उष्ट्र प्रजाति के विकास और संरक्षण के लिए विश्व में उत्पादकता को बढ़ाएं

उष्ट्र प्रजाति के विकास और संरक्षण के लिए विश्व में उत्पादकता को बढ़ाएं

By: Atul Acharya

Published: 23 Jun 2021, 08:21 PM IST

बीकानेर. विश्व ऊंट दिवस के उपलक्ष्य पर राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र द्वारा कैमल क्लाईमेट चेंज एण्ड ग्लोबलाईजेशन चैलेंजेज फॉर साइंस विषयक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र एवं उप महानिदेशक पशु विज्ञान डॉ. बीएन त्रिपाठी ने केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू को बधाई देते हुए ऊंट प्रजाति के संरक्षण, नूतन आयामों में इसके विकास तथा इनमें नवाचार लाने की दिशा में इस वेबिनार को महत्वपूर्ण बताया।


एनआरसीसी द्वारा वर्चुअल रूप में आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता फ्रांस के आइसोकार्ड एवं एफएओ सलाहकार डॉ. बर्नाड फाय ने वैश्विक स्तर पर ऊंटों की उपलब्ध आबादी, ऊंट के दूध एवं मांस उत्पादन तथा वर्तमान समय में वनस्पतियों में आई कमी आदि का उल्लेख किया। डॉ. फाय ने ऊंटों से प्राप्त उत्पादों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि उष्ट्र प्रजाति के विकास एवं संरक्षण के लिए विश्व में इसकी उत्पादकता को बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. एके गहलोत ने इस बात पर प्रसन्नता भी व्यक्त करते हुए कहा कि सेना-पुलिस द्वारा निगरानी कार्यों, पर्यटन आदि क्षेत्रों के नए आयामों के रूप में ऊंटों का बढ़ता उपयोग आज भी इसकी प्रासंगिकता को सिद्ध करता है। सह अध्यक्ष के रूप में डॉ. एके त्यागी ने कहा कि ऊंटनी के दूध में विशेष वसा अम्ल पाए जाते हैं जिन्हें सामान्य आहार पद्धति पर रखते हुए जांचा जाना चाहिए ताकि दूध की गुणवत्ता में और अधिक सुधार लाया जा सके।

केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने बदलते परिवेश में ऊंटों के विविध उपयोग, घटती संख्या एवं लागत तथा भावी संभावनाओं पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पर्यटन व्यवसाय में नर ऊंटों के उपयोग की अधिकाधिक संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए। वेबिनार के आयोजक सचिव केन्द्र के डॉ. सुमन्त व्यास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Atul Acharya Reporting
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