scriptMughul ruler Aurangzeb banned fireworks in 1667 | तत्कालीन मुगल सम्राट औरंगजेब ने भी लगाया था आतिशबाजी पर प्रतिबंध | Patrika News

तत्कालीन मुगल सम्राट औरंगजेब ने भी लगाया था आतिशबाजी पर प्रतिबंध

locationबीकानेरPublished: Oct 14, 2017 10:48:02 am

Submitted by:

santosh Trivedi

तत्कालीन मुगल सम्राट औरंगजेब ने भी आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया था और घोषणा भी की थी कि कोई आतिशबाजी न करे।

ban on crackers
बीकानेर। आतिशबाजी भी खुशियां प्रकट करने का एक माध्यम है। दीपावली हो या खुशी का क्षण, हर कोई आतिशबाजी कर अपनी भावनाएं प्रकट करता है। हालांकि आतिशबाजी के दौरान जान-माल का नुकसान हर किसी को सताए रहता है।
 

वर्तमान ही नहीं, रियासतकाल में भी आतिशबाजी और धमाका करने वाली बारूद से बनी अन्य सामग्री पर प्रतिबंध लगाने के आदेश अथवा एक्ट बनाए जाते थे, ताकि आतिशबाजी के दौरान जान-माल को नुकसान नहीं हो। तत्कालीन मुगल सम्राट औरंगजेब ने भी आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया था और घोषणा भी की थी कि कोई आतिशबाजी न करे। इसके लिए औरंगजेब ने आदेश भी जारी किए थे। बीकानेर के पूर्व महाराजा गंगासिंह ने इसके लिए एक्ट भी बनवाया था।
 

मुगल बादशाह औरंगजेब ने 8 अप्रेल, 1667 को आदेश जारी आतिशबाजी पर रोक लगाई थी। इसमें सूबों के अधिकारियों और फौलाद खां को भी आदेश दिया गया कि शहर में घोषणा कर दें कि कोई आतिशबाजी (वे चीजें जो खुशी और शादी के अवसर पर बारूद से बनाकर छोड़ी जाती हैं) न करें। अभिलेखागार विभाग के निदेशक के अनुसार औरंगजेब का यह आदेश अखबारात ए मुअला पर्सियन सीरीज में अभिलेख शृंखला में उपलब्ध है। इस शृंखला में मुगल बादशाहों की महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख है।
 

काले पानी की सजा
तत्कालीन बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह के शासनकाल में भी वर्ष 1908 में 'भक से उड़ जाने वाले पदार्थों का एक्ट' बनाया गया था। इस एक्ट में कहा गया था कि जो व्यक्ति नाजायज तौर पर और द्वेष से किसी भक से उड़ जाने वाले पदार्थ से धमाका करे, जान-माल को नुकसान पहुंचने की आशंका हो या नुकसान नहीं भी हुआ हो, उसे उम्रकैद या कम समय के लिए काले पानी की सजा के साथ जुर्माना भुगतना होगा। इसके अलावा दस साल तक की कैद और जुर्माना का प्रावधान भी किया गया।
 

लगाया था प्रतिबंध
पूर्व मुगल बादशाह औरंगजेब ने आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया था। पर्सियन सीरीज में औरंगजेब का यह आदेश अभिलेख मौजूद है। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह की ओर से 1908 में बनाया गया एक्ट भी मूलस्वरूप में मौजूद है।

डॉ. महेन्द्र खडगावत, निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार बीकानेर

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