फिजिक्स में नहीं पढ़ाएंगे न्यूटन का दूसरा नियम

bikaner news: पत्रिका पड़ताल- संशोधित पाठ्यक्रम की खामी: फिर छात्र संवेग का संरक्षण कैसे समझ पाएंगे - स्कूली परीक्षा पास करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में हल नहीं कर पाएंगे प्रश्न

By: dinesh swami

Published: 18 Dec 2020, 12:34 AM IST

दिनेश स्वामी-चन्द्रप्रकाश ओझा

बीकानेर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से कोविड-१९ के चलते स्कूलों में अध्ययन प्रभावित होने से पाठ्यक्रम में कटौती करना विद्यार्थियों पर भारी पड़ रहा है। फिजिक्स में न्यूनटन के दूसरे नियम को हटाने के बाद उससे जुड़े अन्य अध्याय रखना, ओम का नियम हटाना समेत कई खामियां संशोधित पाठ्यक्रम में रह गई है।

बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम को 30 से 40 प्रतिशत कम किया है। राजस्थान पत्रिका ने विषयाध्यापकों से संशोधित पाठ्यक्रम पर बातकर पड़ताल की तो सामने आया कि बोर्ड ने कम किए पाठ्यक्रम में कई जरूरी टॉपिक्स को भी हटा दिया हैं। जिससे छात्रों को आगे की थ्योरी समझने में परेशानी हो रही है।

सीबीएससी ने सावधानी बरती

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भी पाठ्यक्रम में कटौती की लेकिन, बेसिक टॉपिक्स को पाठ्यक्रम में रखा है। खासकर एेसे टॉपिक्स जिसको समझे बिना आगे की थ्योरी नहीं समझी जा सकती। इसके विपरित राजस्थान बोर्ड ने अध्याय हटाने की बजाय उसके अंदर से कंटेंट कम किए हैं। इसमें कई कंटेंट ऐसे हैं, जिनके बिना अगले अध्याय या कंटेंट को छात्र समझ ही नहीं पा रहे हैं।

नियम हटाया और संवेग संरक्षण को रख छोड़ा

भौतिक विज्ञान के विशेषज्ञ पुनीत किराडू के अनुसार कंटेंट की बजाय सीधे चैप्टर कम करने चाहिए थे। बोर्ड ने कक्षा 11वीं के भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) में गति और संवेग का न्यूनटन का दूसरा नियम को हटाया है। जबकि संवेग का संरक्षण टॉपिक्स को पाठ्यक्रम रखा गया है। किराडू का कहना है कि संवेग या गति किए बिना कैसे उसके संरक्षण को कर सकता है। इसी तरह विद्युत व चुंबकीय प्रभाव जैसे अहम टॉपिक्स भी हटाए हैं।

ओम का नियम को हटाया तो एप्लीकेशन क्यों रखी

विषय विशेषज्ञों के अनुसार संशोधित पाठ्यक्रम में कक्षा 12 में ओम का नियम भी हटाया है। जबकि, उसकी एप्लीकेशन को रखा गया है। ओम की एप्लीकेशन तभी छात्रों की समझ में आएगी, जब वह ओम का नियम पढ़ेंगे। एेसे में पाठ्यक्रम कम कर विद्यार्थियों को सुविधा देने का मकसद ही समाप्त हो गया है। इसी तरह बोर्ड ने शक्ति गुणांक, खोखले चालक गोले विद्युत क्षेत्र तथा विभवांतर, जेनर डायोड, कार्बन प्रतिरोध जैसे कई टॉपिक्स हटाए है। ये सभी नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में आते हैं।

रसायन विज्ञान में भी मूल फैक्टर को हटाया

रसायन विज्ञान के शिक्षक पवन शर्मा के अनुसार रसायन विज्ञान (केमेस्ट्री) में 'वांट हॉफ फैक्टरÓ को हटाया गया है। इसी फैक्टर से जुड़े अन्य अध्याय पाठ्यक्रम में रखे हुए हैं। जब मूल फैक्टर विद्यार्थी नहीं पढ़ेगा तो फिजिकल केमेस्ट्री के अन्य अध्याय कैसे समझ में आएंगे। रसायन विज्ञान में बोर्ड ने 8 अध्याय हटाए है। जो अध्याय हटाए गए है उसमें से 40 प्रतिशत प्रश्न नीट और जेईई में पूछे जाते हैं।

जीव विज्ञान में १२ टॉपिक्स हटे

जीव विज्ञान से भी नीट जेईई जैसी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले 12 प्रतिशत टॉपिक्स को बोर्ड ने हटा दिया है। इसमें वनस्पति विज्ञान के टॉपिक्स ज्यादा हटाए गए हैं। गणित में भी जो बीज गणित सहित 7 अध्याय हटाए हैं, उनमें से 10 प्रतिशत टॉपिक्स प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

विद्युत प्रवाह भी अब नहीं

कक्षा 10 के विज्ञान शिक्षक कमलेश शर्मा के अनुसार 10वीं में विद्युत प्रवाह अध्याय ही हटा दिया गया है। जबकि यह अध्याय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर उन बच्चों के लिए जो आगे चलकर विज्ञान में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं।

अर्थशास्त्र के बारे कैसे पता चलेगा
कक्षा 10 में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक पुनीत पारीक कहते हैं कि कक्षा 10वीं के 20 में से 19 अध्याय पुराने पैटर्न पर ही हैं। इसमें अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण अध्याय हटाया है। आमतौर पर छात्र 10वीं के बाद ऐसा विषय नहीं लेते हैं। ऐसे छात्रों को अर्थशास्त्र का महत्व ही मालूम नहीं चल पाएगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम पर हो विचार

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान के निदेशक जेठमल सुथार के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल के समक्ष भी यह मामला रखा है। उन्होंने नीट और जेईई परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को राज्यों के पाठ्यक्रम के अनुसार निर्धारित करने का आश्वासन दिया है। परन्तु यदि ऐसा नहीं होता है तो प्रदेश के विद्यार्थी आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों से पिछड़ जाएंगे।

dinesh swami Reporting
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