scriptलेक मैनेजमेंट सिस्टम से होगी लूणकरणसर, आनासागर, खींचन और चंदलाई की निगरानी-बदलेगी सूरत | Lake Management System will monitor Lunkaransar, Anasagar, Khinchhan and Chandlai- their appearance will change | Patrika News
बीकानेर

लेक मैनेजमेंट सिस्टम से होगी लूणकरणसर, आनासागर, खींचन और चंदलाई की निगरानी-बदलेगी सूरत

सैटेलाइट के माध्यम से निरंतर निगरानी, जोखिम की जांच, निदान और वैज्ञानिक विश्लेषण होगा

बीकानेरJun 28, 2024 / 07:34 pm

Hari

लूणकरनसर में नमक की झील का मौका मुआयना करती जिला कलक्टर।

राज्य आर्द्र भूमि प्राधिकरण की सातवीं बैठक संपन्न

आनासागर, लूणकरणसर, खींचन और चंदलाई में लेक मैनेजमेंट सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। इसके तहत उनकी सैटेलाइट के माध्यम से निरंतर निगरानी, जोखिम की जांच, निदान और वैज्ञानिक विश्लेषण होगा। उनमें बारिश के पानी की आवक, जल स्तर का माप का पता लगाया जा सकेगा, ताकि उनका प्रकृति आधारित संसाधनों के माध्यम से पुनस्र्थापन किया जा सकेगा। यह निर्णय गुरुवार को सचिवालय में हुई राज्य आर्द्र भूमि प्राधिकरण की सातवीं बैठक में हुआ। यह कार्य एक निजी फर्म की ओर से किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि आद्र्रभूमि संरक्षण जल संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य आर्द्र भूमि प्राधिकरण की सदस्य सचिव मोनाली सेन ने पीपीटी के माध्यम से आगामी कार्ययोजना से रूबरू कराया।
बैठक में सिलीसेढ़ झील (अलवर) को रामसर साइट के रूप में नामित करने पर भी चर्चा हुई। इसका प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सांभर झील एवं केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है। जिसके तहत अतिक्रमण हटाए जाएंगे। पानी के स्टोरेज, स्तर, जल संग्रहण पर फोकस रहेगा। साथ ही प्रवासी पक्षियों के लिए भी रेस्क्यू सेंटर आदि विकसित किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा।
जिला कलक्टर ने दौराकर अधिकारियों की ली बैठक

लूणकरनसर स्थित नमक की झील को पर्यटन का रूप देने के उद्देश्य से जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने गुरुवार को दौराकर झील के क्षेत्र को देखा। इस दौरान झील के सौंदर्यकरण व विकास को लूणकरनसर में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर चर्चा की गई।
जिला कलक्टर वृष्णि ने कहा कि लूणकरनसर की नमक झील में देशी-विदेशी पक्षियों की आवाजाही रहती है। इससे ही इसकी खास पहचान है तथा आने वाले समय में इसका सौंदर्यकरण और रख-रखाव सामूहिक प्रयासों से किया जाएगा। जिससे इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सके। इसमें विभिन्न विभागों के साथ डीएमएफटी और सीएसआर मद का सहयोग भी लिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने झील का मौका मुआयना भी किया। उन्होंने कहा कि झील के चारों और पौधारोपण किया जाएगा। पौधे उपलब्ध करवाने के लिए वन विभाग को निर्देशित किया और कहा कि इस पर आने वाला व्यय पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन और अन्य मद से किया जाएगा। इस दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहनलाल, उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्र कुमार, राजस्व तहसीलदार बाबूलाल, विकास अधिकारी किशोर कुमार चौधरी, नायब तहसीलदार ममता गवां समेत अधिकाीरी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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