खींवसिंह के नाम से कांपते थे उग्रवादी, चटाई थी धूल

एएसपी के पद से सोमवार को बाड़मेर में सेवानिवृत्त हुए भाटी

By: Jaiprakash

Published: 02 Sep 2020, 05:16 PM IST

बीकानेर। पंजाब में खालिस्तान की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की बॉर्डर पर उग्रवादियों की गतिविधियां बढ़ गई थी। तब खीवसिंह भाटी श्रीगंगानगर जिले में पुलिस निरीक्षक पद पर पदस्थापित थे।

उन्होंने अपने कौशल व निडरता से पुलिस टीम को एकता में पिरोये रखा था। विस्फोटक सामग्री, हथियार व मादक पदार्थ जब्त किया। भाटी ने १९ उग्रवादियों को गिरफ्तार भी किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि उग्रवादी श्रीगंगानगर बॉर्डर से पंजाब में घुसने से डरने लगे। इसी के चलते भाटी को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया।

३८ साल की नौकरी में कोई दाग नहीं
एएसपी भाटी राजस्थान पुलिस में ३८ साल की नौकरी पूरी कर ३१ अगस्त २०२० को बाड़मेर में सेवानिवृत हुए। भाटी मूलरूप से बीकानेर जिले की कोलायत तहसील के गिराजसर गांव के है। उनके पिता कालूसिंह भाटी थे जो किसान थे। सात साल के थे तब उनके पिता का निधन हो गया। वर्ष २००६ में मां रामकुंवर का स्वर्गवास हो गया। पिता के निधन के बाद उन्होंंने अपनी बुआ पास रह कर पढ़ाई की। फूफा शिवदानसिंह राठौड़ पुलिस में थे, उनसे पुलिस सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। बीकानेर के डूंगर कॉलेज से पढ़ाई की। लॉ की पढ़ाई के दौरान महज २२ साल की उम्र में भाटी का पहले ही प्रयास में वर्ष १९८२ में राजस्थान पुलिस सेवा में चयन हो गया। इनके एक बड़े भाई और ***** भी हैं।

यह रही उपलब्धियां
अतिरिक्त पुलस अधीक्षक भाटी दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। साथ ही पुलिस मुखिया की ओर से २५० से अधिक बार प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। पुलिस सेवा में बेहतर कार्य, कौशल, कर्तव्यनिष्ठा पर उत्तम, अति उत्तम व सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

आमजन ने रक्तदान कर दी विदाई
एएसपी भाटी की सेवानिवृत पर उनका सम्मान बेहतर तरीके से किया गया जैसा आज तक किसी पुलिस अधिकारी का नहीं हुआ है। उनके प्रशसंकों ने रक्तदान कर विदाई दी। रक्तदान के लिए पौने दो सौ से अधिक युवओं ने पंजीयन कराया। उनकी सेवानिवृति पर रक्तदान करने की महकमे सहित शहरभर में चर्चा रही। समाज के लोगों ने कहा कि भाटी ने सेवाकाल के दौरान हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी और पीडि़तों को न्याय दिलाया। इसी का परिणाम है लोग इनका दिल से सम्मान करते हैं। यह लोगों ने रक्तदान कर साबित किया है।

Jaiprakash Reporting
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