरू किए गए थे, लेकिन तत्कालीन केन्द्र सरकार ने 2014 में इस व्यवस्था को रद््द कर दिया था।

 


होगा फायदा
यूजीसी समिति की सिफ ारिश मानकर चार साल को ग्रेजुएशन कोर्स लागू करता है, तो पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को फायदा होगा और एक साल बच जाएगा।
डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली, कॅरिअर काउंसलर, बीकानेर

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