scriptGuest Writer Union Minister Arjun Ram Meghwal | 'अटल' दृष्टिकोण, नेतृत्व और मार्गदर्शन से मना रहे हैं सुशासन दिवस | Patrika News

'अटल' दृष्टिकोण, नेतृत्व और मार्गदर्शन से मना रहे हैं सुशासन दिवस

-गेस्ट राइटर

बीकानेर

Published: December 24, 2021 09:43:23 pm

- अर्जुन राम मेघवाल, केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार

सुशासन ऐसी धरोहर है जिसे भारत की प्राचीन संस्कृति और लोकाचार से आत्मसात किया गया है। स्वतंत्रता के बाद, सुशासन का मुद्दा शासन संबंधी सुधारों का केन्द्र बिन्दु रहा। परन्तु ऐसा केवल बातचीत के स्तर पर ही होता रहा। संविधान सभा के वाद-विवाद में, योजना आयोग जैसी संस्थाओं में, विधिवत रूप से तैयार की गई नीति परिचर्चा केवल कागजों में ही सिमटी रही। इन्हें कार्यान्वित करने के कारगर उपाय नहीं किए जा सके। अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व और राजनीतिक कौशल के साथ, हमारा देश ऐतिहासिक सुशासन प्रयासों का साक्षी बना। लोक सभा सदस्य के रूप में दस कार्यकाल और राज्य सभा सदस्य के रूप में दो कार्यकाल पूरे करने वाले वाजपेयी ने सांसद के रूप में अपनी कार्यावधि के दौरान सुशासन की बारीकियों पर प्रकाश डाला।
'अटल' दृष्टिकोण, नेतृत्व और मार्गदर्शन से मना रहे हैं सुशासन दिवस
'अटल' दृष्टिकोण, नेतृत्व और मार्गदर्शन से मना रहे हैं सुशासन दिवस
नेता, प्रतिपक्ष के रूप में उनकी तर्कसंगत दलीलों और रचनात्मक समालोचनाओं में कल्यााण-केन्द्रित सुशासन तंत्र के लिए प्रेरित करने का बल था। प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान, उनके द्वारा किसानों के जीवन में सुधार लाने के लिए प्रारंभ किए गए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, नदियों को आपस में जोडऩे तथा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम की अवधारणा तैयार करना, सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से शैक्षिक सुधार, पृथक जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन आदि ऐसे कुछ उपाय हैं, जिन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग को प्रभावित किया। अद्र्ध-न्यायिक केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग की स्थापना की गई और विद्युत क्षेत्र में वर्षों पुराने विद्युत अधिनियम में संशोधन किया गया ताकि विनियामक रूपरेखा में सुधार किया जा सके।
मई, 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों के कारण भारत का नाम परमाणु शक्ति संपन्न देशों में शामिल हो गया। कश्मीर की जटिल समस्या का समाधान करने के लिए वाजपेयी के मानवता, शांति और कश्मीरी लोगों के आत्मसम्मान को कायम रखने के लिए प्रसिद्ध सिद्धांत 'इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियतÓ में उनकी बौद्धिकता प्रतिबिंबित होती है। विदेश नीति से संबंधित उनके ये विचार कि 'आप मित्र बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं', सभी मंचों पर भागीदारी का निरन्तर स्रोत रहे हैं।
मां भारती की रक्षा में अपने प्राणों की आहूति देने वाले हमारे वीर सैनिकों के पार्थिव शव उनके परिवारजनों को सौंपने का निर्णय भी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की ओर से किया गया। अटल जी, आपसी सामंजस्य में विश्वास रखने वाले यथार्थवादी राजनेता थे और यह तथ्य इस बात से प्रकट होता है कि वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में से शांतिपूर्ण रूप से क्रमश: छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड तीन नए राज्यों की स्थापना की गई। यह सरकार को जनता के निकट ले जाकर सुशासन स्थापित करने का एक सुविचारित प्रयास था।
वे डॉ. बीआर आम्बेडकर के विचारों की भविष्योन्मुखी अंतर्दृष्टि से अत्यंत प्रभावित थे। अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के प्रयास से ही वीपी सिंह सरकार ने भाजपा के समर्थन से डॉ. आम्बेडकर को 31 मार्च 1990 को भारत रत्न से सम्मानित किया। वाजपेयी की इच्छानुसार दिल्ली स्थित 26 अलीपुर रोड, जहां आम्बेेडकर ने अंतिम सांस ली, उस स्थान को संग्राहलय के रूप में विकसित करने का प्रयास हुआ। इसे अब 13 अप्रेल 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया गया है।
अटल बिहारी वाजपेयी ने 21वीं शताब्दी के प्रारंभ होते ही कई पहलों के साथ सुशासन अभियान को शुरू किया था। अब इस अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए भारत (न्यू इंडिया) को तेज गति के साथ आगे बढ़ा रहे है। जहां किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ा है, वहीं कृषि से संबंधित कार्यकलापों का निगमीकरण हुआ है। भारतमाला, सागरमाला, राष्ट्रीय परिसंपत्ति, नेशनल ऐसेट मोनेटाइनेशन पाइपलाइन, कृषि अवसंरचना निधि और पीएमजीएसवाई के विस्तार से निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिला है।
'सरकार की न्यूनतम भूमिका और सुशासन की अधिकतम मात्राÓ (मिनिमम गवन्र्मेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस) नामक इस मंत्र से नागरिकों के बीच जीवन की सहज अनुभूति हुई है। समाज, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय विकास श्रृंखलाओं से जुड़ा हुआ हैं। इसी प्रकार सुशासन संबंधी सुधारों को कार्यान्वित करने के लिए समानता होना आवश्यक है। मोदी सरकार की ओर से समयबद्ध ढंग से योजनाओं को लागू करना वस्तुत: एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। जिसके फलस्वरूप अब तक बहुत-सी ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हुई हैं।
अच्छे सुशासन से अभिप्रेत, सुसंस्थापित संवैधानिक कार्ययोजना के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में कदम उठाते हुए उनकी अपरिहार्य रूप में सेवा करने से है। अटल जी के दृष्टिकोण, नेतृत्व, मार्गदर्शन और उनकी अमूल्य अंतर्दृष्टि वर्तमान और भावी पीढिय़ों के लिए हमेशा ही प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। चूंकि, राष्ट्र आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान सुशासन दिवस मना रहा है। एेसे में आवश्यक है कि हम न्यू इंडिया का निर्माण करने के लिए 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयासÓ की भावना से काम करने के लिए आत्मविश्लेषण करते हुए शपथ लें।

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