पंडित पुरोहित की स्मृति में टी.टी. प्रतियोगिता के विजेताओं को दिए पुरस्कार

Anushree Joshi

Publish: Dec, 08 2017 12:34:21 (IST)

Bikaner, Rajasthan, India
पंडित पुरोहित की स्मृति में टी.टी. प्रतियोगिता के विजेताओं को दिए पुरस्कार

श्रीगोपाल आचार्य, दाऊदयाल आचार्य एवं लक्ष्मीनारायण पुरोहित की स्मृति में मार्गों के नाम

पंडित लक्ष्मी नारायण पुरोहित मैमोरियल फाउण्डेशन की ओर से किराडूओं की बगेची में आयोजित पंडित लक्ष्मी नारायण पुरोहित 108 वीं जयंती समारोह में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की खूबियों को उकेरा। उनके जीवन संस्मरण सुनाए। आध्यात्मिक जीवन और कार्यनिष्ठा से नई पीढी को सीख लेने का संदेश दिया।

 

गरिमामय आयोजन में न्यायाधिपति गोपाल कृष्ण व्यास, जी.आर. मूलचन्दानी, के.सी. शर्मा, मनोज गर्ग तथा पूर्व न्यायाधीश डी.एन.जोशी, मानक मोहता ने शिरकत की। मुख्य अतिथि न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने कहा कि पंडित पुरोहित ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे कि वे पत्थर से मूत्र्ति बनाने की शिक्षा देते थे।

 

पुरोहित की मान्यता थी कि भौर की लालिमा में भगवान विष्णु प्रकट होते हैं उस वक्त जो उनके सामने होते हैं उनको वे जिम्मेदारी देते हैं। पूरे ब्राह्रण्ड के जीव-जन्तु भगवान से आर्तनाद होकर मांगते हैं जो मनुष्य भौर में खड़ा होकर सुनेगा उसको भगवान देते हैं। यह प्रतीकात्मक संदेश जीवनचर्या को आगे बढ़ता है। पंडित जी श्लोक याद करते थे। सृष्टि का संचालक ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं जिसे 'गोड' रूप में मानते हैं।

 

उन्होंने पंडित के विराट व्यक्तित्व का विवेचन किया। पंडित लक्ष्मी नारायण पुरोहित का कहना था कि कुर्सी पर बैठकर किसी को गलत नहीं बोलना चाहिए। पूर्व न्यायाधीश मानक मोहता ने पंडित की कार्य दक्षता और विद्वता की प्रशंसा की। डी.एन. पुरोहित संस्मरण सुनाया कि उन्होंने अपने पूजा स्थल पर रोजों में मुस्लिम भाई की नमाज अदा करवाई।

 

फर्क इतना है कि वेद पाठी संस्कृत में उसे याद करते है और मुस्लिम अरबी में। महापौर नारायण चौपड़ा ने उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम की ओर से बीकानेर के तीन अधिवक्ता श्रीगोपाल आचार्य, दाऊ दयाल आचार्य तथा लक्ष्मी नारायण पुरोहित के नाम पर मार्गों का नाम तय किया जाएगा।

 

विधायक भंवर सिंह भाटी ने उनकी जीवन शैली अनुकरणीय बताई।विधायक डॉ. गोपाल जोशी ने उनसे जुड़े संस्मरण और व्यक्तित्व की व्याख्या की। डॉ. बी.डी. कल्ला ने कहा कि वे अपने प्रोफेशन के प्रति ईमानदार थे। चारों पुरुषार्थों में निष्ठा थी। उनकी मान्यता थी कि दूध पीओ, कसरत करो। हिम्मत से करो नित काम। सफल करेंगे श्रीराम।

 

कार्यक्रम मे उनकी स्मृति में आयोजित टी.टी. प्रतियोगिता के विजेता कुंतेश खटोल एवं हितेश छंगाणी को एकल विजेता का पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम स्वस्तिक मंत्रों से शुरू हुआ। अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिए गए। समारोह में भवानी शंकर शर्मा, जुगल किशोर ओझा एवं डी.एन. पुरोहित अतिथियों के रूप में शामिल हुए।

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