संसाधन तो खरीद लिए, हालात नहीं बदले

स्वच्छता सर्वेक्षण : निगम की अधूरी तैयारी, स्वच्छता रैंकिंग में कैसे आएंगे अव्वल, जगह-जगह कचरे के ढेर, नाले-सीवरेज जाम

 

By: Vimal

Published: 03 Jan 2020, 12:13 PM IST

बीकानेर. शहर में सफाई के लिए करोड़ो रुपए मशीने और संसाधान खरीदने के बाद भी हालात सुधर नहीं रहे है।जगह-जगह कचरे के ढेर, जाम नाले, नालियों व सीवरेज के कारण सडक़ों पर फैल रहे गंदे पानी से आमजन परेशान है।शहर देश के सबसे स्वच्छ और सुंदर शहरों की पहचान के लिए होने वाली स्वच्छता रैंकिंग में भाग ले रहा है, लेकिन रैंकिंग को लेकर मुख्य सडक़ों से लेकर पुराना शहर तक की गली-मोहल्लों, बाजारों और पब्लिक स्थानों पर तैयारियां नजर नहीं आ रही है। निगम प्रशासन इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में स्वच्छ भारत मिशन के तहत खरीदी गई मशीनों व संसाधनों से रैंकिंग में सुधार की उम्मीद लगाए हुए है। जबकि शहर में धरातल पर स्वच्छता कार्यो की स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। कही कचरे की ढेरियां पड़ी है, वहीं कचरे के आस पास बेसहारा पशु व कुत्ते मंडरा रहे है। सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालयों के आस पास भी पर्याप्त सफाई नहीं हो रही है।

कमरों में निर्णय, धरातल से बेखबर
शहर को साफ-सुथरा और सुंदर बनाने को लेकर निगम महापौर व अधिकारियों के स्तर पर कमरों में बैठकर निर्णय लिए जा रहे है, लेकिन इसके अनुसार धरातल पर काम नहीं होने से स्थिति में अधिक सुधार नहीं हो पा रहा है। शहर में स्वच्छता कार्यो को लेकर महापौर अधिकारियों की बैठक ले चुकी है। आयुक्त सफाई कर्मचारियों से उनके मूल पद के अनुसार ही सफाई कार्य करवाने को लेकर सौ से अधिक सफाई कर्मचारियों को सर्किलों में भेजने के आदेश कर चुके है। स्वच्छता निरीक्षकों की क्लास हो चुकी है। निगम के ८० वार्डो में सफाई कर्मचारियों को लगाने को लेकर तैयारियां हो चुकी है। इन सबके बावजूद धरातल पर बदलाव नजर नहीं आ रहे है।

नहीं बदल रही स्थिति
करीब एक माह पहले महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित के पदभार ग्रहण करने के साथ ही लोगों को उम्मीद जगी थी कि शहर में अब सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। सफाई कार्यो की प्रभावी मॉनिटरिंग होगी। शहर स्वच्छ और सुंदर नजर आएगा। कचरे व गंदगी के ढेर सडक़ों पर नजर नहीं आएंगे। सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालय साफ-सुथरे रहेंगे, महिलाओं के लिए अलग से शौचालयों का निर्माण होगा। लेकिन एक माह बाद भी धरातल पर एेसा नजर नहीं आ रहा है। इससे लोगों की उम्मीद टूटने लगी है।

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