बोर्ड परीक्षाएं बढ़ा रही अभिभावकों का ब्लड प्रेशर

school bord exam news bikaner: संक्रमण बढऩे से हो रही चिंता, ग्रामीण विद्यार्थी कैसे आएंगे शहरों में परीक्षा देने

By: dinesh swami

Published: 17 Jun 2020, 06:05 AM IST

बीकानेर.

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की शेष रही परीक्षाओं की तिथि नजदीक आने के साथ ही अभिवावकों का ब्लड प्रेशर बढ़ता जा रहा है। वजह है कोरोना संक्रमितों का दिन-प्रतिदिन बढ़ता आंकड़ा। ऐसे में बोर्ड की शेष रही परीक्षाओं का टाइम टेबल जारी होने के साथ ही अभिभावक अपने नौनिहालों के परीक्षा केन्द्र पर जाने और परीक्षा देने के दौरान संक्रमण को लेकर चिंतित है।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 18 जून से सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं की शेष परीक्षाएं और 27 जून से सेकेंडरी की परीक्षाओं के आयोजन की तैयारियां की है। हालांकि बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों में परीक्षार्थियों के बैठने में सोशल डिस्टेंसिग की पालन करने के निर्देश केंद्राधीक्षकों को दिए है। इसके लिए वैकल्पिक परीक्षा केंद्र भी बनाए गए है। इन दोनों परीक्षाओं में राज्य के करीब 20 लाख परीक्षार्थियों के भाग लेने की संभावना है।

कंटेनमेंट जोन के परीक्षार्थी बना सकेंगे पास

उन अभिभावकों की चिंता सबसे ज्यादा है जो कफ्र्यू ग्रस्त क्षेत्रों में है। जिसे कंटेनमेंट जोन भी कहते है। जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय उमाशंकर किराडू ने बताया कि नो मोबिलिटी क्षेत्र के परीक्षार्थी अगर परीक्षा देना चाहेंगे तो उन्हें जिला प्रशासन से अनुमति दिला दी जाएगी। इसके लिए परीक्षार्थियों को अपने संस्था प्रधान के माध्यम से सूचित करना होगा। अगर ऐसे परीक्षार्थी परीक्षा नहीं देना चाहते तो उन्हें पूरक परीक्षाओं के साथ परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा।

मूक बधिरों को रखेंगे छात्रावास में

मूक बधिर विद्यालय के परीक्षार्थियों की आवास व्यवस्था छात्रावास में ही रहेगी। इसके लिए मूक बधिर स्कूल के संस्था प्रधान को निर्देश दे दिए गए है। ऐसे अभिभावकों को अपने बच्चों को परीक्षा से पहले छात्रावास में पहुंचाना होगा। वहां से बच्चों को परीक्षा केंद्र तक लाने व वापस लाने की जिम्मेदारी संस्था प्रधान को दी गई है। परीक्षाएं समाप्ति के बाद अभिभावक अपने बच्चों को वापस अपने घर ले जा सकेंगे।

गांवों से आने वाले बच्चों को होगी परेशानी

इसी तरह उन परीक्षार्थियों के दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक भी परेशान है। उनके बच्चे शहर में रहकर अपनी सीनियर और सेकेंडरी की परीक्षाएं दे रहे थे। अब ग्रामीण क्षेत्रों से अभी भी आवागमन के साधन शुरू नहीं होने से परीक्षा देने आने की परेशानी है। बोर्ड ने कंटेनमेंट जोन में रहने वाले और मूक बधिर परीक्षार्थियों के लिए तो आवास संबंधी निर्देश दिए है लेकिन दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए एेसी कोई व्यवस्था नहीं की है।

गरीब परिवारों को परेशानी

गरीब परिवारों के बच्चे अपने गांव से स्वयं के वाहन की व्यवस्था कर शहरी या अन्य जगह के परीक्षा केन्द्र तक पहुंचने की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसें-ट्रेनंे बंद है। होटल और धर्मशालाओं में भी अभी ठहरने की सुविधा नहीं मिल रही। ग्रामीण शहरों में फैले कोरोना से भी डरे हुए है।

परीक्षा केंद्रों पर लगेगी भीड़

राज्य के करीब 20 लाख परीक्षार्थी सीनियर व माध्यमिक परीक्षाओं में भाग लेंगेए माध्यमिक कक्षाओं के परीक्षार्थियों को छोडऩे और लेने के लिए उनके अभिभावक परीक्षा केंद्रों पर आएंगे। इससे भी इन केंद्रों पर सोशल डिस्टेंस कैसे संभव होगा। ये भी अभिभावकों को चिंता है। अगर कोई संक्रमित बच्चा परीक्षा केन्द्र में आ गया तो संक्रमण का खतरा भी चिंता का विषय है।

उपस्थिति कम रहेगी

अभिभावक असमंजस में है कि वे अपने बच्चों को शेष रही परीक्षाएं दिलाएं या नहीं। कोरोना महामारी ने अभिभावकों को सोचने पर मजबूर के दिया है एक तरफ उनके बच्चे के एक वर्ष पिछड़ जाने का भय है तो दूसरी तरफ संक्रमण का खतरा। ऐसे में इस बार परीक्षार्थियों की उपस्थिति प्रभावित होना तय माना जा रहा है।

हर संभव व्यवस्था

कफ्र्यू ग्रस्त क्षेत्रों में आने वाले परीक्षार्थी अगर परीक्षा देना चाहेंगे तो उन्हें अनुमति दिलाई जाएगी। अगर वे नहीं देंगे तो उन्हें पूरक परीक्षाओं के साथ परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।

उमाशंकर किराडू, जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय बीकानेर

कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो

सरकार को बढ़ते संक्रमण को देखते हुए बोर्ड परीक्षार्थियों को पूर्व में हो चुकी परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर शेष के अंक देकर परीक्षा परिणाम जारी कर देना चाहिए। संक्रमण के खतरे में परीक्षा करवाने का जोखिम उठाना उचित नहीं है।

घनश्याम मोदी पूर्व व्याख्याता

dinesh swami Reporting
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