scriptPrison, Where The Children Of Prisoners And Guards Play Together | एक ऐसी जेल, जहां कैदियों और जेल प्रहरियों के बच्चे एक साथ ही खेलते-खाते हैं | Patrika News

एक ऐसी जेल, जहां कैदियों और जेल प्रहरियों के बच्चे एक साथ ही खेलते-खाते हैं

जाने-अनजाने ही सही, यह पहल कम से कम दीन-दुनिया की अच्छाइयों-बुराइयों से दूर उन मासूमों के लिए अमृत वर्षा का काम कर रही हैं, जो कहीं न कहीं आम दुनिया से कटे हुए से महसूस होते हैं।

बीकानेर

Published: March 27, 2022 11:48:44 am

बीकानेर. बीकानेर महिला जेल का एक कक्ष ऐसा भी है, जहां मासूम किलकारियां और झुनझुने जैसे खिलौनों के बीच ए, बी, सी, डी या क, ख, ग, घ सीखते बच्चों की आवाजें एक खुशगवार हवा के झोंके की तरह महसूस होती हैं। इन खिलखिलाहटों-रूठने, मनाने अथवा बिलखने जैसी बाल सुलभ आवाजें कभी एक छोटे कक्ष से आती सुनाई दे सकती हैं, तो सेमीनार आदि के लिए तय हॉल में भी इनकी मौजूदगी हो सकती है। जेल की सख्त जमीन में मासूमियत के ये अंकुर दरअसल कैदियों-बदी रक्षकों के बच्चों के उस मेल से फूटते दिखते हैं, जो इन्हीं कक्षों में साथ बैठ कर खेलते भी हैं। पढ़ते भी हैं। अगर उनमें से कोई छोटा बच्चा रोता है, तो उसे बहलाते भी देखे जा सकते हैं। दरअसल, जाने-अनजाने ही सही, यह पहल कम से कम दीन-दुनिया की अच्छाइयों-बुराइयों से दूर उन मासूमों के लिए अमृत वर्षा का काम कर रही हैं, जो कहीं न कहीं आम दुनिया से कटे हुए से महसूस होते हैं।

एक ऐसी जेल, जहां कैदियों और जेल प्रहरियों के बच्चे एक साथ ही खेलते-खाते हैं
एक ऐसी जेल, जहां कैदियों और जेल प्रहरियों के बच्चे एक साथ ही खेलते-खाते हैं

मोहित करता है बच्चों का आपसी प्रेम

जेल में बच्चों का आपसी प्रेम सबको मोहित करता है। जेल का माहौल भी खुशनुमा है। जेल में तीन महिला बंदियों के बच्चे सुरक्षा प्रहरियों और उनके बच्चों के साथ खेलते और खाते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि बच्चे यह संदेश दे रहे हैं कि हम साथ-साथ हैं। गौरतलब है कि बीकानेर केन्द्रीय कारागार से संबद्ध महिला जेल में वर्तमान में 58 बंदी हैं, जिनमें से तीन महिला बंदियों के बच्चे छोटे होने के कारण उनकी परिवार में देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में नियमानुसार उन्हें बच्चों को साथ रखने की छूट दी जा रही है।

बच्चों के लिए खिलौने व झूलों की व्यवस्था

महिला जेल में बच्चों के लिए खिलौने व झूलों की व्यवस्था की गई है। बच्चों के खिलौने-पुस्तकों आदि सामान की व्यवस्था जेल कर्मचारी खुद से करते हैं। जेलर लीला बताती हैं कि जेल परिसर में करीब सात बच्चे हैं। बच्चों के कारण जेल का माहौल ख़ुशनुमा है। बच्चों के कारण जेल का माहौल घर जैसा बना हुआ है।

फ्रेंडली माहौल बनाने की कोशिश

जेल में बच्चों के लिए फ्रेंडली माहौल बनाया जा रहा हा। तीन महिला बंदियों के छोटे बच्चे हैं। सुरक्षा प्रहरियों के भी बच्चे हैं। यह सभी साथ-साथ खेलना, खाना-पीना कर रहे हैं। बच्चों के लिए बड़े झूले व मनोरंजन के अन्य साधनों की व्यवस्था समाजसेवी संस्थाओं से कराने को लेकर बात चल रही है। - आर. अनंतेश्वरन, अधीक्षक बीकानेर केन्द्रीय कारागार

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