गोचर विकास, पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण पर संगोष्ठी

गोचर विकास, पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण पर संगोष्ठी

 

By: Atul Acharya

Published: 12 Jul 2021, 08:09 PM IST

बीकानेर. गोचर, ओरण, जोहड, पायतन की सार्वजनिक भू सम्पदा को जन उपयोगी बनाना तथा गोचर विकास से पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण व आर्थिक समृद्धि के लिए सोमवार को सरह नथानिया गोचर भूमि में चर्चा की गई। पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी में मध्यप्रदेश समेत प्रदेश के कई स्थानों से आए विशेषज्ञों ने विचार रखे।

पर्यावरणविद् कानसिंह निर्वाण ने कहा कि धरती, प्रकृति और गाय तीनों एक है। इनको पल्लवित और पोषित करना आवश्यक है। हमें गाय की प्राथमिकता को समझना होगा। गाय के गोबर और मूत्र से धरती को मजबूती मिलती है। निर्वाण ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से गाय से जुडऩे की बात कहते हुए कहा कि गो आधारित जीवन पद्धति को अपनाए।

मध्य प्रदेश के किसान बलराम ने ऑक्सीजन पार्क बनाने और गोशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीएनजी बनने के बाद बायोफर्टिलाइजर और बायोपेस्टीसाइड आय का जरिया बनते है। गोचर की चार दीवारी पेड़ों के झुरमुट से बनाने का सुझाव भी दिया। नागौर से आए अशोक जांगू ने खारे पानी से खेती पर विचार रखे।
गोष्ठी में हेम शर्मा, बंशी तंवर, रामकिशन आचार्य, देव किशन चांड़क, नरेश चुग, सुधा आचार्य आदि ने विचार रखे। बृजरतन किराडू, महावीर रांका, सूरजप्रकाश राव, परमानंद ओझा, मन्नू सेवग, विजय उपाध्याय, दिनेश ओझा, महेन्द्र किराड़ू, प्रेम लेघा, मोहन राम, हंसराज भादू, राजेन्द्र किराडू, नरेन्द्र आर्य, डूंगरसिंह तेहनदेसर, राजेन्द्र सिंह सहित गोचर, गोशालाओं व विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

Atul Acharya Reporting
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