नौ दिनों तक मंदिर से बाहर रहते है ठाकुरजी, रूठी लक्ष्मी को मनाएंगे

145 साल पहले भगवान जगन्नाथ मंदिर की हुई थी स्थापना

 

By: Vimal

Published: 12 Jul 2021, 05:57 PM IST

बीकानेर. बीकानेर में रियासतकाल से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जा रही है। हर साल आसाढ़ मास की द्वितीया को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर सवार होकर मंदिर से बाहर निकलते है और भक्तों को दर्शन देते है। द्वितीया से अगले नौ दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर रतन बिहारी पार्क परिसर स्थित रसिक शिरोमणी मंदिर में विराजते है, जहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना और महाआरती होती है। प्रतिदिन विविध व्यंजनों का भोग अर्पित होता है। भजन, कीर्तन और गान होता है। इस बार कोरोना महामारी के कारण 12 जुलाई को मंदिर परिसर में ही रथ यात्रा निकलेगी व नौ दिनों तक मंदिर परिसर में ही उत्सव का आयोजन होगा। उत्सव की पूर्णाहुति 20 जुलाई को होगी। रथ यात्रा रतन बिहारी पार्क परिसर तक नहीं जाएगी।


1876 में हुई मंदिर की स्थापना

पुरानी जेल रोड स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की स्थापना वर्ष 1876 में हुई। डॉ.राजेन्द्र प्रसाद व्यास की पुस्तक 'रियासतकालीन बीकानेर के शिलालेखÓ में मंदिर पर स्थित शिलालेख की जानकारी दी गई है। इस पुस्तक में प्रकाशित मंदिर शिलालेख की जानकारी अनुसार महाराजा सरदार सिंह की धर्मपत्नी पटरानी गोविंद कुंवर ने विक्रम संवत 1931 माघ सुदी 13को भगवान जगन्नाथ के मंदिर का पादन्यास करवाए जाने और विक्रम संवत 1933 ज्येष्ठ सुदी 4परत पंचमी को इस मंदिर की प्रतिष्ठा करवाए जाने का उल्लेख हुआ है।

 

 

लकड़ी से बनी है मूर्तियां
मंदिर पुजारी परिवार के सदस्य देवकिशन पाण्डे के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां देवदारू लकड़ी से बनी है। ये मूर्तियां जगन्नाथ पुरी में बनती है। निज मंदिर में मां लक्ष्मी की अष्टधातु से बनी मूर्ति स्थापित है। जबकि निज मंदिर के बाहर की ओर पारस पत्थर से बनी गरुड की मूर्ति है। यहां वर्ष 2015 में नई मूर्तियां स्थापित की गई। पुजारी देवकिशन के अनुसार प्रत्येक बारह साल के बाद जिस वर्ष दो आसाढ़ मास होते है, नई मूर्तियां स्थापित की जाती है।

 

रूठी लक्ष्मी को मनाते है ठाकुरजी

पुजारी देवकिशन के अनुसार रथ यात्रा के दौरान लक्ष्मी ठाकुरजी के साथ नहीं होती है। इससे लक्ष्मी रूठ जाती है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नौ दिनों तक निज मंदिर से बाहर रहते है। जब भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा पूरी कर वापस आते है तो बलभद्र और सुभद्रा को प्रवेश मिल जाता है, लेकिन जगन्नाथ को प्रवेश नहीं होता है। ठाकुरजी रूठी लक्ष्मी को मनाते है तब मंदिर में प्रवेश हो पाता है।

 

जगन्नाथ पुरी से लाए थे मूर्तियां
जगन्नाथ मंदिर पुजारी परिवार की आठवी पीढ़ी के सदस्य देवकिशन पाण्डे बताते है कि उनके पूर्वज जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां जगन्नाथ पुरी से लेकर आए थे। तत्कालीन महाराजा ने बीकानेर रियासत के समय मंदिर स्थापना के लिए स्थान उपलब्ध करवाया और मंदिर बनवाया था, तब से पीढ़ी दर पीढ़ी उनका परिवार ठाकुरजी की सेवा कर रहे है।

 

रथ का शुद्धिकरण, आज निकलेगी रथ यात्रा

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सोमवार को निकलेगी। रविवार को ठाकुरजी की पूजा-अर्चना के साथ रथ का शुद्धिकरण व पूजन हुआ। हवन में आहुतियां दी गई। भगवान जगन्नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष घनश्याम लखाणी के अनुसार कोरोना एडवाईजरी की पालना के तहत इस बार मंदिर से बाहर रथयात्रा नहीं निकलेगी। मंदिर परिसर में ही रथयात्रा निकाली जाएगी। मंदिर पुजारी देवकिशन के अनुसार शाम 5.30 बजे रथ यात्रा निकाली जाएगी। निज मंदिर की परिक्रमा होगी। भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर महाआरती की जाएगी व भोग अर्पित किया जाएगा। रथ यात्रा उत्सव का समापन २० जुलाई को होगा।

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