बीकानेर : कभी चलाते थे ब्यूरोक्रेसी, अब छुट्टियों में बीत रहा समय

बीकानेर : कभी चलाते थे ब्यूरोक्रेसी, अब छुट्टियों में बीत रहा समय

Jitendra Goswami | Updated: 04 Jun 2019, 02:45:30 PM (IST) Bikaner, Bikaner, Rajasthan, India

सिंचित क्षेत्र विकास विभाग: छुट्टियों में बीत रहा आइएएस तन्मय कुमार का वक्त । विभाग में आयुक्त पद पर हैं कार्यरत

जयभगवान उपाध्याय

बीकानेर. कभी प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी चलाने वाले आइएएस अधिकारी तन्मय कुमार को गुमनामी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। वे पांच माह से सिंचित क्षेत्र विकास विभाग के आयुक्त पद पर कार्यरत हैं, लेकिन उनका अधिकतर समय छुट्टियों और न्यायालय की तारीख-पेशियों में ही निकल रहा है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बदलते ही कांग्रेस सरकार ने मोर्चा संभाला ही था कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा के करीबी माने जाने वाले 40 आइएएस अधिकारियों को इधर-उधर करना शुरू कर दिया।

 

इन 40 अधिकारियों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री के खास प्रमुख शासन सचिव तन्मय कुमार का नाम भी था। कांग्रेस सरकार ने आइएएस तन्मय कुमार को जहां लगा रखा है, उस पद का फिलहाल कोई वजूद नहीं है। वे अपनी कार्य क्षमता का प्रदर्शन भी नहीं कर पा रहे हैं। सिंचित क्षेत्र विकास में फिलहाल कच्चे खाळों को पक्के खाळों में बदलने का काम रह गया है।

 

देनदारी भी नहीं  चुक रही

 

सिंचित क्षेत्र विकास पर ठेकेदारों के करोड़ों रुपए की देनदारी है। पिछले वर्ष हुए पक्के खाळों के निर्माण में खर्च राशि का अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों ने कई बार राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया, लेकिन सरकार ने अभी तक एलओसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) जारी नहीं किया है। बकाया भुगतान चुकाने की स्वीकृति नहीं मिलने से ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा है। वे विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

 

बजट पर एक नजर

 

सिंचित क्षेत्र विकास विभाग में पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में बजट की कोई कमी नहीं थी। एक समय विभाग को प्रतिवर्ष 700-800 करोड़ रुपए का बजट मिलता था, लेकिन वर्तमान में बजट घटकर 70-80 करोड़ रुपए रह गया है। इस राशि में न तो कच्चे खाळे पक्के हो पा रहे हैं और ना ही ठेकेदारों का बकाया भुगतान चुकाया जा रहा है। सूत्रों के  अनुसार गंग फेज प्रथम के लिए सरकार ने महज 8.40 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। वहीं गंग द्वितीय फेज के लिए 37.20 करोड़ तथा भाखड़ा के लिए 8.75 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है, जबकि अकेले भाखड़ा में
खाळा निर्माण की एवज में ठेकेदारों के करीब 26 करोड़ रुपए चुकाने शेष हैं।

 

अतीत के झरोखे से

 

सिंचित क्षेत्र विकास (सीएडी) ने वर्ष 1974 में काम करना शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान राज्य के उत्तर पश्चिम भाग में निर्माणाधीन इन्दिरा नहर परियोजना में हिमाचल प्रदेश, पंजाब की व्यास व सतलुज नदी के राजस्थान को आवंटित पानी का अधिकतम उपयोग करना था। सीएडी ने काश्तकार के खेत तक पक्के खाळे व स्वच्छ जल के लिए डिग्गियों का निर्माण, विभिन्न चक व गांवों को जोडऩे के लिए सड़कों, खेतों की सुरक्षा के लिए नवीकरण, चरागाह विकास, मछली उत्पादन सरीखे कार्य किए हैं।

 

19 वीं सदी के शुरू में बीकानेर राज्य के तत्कालीन प्रशासक गंगा सिंह ने सीमित संसाधन से श्रीगंगानगर जिले के बड़े भूभाग के लिए पंजाब से पानी लेकर बीकानेर कैनाल (जिसे गंग कैनाल का नाम दिया गया) का निर्माण करवाया। इसी से प्रेरित होकर पूर्व महाराजा गंगासिंह ने अपने राज्य के तत्कालीन मुख्य अभियंता (सिंचाई) कंवरसेन के माध्यम से थार रेगिस्तान के इस भूभाग के लिए राजस्थान नहर (वर्तमान में इन्दिरा गांधी नहर) का प्रारंभिक कार्य करवाना शुरू किया था। इसका उद्गम व्यास व सतलुज नदी के संधि स्थल हरिके बैरोज (फिरोजपुर, पंजाब) से प्रस्तावित कराया गया।

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