अफसरों ने ले रखी है नियमों की आड, लोग निकाल रहे चक्कर

प्रशासन शहरों के संग अभियान : नियमों की आड में अटक रही पट्टों की फाइले

By: Vimal

Published: 08 Oct 2021, 05:38 PM IST

बीकानेर. प्रशासन शहरों के संग अभियान का पूरा लाभ आमजन को नहीं मिल रहा है। लोग पट्टों के लिए चक्कर निकाल रहे हैं। बिना जोनल प्लान और बिना तैयारी के शुरू हुए अभियान में अब नियमों की आड में पट्टों की फाइलें अटक रही है। अफसर नियमों की आड लेकर पट्टे जारी करने से बच रहे हैं। एेसे में आमजन को न अभियान का लाभ मिल रहा है और ना ही उनको अपने आशियानें के पट्टे जारी होने का ख्वाब पूरा हो रहा है। अभियान के दौरान लोग रोज बड़ी संख्या में शिविरों में चक्कर निकाल रहे है। अभियान के पहले चार दिनों में लोगों को पट्टे बनवाने में निराशा ही हाथ लगी है। शिविरों में आमजन के काम किस प्रकार हो रहे हैं, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर निगम पहले चार दिनों में महज तीन पट्टे ही जारी कर पाया है। यह पट्टे भी निगम की योजना क्षेत्र की कॉलोनी सालमनाथ के हैं, जो फरवरी में भूखंड नीलाम हो चुके थे।

 

नियमों की आड में अटके पट्टे

नगर निगम के पास पुराना शहर का पूरा परकोटा क्षेत्र है। यहां हजारों मकान है। इनमें अधिकतर के पास रियासतकालीन पट्टे ही है। जो 69- क के दायरे में आते है। निगम अब तक एक भी पट्टा 69 - क के तहत जारी नहीं कर पाया है। वहीं कच्ची बस्ती नियमन, स्टेट ग्रांट, कब्जा नियमन, खांचा भूमि आंवटन के पट्टे भी नियमों की आड में अटके हुए हैं। जोनल प्लान और नियमों का हवाला देकर अफसर पत्रावली आगे बढ़ाने से बच रहे हैं।

 

दस्तावेज लिए निकाल रहे चक्कर

अभियान के दौरान लोगों को पट्टा मिलेगा या नहीं, यह तो भविष्य में तय हो पाएगा, लेकिन वर्तमान में लोग पट्टों के लिए पसीना बहा रहे है। हाथों में पानी-बिजली के बिल, आधार कार्ड, जन-आधार कार्ड, राशन कार्ड की फोटो प्रति, दशकों पहले की मतदाता सूची और जिनसे जमीन प्राप्त हुई है उनके दस्तावेज लिए लंबे समय से निगम के चक्कर निकाल रहे है तो कभी न्यास के। नगर मित्रों सहित निगम-न्यास कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों से भी सम्पर्क बिठा कर पट्टा बनवाने का प्रयास कर रहे है। नियमों की आड में पट्टों की फाइले सिरे ही नहीं चढ़ पा रही है।

 

वर्षो बाद भी नहीं मिल रहे पट्टे
अभियान के दौरान कई लोग एेसे भी शिविरों में पहुंच रहे है, जिन्होंने पिछले प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान भी आवेदन किया था, लेकिन पट्टा जारी नहीं हो पाया था। इस बार भी एेसे लोग फिर से पत्रावली तैयार कर आवेदन करने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि इस बार भी उनको पट्टे मिल जाएंगे, इस पर संशय है। अफसर फाइल देखते ही नियमों की लंबी फेहरिस्त बताना शुरू कर देते है।

 

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