करो आशापुरा आनन्द शहर बीकोणे में ...

इष्टदेव और देवी स्वरूप के अखाड़े में पदार्पण से होता है रम्मतों का आगाज

By: Vimal

Updated: 17 Mar 2021, 09:56 AM IST

बीकानेर. होलाष्टक में आयोजित होने वाली रम्मतें बीकानेर की होली की विशेष पहचान है। हर साल होलाष्टक की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक शहर के विभिन्न स्थानों पर रम्मतों का मंचन होता है। मध्यरात्रि बाद प्रारम्भ होने वाली रम्मतें सुबह 10 से 11 बजे तक मंचित होती है। जिसमें रम्मत उस्ताद के नेतृत्व में कलाकार पूरी रात रम्मत का मंचन करते है। इन रम्मतों को देखने के लिए पूरी रात शहरवासी रम्मत स्थल पर मौजूद रहते है।

शहर में प्रत्येक स्थान पर मंचित होने वाली रम्मत का आगाज रम्मत कलाकारों और मोहल्लेवासियों के इष्टदेव अथवा देवी स्वरूप के अखाड़ें में पदार्पण और स्तुती वंदना से होता है। इष्ट आराधना के बाद ही रम्मत की विधिवत शुरूआत होती है। रम्मत मंचन से पूर्व रम्मत कलाकार शहर के विकास, सभी के उत्तम स्वास्थ्य और आमजन की सुख समृद्धि की कामना इष्टदेव और मां भगवती की स्तुती वंदना में करते है।

 

दर्शन-पूजन के लिए उमड़ते है लोग
होली के अवसर मंचित होने वाली रम्मतों की शुरूआत से पहले अखाड़ा स्थल पर भगवान गणेश, आशापुरा, मां लटियाल, राय भवानी स्वरूप के दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते है। पूरा चौक प्रांगण स्तुती वंदना से गूंज उठता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक मां भगवती और गणेश की चरण वंदना कर सुख समृद्धि की कामना करते है। इस दौरान लोग मन्नत पूरी होने पर प्रसाद, पुष्पमाला और वस्त्र अर्पित करते है।

 

यहां इनका होता है पदार्पण
बिस्सा चौक में मां आशापुरा, बारह गुवाड़ चौक में भगवान गणेश, कीकाणी व्यास चौक में मां लटियाल, आचार्य चौक , मरुनायक चौक व भट्ठड़ो का चौक में राय भवानी, नत्थूसर गेट के अंदर भगवान गणेश स्वरूप का अखाड़े में पदार्पण होता है। आशापुरा, लटियाल, राय भवानी स्वरूप की भूमिका कम आयु के लडक़ो की ओर से निभाई जाती है। रम्मत कलाकारों सहित आमजन श्रद्धा और विश्वास के साथ मां भगवती की स्तुती वंदना करते है। होली के बाद शीतला अष्टमी के दिन सुनारो की गुवाड़ और मशालची नाई समाज की रम्मतों के मंचन से पहले भी भगवान गणेश और मां भगवती स्वरूप के अखाड़े में पदार्पण के साथ रम्मत का आगाज होता है।

 

म्हारी राय भवानी जागै, करै नगर री साय रै
बारह गुवाड़ चौक और नत्थूसर गेट के अंदर मंचित होने वाली रम्मतों का आगाज भगवान गणेश स्वरूप के अखाड़े में पदार्पण से होता है। इस दौरान ‘ आयो रे भोळो गणेशियो, मां गवराजा रो जायो रे भोळो गणेशिया’ ‘करुं जुग जुग पूजन देवा भगत के घर आईयो गुण गांऊला’ स्तुती वंदना का गायन होता है।

वहीं बिस्सा चौक में होने वाली रम्मत के आगाज से पहले मां आशापुरा की स्तुती वंदना ‘करो आशापुरा आनन्द शहर बीकोणे में’ , आचार्य चौक रम्मत का आगाज राय भवानी स्वरूप की स्तुती वंदना ‘म्हारी राय भवानी जागै नवदुर्गा माता जागै, लटियाल ए खेजड़ले री ए जोगण जागै’ और कीकाणी व्यास चौक में होने वाली रम्मत की शुरूआत मां लटियाल स्वरूप के अखाड़े में पदार्पण और स्तुती ‘राय भवानी जागै, लटियाल माता जागै और जय जय जय जगदम्ब भवानी, जय देवी लटियाल’ का सामुहिक गायन होता है। मरुनायक चौक रम्मत में राय भवानी की स्तुती वंदना ‘हंस चढ़ी मां आई भवानी, करै नगर री साय रै’ का गायन होता है। भट्ठडो के चौक की रम्मत राय भवानी की स्तुती वंदना से प्रारम्भ होती है।

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